अगले सौ दिनों में हर स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र में चलेगा पानी का कनेक्शन देने का अभियान

जल जीवन मिशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो।
Publish Date:Wed, 30 Sep 2020 06:15 AM (IST) Author: Arun Kumar Singh

 नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव के हर घर में नल से जलापूर्ति का लक्ष्य है, जो वर्ष 2024 तक पूरा करना है। लेकिन इसके पहले अगले एक सौ दिनों में ही देश के प्रत्येक स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र में नल से जलापूर्ति कर दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा मंगलवार को जल जीवन मिशन के एक कार्यक्रम में की। स्कूलों व आंगनवाड़ी केंद्रों में पानी का कनेक्शन लगाने में राज्यों की भूमिका अहम होगी। 

उन्होंने इसके लिए राज्य सरकारों से इस दायित्व को अपने कंधों पर उठाने को कहा। इस अभियान की शुरुआत गांधी जयंती दो अक्तूबर से की जाएगी। जल जीवन मिशन का यह विशेष देशव्यापी अभियान स्वच्छ भारत मिशन के तौर पर चलाया जाएगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ ग्राम पंचायतों की मदद ली जाएगी। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्कूली बच्चों की सेहत के मद्देनजर इस अभियान को स्थानीय स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। स्वच्छता अभियान के दौरान भी इसी तरह एक विशेष अभियान चलाकर पूरे देश के सभी स्कूलों में शौचालयों का निर्माण किया गया था। इसके चलते शौचालयों के अभाव में स्कूली पढ़ाई छोड़ देने वाली बच्चियों का दाखिला बढ़ गया। इसे स्थानीय स्तर पर बहुत सराहा गया है। 

आज पैसा पानी में नहीं बहता, पानी पर लगाया जाता है

पीएम मोदी ने कहा कि आज पैसा पानी में नहीं बहता, पानी पर लगाया जाता है। हमारे यहां तो हालत ये थी कि पानी जैसा महत्वपूर्ण विषय भी कई मंत्रालयों और विभागों में बंटा हुआ था। विभागों में न कोई तालमेल था और न ही समान लक्ष्य के लिए काम करने का कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश। पानी से जुड़ी चुनौतियों के साथ अब ये मंत्रालय देश के हर घर तक जल पहुंचाने के मिशन में जुटा हुआ है।

आज जल जीवन मिशन के तहत हर दिन करीब 1 लाख परिवारों को शुद्ध पेयजल की सुविधा से जोड़ा जा रहा है। सिर्फ एक साल में ही देश के 2 करोड़ परिवारों तक पीने का पानी पहुंचाया जा चुका है। नतीजा ये हुआ कि देश में सिंचाई हो या फिर पीने के पानी से जुड़ी समस्या, ये निरंतर विकराल होती गईं। आप सोचिए, आजादी के इतने वर्षों बाद भी 15 करोड़ से ज्यादा घरों में पाइप से पीने का पानी नहीं पहुंचता था।

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