Pulwama Terror Attack: शहीद मनोज बेहेरा को श्रद्धांजलि देने सीएम के साथ उमड़ा हुजूम

जासं, भुवनेश्वर। जम्मू-काश्मीर पुलवामा में गुरुवार को आतंकवादी आत्मघाती हमले में शहीद भारत माता के वीर सपूतो में से एक हैं ओडिशा प्रदेश कटक जिला अन्तर्गत निआली थाना स्थित रतनपुर पंचायत गजावर गांव के मनोज कुमार बेहेरा। मनोज बेहेरा पढ़ाई में भी अव्वल थे। वह प्रथम श्रेणी में मैट्रिक परीक्षा 2001 में स्थानीय अमरेश्वर उच्च विद्यालय से उत्तीर्ण की थी। मनोज बेहेरा की दो साल पहले ही शादी हुई थी। इस बीच उन्हें एक कन्या संतान भी हुई। मनोज के शहीद होने की सूचना मिलने के बाद कटक जिला के साथ पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है।

शहीद मनोज ने अपने आगामी जीवन को लेकर कई तरह के सपने भी देखे थे। डेढ़ महीने की छुट्टी बीताने के बाद वह पिछले 6 फरवरी को ही कार्य में योगदान दिए थे। छुट्टी खत्म होने के बाद जब वह कार्य में योगदान देने के लिए जा रहे थे तो उन्होंने अपने परिवार से कहा था कि अपने आधे अधुरे घर को वह जल्द ही बना देंगे। मृत्यु से ठीक पहले दोपहर एक बजे उन्होंने अपनी पत्नि से बात की थी और कहा था कि वह अब श्रीनगर वेश कैंप जा रहे हैं। हालांकि नसीब में तो कुछ और लिखा था और आतंकवादी हमले में वह शहीद हो गए।

साल 2006 में हुए थे CRPF में भर्ती
जानकारी के मुताबिक शहीद मनोज कुमार बेहेरा 2006 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। मनोज कुमार के शहीद होने की सूचना मिलने के बाद उनके परिवार के साथ आस-पड़ोस में शोक की लहर दौड़ गई है। उनकी अंतिम यात्रा में आज भुवनेश्वर बीजू पटनायक इण्टरनेशनल एयरपोर्ट पर हजारों की संख्या में लोगों का हुजूम उमड़ा। एयरपोर्ट पर खुद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, केन्द्र मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, केन्द्र मंत्री जुएल ओराम, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निरंजन पटनायक, भाजपा अध्यक्ष बसंत पंडा के साथ हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहकर श्रद्धांजलि अर्पित किए।

सीएम पटनायक ने की सहायता राशि की घोषणा
वहीं मुख्यमंत्री नवन पटनायक ने शहीद जवानों के प्रत्येक परिवार के लिए 25 लाख रुपये सहायता राशि देने की घोषणा किए हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने इसस पहले 10 लाख रुपया सहायता राशि देने की घोषणा किए थे, जिसकी चारों तरफ से निंदा होने के बाद मुख्यमंत्री ने आज सहायता राशि को 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपया कर दिया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उक्त दोनों शहीद जवान जिस स्कूल में पढ़ रहे थे, उसे उनके नाम पर नामित करने की भी घोषणा किए हैं। इसके अलावा शहीद परिवार के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन करने तथा उनके गांव को माडल पंचायत बनाने की घोषणा किए हैं।

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