ओड़िशा में 504 परीक्षा केन्द्र में 15 हजार 136 छात्र-छात्रा दे रहे हैं आफ लाइन में परीक्षा

कोरोना के लिए इस साल मैट्रिक बोर्ड परीक्षा नहीं की गई थी। वैकल्पिक आधार पर बच्चों को नंबर दिया गया था। हालांकि इससे असंतुष्ट छात्र-छात्राओं के लिए शुक्रवार से आफ लाइन परीक्षा शुरू हुई है। जानकारी के मुताबिक कुल 15 हजार 136 छात्र-छात्रा आफ लाइन में परीक्षा दे रहे हैं।

Priti JhaFri, 30 Jul 2021 01:00 PM (IST)
ओड़िशा में शुरू हुई मैट्रिक आफ लाइन परीक्षा

भुवनेश्वर, जागरण संवाददाता। ओड़िशा में आफ लाइन मैट्रिक परीक्षा शुक्रवार से शुरू हुई है। पहले दिन छात्र जहां अपने सिलावस को तैयार कर परीक्षा देने के लिए उत्साहित दिखे तो वहीं तमाम परीक्षा केन्द्रों में परीक्षा कराने की सभी प्रकार के इंतजाम पहले से ही कर लिए गए थे। परीक्षा हाल में व्यक्तिगत दुराव का अनुपालन कर बच्चों को परीक्षा में बैठाया गया। कैंपस को सानिटाइज किया गया। थर्माल स्कानिंग एवं सानिटाइज कर परीक्षार्थियों को हाल के जाने की व्यवस्था की गई। परीक्षा देने के समय सभी को मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है।

गौरतलब है कि कोरोना के लिए इस साल मैट्रिक बोर्ड परीक्षा नहीं की गई थी। वैकल्पिक आधार पर बच्चों को नंबर दिया गया था। हालांकि इससे असंतुष्ट छात्र-छात्राओं के लिए शुक्रवार से आफ लाइन परीक्षा शुरू हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक कुल 15 हजार 136 छात्र-छात्रा आफ लाइन में परीक्षा दे रहे हैं। इसके लिए 504 परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं। पहले दिन मातृभाषा में परीक्षा हुई है। सुबह 10 बजे से 11 बजे तक ओएमआर के जरिए 50 नंबर के आबजेक्टिव एवं 11 से 12 बजे तक 30 नंबर के लिए सब्जेक्टिव परीक्षा हुई। छात्र-छात्रा कुल 80 नंबर की परीक्षा दिए हैं। हालांकि उन्हें 100 नंबर के आधार पर नंबर दिया जाएगा। अनुशासित परीक्षा को संचालन के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है।

मैट्रिक परीक्षा 5 अगस्त तक चलेगी। बोर्ड की सूचना के मुताबिक परीक्षा के समाप्त होने के 15 दिन के अन्दर परीक्षा परिणाम प्रकाशित किया जाएगा। आफ लाइन परीक्षा देने वाले परीक्षार्थी के लिए इस परीक्षा के बाद मिलने वाले नंबर ही निर्णायक नंबर होंगे। इससे पहले जो वैकल्पिक नंबर दिया गया था वह वैध नहीं होगा।

139 दिव्यांग बच्चों का मैट्रिक परीक्षा मामला: सभी दायित्व राज्य सरकार को लेने के लिए राज्य मानवाधिकार आयोग का निर्देश

139 दिव्यांग बच्चों की शुक्रवार को होने वाली मैट्रिक परीक्षा प्रसंग पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने आज सुनवाई करते हुए सभी दायित्व राज्य सरकार को वहन करने के लिए निर्देश जारी किया है। इसके साथ ही बोर्ड एवं सशक्तीकरण विभाग को भी आयोग ने निर्देश जारी किया है। मानवाधिकारी कर्मी ने ओएचआरसी का दरवाजा खटखटाया था। इस साल कोरोना महामारी के कारण मैट्रिक बच्चों की परीक्षा ना कर पूर्व परीक्षा के नंबर के आधार पर राज्य के 6 लाख बच्चों का परीक्षा परिणाम बोर्ड अधिकारी प्रकाशित किए थे। हालांकि बोर्ड ने 139 दिव्यांग बच्चों को परीक्षा देने के लिए कहा था। इस समस्या को लेकर ह्यूमन राइट्स फ्रंट इंडिया के अध्यक्ष मनोज जेना ने राज्य मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया था।

इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि इन 139 दिव्यांगबच्चों की परीक्षा से जो भी असुविधा होगी, इसके लिए बोर्ड अधिकारी जिम्मेदार होंगे। हालांकि बोर्ड अधिकारी ने कहा है कि इन 139 बच्चों का करेसपंडेंट कोर्स के माध्यम से परीक्षा के लिए फार्म भरा गया है। ऐसे में इनका कोई स्थाई रेजिस्ट्रेशन नंबर या पहले की परीक्षा का कानूनन तथ्य बोर्ड के पास नहीं है। ऐसे में बोर्ड कानून के अनुसार इन्हें आकलन के आधार पर नंबर नहीं दे पाएगा।

बोर्ड ने कहा था कि परीक्षा कराए बिना परिणाम प्रकाशित करने में हम कानूनन असमर्थ है। शुक्रवार को इन छात्रों की परीक्षा है और गुरुवारको इस मामले की जरूरी सुनाई हुई है। जेना ने दिव्यांग बच्चों के लिए कई तर्क रखा है। ये बच्चे दिव्यांग हैं ऐसे में सामान्य बच्चों की तरह इनका विचार करने के बदले इनकी समस्या को मानवीयता के साथ विचार करने के लिए आज की सुनवाई के समय ओडिशा अभिभावक महासंघ के सह अध्यक्ष प्रसन्न विषोयी ने मानवाधिकार आयोग का ध्यान आकर्षित किया था। सभी परिस्थिति पर विचार करते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने इन बच्चों के परीक्षा का पूरा दायित्व बोर्ड अधिकारी एवं विकलांग (भिन्नक्षम) विकास विभाग को लेने के लिए निर्देश दिया है।

दिव्यांग दृष्टिहीन बच्चों की उत्तर पुस्तिका में उत्तर लिखने के लिए लिपिकार, बच्चों के आने जाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था, खाद्य एवं पेयजल की व्यवस्था, जरूरी स्थान पर परीक्षा के चलते रहने हेतु अभिभावकों के साथ बच्चों के लिए सभी जरूरी व्यवस्था, स्वास्थ्य समस्या के लिए डाक्टरी इलाज आदि सभी व्यवस्था करने के लिए आयोग ने सरकार को निर्देश जारी किया है। आज की इस सुनवाई के दौरान ह्यूमन राइट्स फ्रंट के संयोजक रमेश भारती भी उपस्थित थे। 

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