क्या है DRDO की कोरोना दवा 2 DG, जानिए कैसे करती है काम; क्यों कहा जा रहा इसे संजीवनी

जानिए भारत की कोरोना की दवा 2 DG के बारे में सबकुछ। (फोटो: दैनिक जागरण)

भारत में जारी कोरोना के खिलाफ जंग में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की नई दवा उम्मीद की एक किरण के रूप में आई है। आइए जानते हैं कोकना की दवा 2 DGआखिर क्या है ये कैसे काम करती है और क्यों इसे जीवनरक्षक कहा जा रहा है।

Shashank PandeyMon, 17 May 2021 11:11 AM (IST)

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत ने कोरोना मरीजों के लिए इलाज के लिए 2 DG दवा लांच कर दी है। कोरोना के खिलाफ जंग में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की नई दवा  उम्‍मीद की किरण लेकर आई है। इस दवा का नाम 2-डीऑक्‍स‍ी-डी-ग्लूकोज('2 DG') है। डीआरडीओ द्वारा विकसित कोरोना की इस दवा 2-डीजी (2-deoxy-D-glucose) को देश में 'गेमचेंजर' और 'संजीवनी' भी कहा जा रहा है। 

यह दवा कोरोना के मरीजों के लिए काफी असरदार मानी जा रही है। माना जा रहा है ये दवा कोरोना मरीजों को तेजी से ठीक होने में मदद करेगी और उनकी ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम करेगी। इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों की ऑक्सजीन पर निर्भरता काफी कम हो जाती है। देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच यह दवा मरीजों के लिए उम्मीदें काफी बढ़ाने वाली है।

किसने और कहां बनाई गई दवा ?

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के इनमास लैब के वैज्ञानिकों ने यह दवा (Corona drug '2DG') डाक्टर रेड्डी लैब्स के साथ मिलकर बनाई है। इस दवा के मरीजों पर इस्तेमाल को डीसीजीआई ने भी मंजूरी दे दी है। डीआरडीओ की प्रयोगशाला आईएनएमएएस द्वारा दवा 2-डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) का एक एंटी-कोविड-19 चिकित्सकीय अनुप्रयोग विकसित किया गया है। 

हालांकि इस नई दवा को लेकर लोगों के मन में बहुत से सवाल हैं, जिसमें से खासतौर पर लोग सोच रहे होंगे कि यह दवा कैसे खाई जाएगी, कितनी मात्रा में ली जाएगी। तो चलिए हम आपके इन सवालों के जवाब देते हैं।

कैसे खाई जाती है ये दवा?

कोरोना की ये दवा एक सैशे में पाउडर के रूप में आती है, जिसे पानी में घोलकर लिया जाता है। यह कोरोना वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में जमा होती है और वायरल संश्लेषण और ऊर्जा उत्पादन को रोककर वायरस को शरीर में बढ़ने से रोकती है। वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में जाना इस दवा को सबसे बेजोड़ बनाता है।

कैसे करती है काम ?

इस दवा से देश में बहुमूल्य जीवन बचाए जाने की उम्मीद है। इससे कोरोना मरीजों के अस्पताल में बिताए जाने वाले दिनों की संख्या कम हो जाने की उम्मीद है। अब तक सामने आए शोध के अनुसार, यह दवा रोगियों को तेजी से ठीक करने में मदद करती है। ये दवा कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन देने पर निर्भरता को कम करती है। दरअसल, यह दवा ग्लूकोज का एक सब्स्टिट्यूट है। कोरोना वायरस अपनी एनर्जी के लिए मरीज के शरीर से ग्लूकोज लेता है, मगर ग्लूकोज के धोखे में वह इस दवा का इस्तेमाल करने लगता है जिससे वायरस को एनर्जी मिलना बंद हो जाती है और उनका वायरल सिंथेसिस बंद होने लगता है। इस तरह नए वायरस का बनना बंद हो जाता है और साथ ही बाकी वायरस भी मरने लगते हैं। 

कब और कितनी मात्रा में ली जाती है ये दवा?

यह दवा सैशे (पाउच) में पाउडर के रूप में मिलेगी, जिसे पानी में मिलाकर मुंह से ही मरीज को दिया जाएगा। हालांकि यह दवा की कितनी मात्रा और कितने समय में दी जानी है, इसका निर्णय डॉक्टरों पर छोड़ा गया है। इस बारे में डॉक्टर मरीज की उम्र, मेडिकल कंडीशन आदि की जांच करके ही करेंगे। बता दें कि डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने बिना डॉक्टर की सलाह, कोरोना से बचने के नाम पर या ज्यादा मात्रा में यह दवा न लेने की चेतावनी भी दी गई है।

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