त्रिपुरा में हिंसा के दौरान यूएपीए के तहत दर्ज 102 मामलों का मुख्यमंत्री विप्लव देव ने मांगा ब्योरा

त्रिपुरा में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान इंटरनेट मीडिया पर कमेंट करने वाले 102 लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के मामलों की समीक्षा का मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देव ने निर्देश दिया है ।

TaniskPublish:Sun, 28 Nov 2021 12:20 AM (IST) Updated:Sun, 28 Nov 2021 12:20 AM (IST)
त्रिपुरा में हिंसा के दौरान यूएपीए के तहत दर्ज 102 मामलों का मुख्यमंत्री विप्लव देव ने मांगा ब्योरा
त्रिपुरा में हिंसा के दौरान यूएपीए के तहत दर्ज 102 मामलों का मुख्यमंत्री विप्लव देव ने मांगा ब्योरा

अगरतला, प्रेट्र। त्रिपुरा में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान इंटरनेट मीडिया पर कमेंट करने वाले 102 लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के मामलों की समीक्षा का मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देव ने निर्देश दिया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वीएस यादव को सुप्रीम कोर्ट के चार अधिवक्ताओं समेत 102 लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा करने के लिए कहा गया है।

मामलों की जांच पुलिस की अपराध शाखा कर रही

त्रिपुरा में यूएपीए के इन मामलों की जांच पुलिस की अपराध शाखा कर रही है। डीजीपी ने मुख्यमंत्री के निर्देश से शाखा को अवगत करा दिया है और मुख्यमंत्री कार्यालय को जल्द रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी के अनुसार अगर पाया गया कि आरोपी अफवाह फैलाकर सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे, तो पुलिस उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।

ठोस सुबूत नहीं पाए गए तो एफआइआर रद कर दी जाएगी

अगर किसी मामले में ठोस सुबूत नहीं पाए गए तो उसमें एफआइआर रद कर दी जाएगी। राज्य सरकार का आरोप है कि बाहरी लोगों ने साजिश रचकर त्रिपुरा में शांति भंग करने की कोशिश की। 26 अक्टूबर को हुई घटना के बाद जलती हुई मस्जिद की झूठी फोटो इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट करके भावनाएं भड़काई गईं।

इंटरनेट मीडिया की पोस्ट की प्रतिक्रिया में महाराष्ट्र के कई शहरों में हिंसा

बांग्लादेश में मंदिरों और पूजा पंडालों पर हुए हमलों के विरोध में विश्व हिंदू परिषद ने अगरतला में रैली आयोजित की थी। उसी दौरान रोवा बाजार इलाके में मुस्लिमों की कुछ दुकानों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी। लेकिन इंटरनेट मीडिया में उन घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और टिप्पणियां की गईं। इंटरनेट मीडिया की पोस्ट की प्रतिक्रिया में महाराष्ट्र के कई शहरों में हिंसा हुई थी।

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