Coal Scam Case: पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को सजा सुनाए जाने से समर्थकों में मायूसी

पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे की सजा से सर्मथकों में निराशा
Publish Date:Mon, 26 Oct 2020 12:54 PM (IST) Author: Babita kashyap

राउरकेला, कमल विश्वास। नई दिल्ली की विशेष सीबीआइ अदालत द्वारा कोयला घोटाले में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को दोषी ठहराकर तीन साल की सजा सुनाए जाने से उनके समर्थकों को झटका लगा है। पिछले चार दशकों से दिलीप राय के साथ रहे रघु बल ने कहा कि वह इस खबर को सुनने के बाद असहज महसूस कर रहे हैं। राय के एक अन्य समर्थक और राउरकेला बार एसोसिएशन (आरबीए) के अध्यक्ष रमेश बल ने कहा, सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला अप्रत्याशित था। यहां तक ​​की आदेश ने राय के समर्थक को निराश कर दिया है। हमें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। 

 दिलीप रे के पास उच्च न्यायालय में आदेश को चुनौती देने की गुंजाइश है और हमें उम्मीद है कि वे इस मामले में साफ बरी होकर आएंगे। उच्च न्यायपालिका निचली अदालत के फैसले को उलट देगी। पूर्व केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री दिलीप रे (स्वतंत्र प्रभार) का राजनीतिक जीवन जनता दल (अब बीजद), कांग्रेस और भाजपा में लगभग चार दशक तक फैला रहा। 30 नवंबर, 2018 को, उन्होंने बीजेपी छोड़ दी थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित राउरकेला में दो मेगा परियोजनाओं के निष्पादन में देरी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए ओडिशा विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। सीबीआइ अदालत ने अप्रैल 2017 में राय को आरोप तय करके मुकदमे में डाल दिया था और उन्होंने निर्दोषता की अपील की थी।

  पार्षद से राजनीतिक जीवन का सफर किया था शुरु 

 पार्षद से अपने राजनीतिक जीवन का सफर शुरु करने वाले दिलीप राय ने राउरकेला से लेकर केंद्र की राजनीति तक अपनी पकड़ आज भी बरकरार रखी है। केंद्र में अटक बिहारी बाजपेयी की सरकारी बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को आज भी याद किया जाता है। सुंदरगढ़ जिले के राउरकेला शहर से पार्षद का चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पार्षद बनने के बाद उन्होंने राउरकेला नगरपालिका की सत्ता बतौर एक चेयरमैन के रूप में संभाली। 

 1985 में वे जनता दल से राउरकेला के विधायक बने। लगातार दूसरी बार राउरकेला के विधायक बनने पर नब्बे के दशक में स्वर्गीय बीजू पटनायक की जनता दल सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री उद्योग का पद दिया। 1996 से 2002 व 2002 से 2008 तक राज्यसभा के सदस्य के रूप में दो कार्यकाल भी निभाए। 1996-97 के दौरान, उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया, जिसमें उन्होंने पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे विभागों को संभाला। 1998-99 में दिलीप राय को कोयला और फिर स्टील (1999-2000) राज्य मंत्री का पद मिला। 2000 से 2014 तक, दिलीप राय सक्रिय राजनीति से कटे रहे, लेकिन बदलती हुई राजनीतिक पर उनकी पैनी नजर बनी रही। इस दौरान उन्होंने खुद को होटल के व्यापार में तल्लीन रखा व अपने होटल के श्रृंखला का विस्तार किया। लेकिन राजनीतिक के नशा पर वे काबू पाने में असमर्थ रहे। फिर से उन्होंने अपनी राजनीति पारी की शुरुआत अपने गृह क्षेत्र राउरकेला से 2014 विधानसभा चुनाव सफलतापूर्वक जीत कर की।

   नवीन पटनायक को सीएम बनाने में निभायी थी मुख्य भूमिका  

   बीस साल पहले बीजू जनता दल के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय दिलीप राय को दिया जाता है। उन्होंने आधा दर्जन अन्य नेताओं - जैसे एयू सिंहदेव, प्रसन्ना आचार्य, बिजय महापात्रा के साथ बीजेपी के तत्कालीन नेतृत्व के समर्थन से बीजू पटनायक की मृत्यु के बाद बीजेडी का गठन किया था। साल 2000 में, नवीन पटनायक राज्य में बीजेडी-भाजपा गठबंधन सरकार के सीएम बने तो, पार्टी ने केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री बनने के लिए राय को भेजा था। हालांकि, 2002 में नवीन पटनायक ने राय को पार्टी से निकाल दिया। जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली और 2009 के चुनावों से पहले बीजेपी का दामन थाम लिया। उन्होंने 2014 में राउरकेला विधानसभा सीट पर बीजेडी उम्मीदवार शारदा प्रसाद नायक को लगभग 10,800 वोटों के अंतर से हराया।  

 9 जनवरी 1954 को राउरकेला में जन्में दिलीप रे राजनेता के अलावा पूर्वी भारत के एक प्रमुख होटल मैफेयर ग्रुप ऑफ होटल्स के संस्थापक और सीएमडी हैं। उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में लॉ और मास्टर्स की पढ़ाई की थी। वे स्वर्गीय श्री हृषिकेश राय के पुत्र हैं और उनके 2 पुत्र और 1 पुत्री हैं।

 

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