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इंतजार होने वाला खत्‍म आज देखिए कोरोना के खिलाफ शुरू हुई जंग में भारत की कहानी

नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। बीते छह माह से यूं तो पूरी दुनिया ही जानलेवा कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रही है लेकिन इसमें भारत की कहानी काफी अहम है। अहम इसलिए क्‍योंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। लेकिन यदि अन्‍य देशों की से यहां पर इस वायरस के प्रकोप की बात करें तो वो कम है। भारत में इससे होने वाली मौतों की दर भी दूसरे कई देशों के मुकाबले काफी कम है। ये राहत की बात जरूर कही जा सकती है लेकिन, इसके पीछे एक रणनीति है जिसकी वजह से ये सभी कुछ मुमकिन हो पाया है। बीते छह माह में भारत के लोगों ने काफी कुछ देखा, सहन किया और सीखा है। पूरी दुनिया में इस जानलेवा वायरस से संक्रमित होने वालों का आंकड़ा 1.37 करोड़ के पार हो चुका है। कोरोना संक्रमितों की संख्‍या के आधार पर भारत विश्‍व में तीसरे नंबर पर आ चुका है। आज कोरोना के साए में भारत की यही कहानी डिस्‍कवरी प्‍लस के माध्‍यम से पूरी दुनिया के सामने आने वाली है।

आज डिस्‍कवरी प्‍लस चैनल पर आने वाली ये डॉक्‍यूमेंट्री हिंदी के अलावा इंग्लिश, तेलगु, कन्‍नड़, मलयालम और बांग्‍ला भाषा में देखी जा सकेगी। हिंदी में इसको बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी आवाज दी है तो तमिल के लिए लेखक और निर्देशक गौतम वासुदेव मैनन ने इसको अपनी आवाज दी है। कुछ दिन पहले ही इस डॉक्‍यूमेंट्री पर बात करते हुए मनोज बाजपेयी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा था कि हमेशा से ही उन्‍हें एक बेहतर विषय अपनी तरफ आकर्षित करता रहा है। उनका कहना था कि इसमें अपनी आवाज देकर वो खुद को सम्‍मानित महसूस कर रहे हैं। उनके मुताबिक ये डॉक्‍यूमेंट्री ये आने वाली पीढ़ी के लिए भी बेहद खास होगी। इसके जरिए वो जान पाएंगे कि सरकार और देशवासियों ने इस जानलेवा वायरस के खिलाफ शुरू हुई जंग में कैसे अपना योगदान दिया।

उन्‍होंने कहा कि इसमें आवाज देते समय उन्‍होंने अपना सारा अनुभव निचोड़ दिया है। वहीं मैनन भी इससे काफी उत्‍साहित हैं। उनके मुताबिक ये उनकी पहली डॉक्‍यूमेंटी है। इसके लिए उन्‍होंने बहुत मेहनत भी की है। आज के अलावा 20 जुलाई को इसे डिस्‍कवरी चैनल पर भी देखा जा सकेगा। ये महज एक डॉक्‍यूमेंट्री नहीं है बल्कि इसमें कोरोना वायरस की शुरुआत कब, कहां और कैसे हुई इसकी जानकारी के अलावा ये कैसे-कैसे और कहां-कहां फैलता चला गया इसकी भी जानकारी इसमें शामिल है। इसमें इसकी टाइमलाइन के अलावा इससे जुड़े एक्‍सपर्ट की राय को भी शामिल किया गया है।

बीते छह माह के दौरान केंद्र और राज्‍य की सरकारों द्वारा इसकी रोकथाम के कई तरह के उपाय किए गए और कई बड़े फैसले लिए गए। इस लड़ाई में सरकार के अलावा देश के सभी 130 करोड़ से अधिक लोगों ने योगदान दिया। इसकी ही बदौलत घनी आबादी होने के बाद भी भारत अन्‍य देशों की तुलना में वायरस की चपेट में कम आया है। मौजूदा हकीकत ये भी है कि भारत में रिकवरी रेट 50 फीसद के भी आगे है। इतना ही नहीं इसकी रोकथाम को बनी रणनीति की ही बदौलत भारत में इससे होने वाली मौतें भी दूसरे देशों से कम है। गौरतलब है कि इस वायरस की रोकथाम के लिए भारत ने सबसे पहले कदम के तौर पर देशव्‍यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी।

इस लॉकडाउन के दौरान लाखों लोगों की रोजी रोटी पर संकट के बादल छाने की वजह से इन लोगों ने पैदल ही अपने घर वापसी का जोखिम भरा फैसला लिया था। इसमें उन लोगों की भी कहानी को शामिल किया गया है जो इस जंग में अपना दुख दर्द भूलकर चौबिस घंटे मरीजों की सेवा में लगे रहे। इसके अलावा ये डॉक्‍यूमेंट्री लॉकडाउन को कामयाब बनाने के लिए सड़कों पर उतरे पुलिसकर्मी, इस मुश्किल घड़ी में साफ-सफाई का जिम्‍मा संभालने वाले कर्मी या ऐसे दूसरे लोग जो दूसरों की मदद को सामने आए, की कहानी को भी बयां करती है।

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