यूनिटेक के संस्थापक रमेश चंद्रा और उनकी पुत्रवधू गिरफ्तार, मनी लांड्रिंग मामले में कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का मनी लांड्रिंग मामला दिल्ली पुलिस की आíथक अपराध शाखा और केंद्रीय जांच ब्यूरो की कई प्राथमिकियों पर आधारित है। ये प्राथमिकी घर खरीदारों ने यूनिटेक समूह और इसके प्रमोटरों के खिलाफ दर्ज कराए थे।

Manish PandeyTue, 05 Oct 2021 08:10 AM (IST)
रमेश चंद्रा और उनकी पुत्रवधू की गिरफ्तारी मनी लांड्रिंग मामले में की गई है।

नई दिल्ली, प्रेट्र। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को यूनिटेक के संस्थापक रमेश चंद्रा, उनकी पुत्रवधू प्रीति चंद्रा और एक कंपनी के अधिकारी को रियल एस्टेट समूह और इसके प्रमोटरों के खिलाफ दर्ज मनी लांड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने बताया कि तीनों को मनी लांड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया है। ये मामले रमेश चंद्रा के बेटों-संजय चंद्रा और अजय चंद्रा के खिलाफ दर्ज किए गए थे। प्रीति चंद्रा यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा की पत्नी हैं, जो अभी जेल में हैं।

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार होने वालों में तीसरे व्यक्ति राजेश मलिक हैं, जो कारनोस्टी मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी हैं। इस कंपनी का दर्ज मामले के साथ कथित रूप से संबंध है। गिरफ्तार तीनों आरोपितों-रमेश चंद्रा, प्रीति चंद्रा और राजेश मलिक को प्रवर्तन निदेशालय मंगलवार को अदालत में पेश कर हिरासत की मांग करेगा।

घर खरीदारों के धन की हेराफेरी करने के आरोप में चंद्रा बंधुओं को गिरफ्तार कर पहले तिहाड़ जेल में रखा गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें मुंबई के तलोजा जेल में स्थानांतरित किया गया। इससे पहले ईडी ने शीर्ष अदालत में दावा किया था कि चंद्रा बंधु जेल कíमयों की मिलीभगत से तिहाड़ जेल के भीतर से अपना कारोबार चला रहे हैं।

प्रवर्तन निदेशालय का मनी लांड्रिंग मामला दिल्ली पुलिस की आíथक अपराध शाखा और केंद्रीय जांच ब्यूरो की कई प्राथमिकियों पर आधारित है। ये प्राथमिकी घर खरीदारों ने यूनिटेक समूह और इसके प्रमोटरों के खिलाफ दर्ज कराए थे।

इस साल की शुरुआत में ईडी ने पीएमएलए की विभिन्न धाराओं के तहत यूनिटेक समूह और इसके प्रमोटरों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था। संजय चंद्रा और अजय चंद्रा पर दो हजार करोड़ रुपये अवैध रूप से साइप्रस और केमैन द्वीपों पर भेजने के आरोप में यह मामला दर्ज किया गया था।

ईडी ने चार मार्च को शिवालिक समूह, त्रिकार समूह, यूनिटेक समूह और कारनोस्टी समूह के 35 ठिकानों पर मुंबई एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में छापेमारी की थी। ईडी ने कहा था कि इस मामले में अपराध से हासिल कुल 7,638.43 करोड़ रुपये की रकम का पता चला है। एजेंसी ने जांच के हिस्से के रूप में अब तक 672.52 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है।

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