कोवैक्सीन के ट्रायल में पारदर्शिता से बन सकती थी विश्वसनीयता, बोले वैक्सीन लेने वाले डॉ विकास डोगरा

कोवैक्सीन के ट्रायल में बरती जानी चाहिए थी पारदर्शिता

आज से दुनिया भर में सबसे बड़े वैक्सीनेशन ड्राइव की शुरुआत भारत में की गई। इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिलने वाले इन वैक्सीन को लेकर लोगों के बीच अविश्वास है जिसके लिए डॉक्टर विकास डोगरा ने कहा कि ट्रायल के दौरान पारदर्शिता के साथ काम होना चाहिए था।

Publish Date:Sat, 16 Jan 2021 03:19 PM (IST) Author: Monika Minal

 नई दिल्ली, आइएएनएस। कोविड वैक्सीन 'कोवैक्सीन (Covaxin)' की पहली खुराक पाने वाले देश भर के 3 हजार हेल्थकेयर वर्करों में से एक डॉक्टर विकास डोगरा (Dr Vikas Dogra) ने शनिवार को बताया कि भारत बायोटेक  (Bharat Biotech)  द्वारा विकसित कोवैक्सीन (Covaxin) के क्लिनिकल ट्रायल के डाटा के स्पष्ट नहीं होने के कारण लोगों के बीच इसे लेकर विश्वसनीयता की कमी है। इसके इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी की मांग करने के साथ ही फर्म की ओर से डाटा जारी किया जाना चाहिए था। 

राजीव गांधी सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल (Rajiv Gandhi multisuperspeciality Hospital) के नोडल अधिकारी डॉ. विकास डोगरा ने वैक्सीन का पहला डोज लिया। इसके पीछे उनका उद्देश्य कोरोना वैक्सीन को लेकर किसी भी तरह के भ्रम को दूर करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वैक्सीन को लेकर किसी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। वैज्ञानिकों पर भरोसा रखें। इस वैक्सीन के सहारे ही हम लोग कोरोना के खिलाफ जंग जीत पाएंगे।

डॉ. विकास डोगरा ने एक दिन पहले ही कहा था कि हम मार्च से जिस हथियार का इंतजार कर रहे थे, वह अब आ गया है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने दिन-रात मेहनत की है। सभी जरूरी परीक्षणों के बाद इसकी शुरुआत हुई है इसलिए इस पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए और न ही सवाल उठाने चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम लोग पिछले नौ महीनों से इस महामारी से जंग लड़ रहे हैं। इसलिए हमने इस मोर्चे पर आगे रहकर लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।' उनका कहना है कि इंटरनेट मीडिया पर वैक्सीन आने के बाद से ही अफवाहें शुरू हें जो उचित नहीं है।

कोविशील्ड और कोवैक्सीन को 3 जनवरी को केंद्र ने इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। ऑक्सफोर्ड व एस्ट्राजेनेका ने मिलकर कोविशील्ड को विकसित किया है। दोनों वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी मिलने के बाद से ही ही इसकी क्षमता और प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कोवैक्सीन के फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल्स के लिए पूरे देश में 25 जगहों पर  25,800 वॉलंटियर्स ने एनरोल किया। हालांकि इसके प्रभाव के परिणाम सामने नहीं आए। 

 

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