ब्रिटेन के बुजुर्ग उद्योगपति की भारत को जानने की अनूठी यात्रा, मॉरगन रहा आकर्षण का केंद्र

1909 में ब्रिटेन के मैलवर्न निवासी हेनरी मॉर्गन नामक इंजीनियर ने मॉरगन को डिजाइन किया था जो आगे चलकर दुनिया भर के क्लासिक कारों में शुमार हो गया। इसे प्यार से मौगीज भी कहते हैं। कार का वजन 525 किलो है।

Sanjay PokhriyalWed, 22 Sep 2021 04:16 PM (IST)
ऐलेन के पिता ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध के बीच पहली बार मॉरगन थ्री व्हीलर ड्राइव किया था।

अंशु सिंह। लोकोपकारक कार्यों में गहरी रुचि रखने वाले ब्रिटेन के 74 वर्षीय उद्योगपति एवं एडवेंचर ऐलान ब्रेट वेथ एक पर्यटक के तौर पर तो दो बार पहले भी भारत का भ्रमण कर चुके हैं। लेकिन बीते वर्ष का दौरा कुछ विशेष रहा। यूं कहें कि वे एक खास उद्देश्य के साथ यहां आए। ट्रांस इंडिया चैलेंज के तहत, ऐलेन ने अपने तीन पहिये ‘मॉरगन’ से 34 दिनों में देश के अलग-अलग शहरों की करीब 3500 मील की यात्रा की। ऐलेन के साथ हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे यात्रा की शुरुआत मुंबई से हुई, जो कई राज्यों से गुजरते हुए यहीं पर आकर समाप्त हुई। उन्होंने इस यात्रा का भरपूर आनंद लिया और कुछ बेहद सुंदर यादों को सहेजने में सफल रहे।

74 वर्ष के हैं प्रो. ऐलेन ब्रेटवेथ। लेकिन जिंदादिल और खुशमिजाज इतने कि सामने चुनौती आई नहीं कि उसे फौरन स्वीकार कर लिया। इस उम्र में जब कोई लंबी सड़क यात्रा की कल्पना भी नहीं कर सकता, तब इन्होंने भारत की 5600 किलोमीटर यात्रा करने का निर्णय लिया। वह भी अपनी तीन पहिया मॉरगन में, जो पहले कभी भारत की सड़कों पर नहीं चली थी। पत्नी पैट ब्रेटवेथ थोड़ी असमंजस में थीं कि ये सब कैसे होगा? क्योंकि कुछ समय पहले ही ऐलेन की डबल बायपास (वॉल्व रिप्लेसमेंट) सर्जरी हुई थी। लेकिन ऐलेन का इरादा पक्का हो चुका था। वे दोनों लंदन से मुंबई पहुंचे और शुरू हो गई भारत के अलग-अलग राज्यों की एक अनूठी यात्रा। ऐलेन बताते हैं, मैंने यह दिलचस्प ट्रांस इंडिया चैलेंज इसलिए स्वीकार किया, ताकि पर्यटक के नजरिये से इतर उस भारत को देख व जान सकूं, जो शहरों के अलावा गांवों में भी बसता है।

दरअसल, मुझे भारत से हमेशा से प्यार रहा है। यहां के लोगों की मुस्कुराहट आकर्षित करती है। जहां भी गया, उनकी दोस्ती, निस्वार्थ प्रेम व नम्रता ने अभिभूत कर दिया। मॉरगन ऐलेन की पसंदीदा कार है। वे जहां भी गए, लोगों ने कौतुहल वश अनगिनत तस्वीरें और सेल्फी खींची। मुंबई से शुरू हुई इस यात्रा की एक खास बात यह भी थी कि इसमें ऐलेन के साथ पत्नी पैट भी रहीं, जिनकी उम्र 74 वर्ष है। लेकिन चेहरे पर कोई शिकन या थकावट नहीं। जबकि यहां सोने-जागने का समय लंदन से एकदम भिन्न है। कहती हैं, हम पचास साल से ऊपर से साथ हैं और कई रोमांचक यात्राएं की हैं। यहां भी मैंने हर पल का आनंद लिया है, क्योंकि जिंदगी ऐसे मौके बार-बार नहीं देती है।

भारत से है पुराना कनेक्शन: विदेशियों का भारत प्रेम छिपा नहीं है। फिर भी मन में उत्सुकता हुई कि आखिर ऐलेन और पैट को यह देश इतना क्यों पसंद है? बातों-बातों में ऐलेन ने उस राज से भी पर्दा उठा दिया। उन्होंने बताया कि उनका जन्म वैसे तो लंदन में हुआ है। वहीं, बर्मिंघन यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग और लंदन बिजनेस स्कूल से एमबीए किया। लेकिन मां और नानी से भारत की बहुत-सी कहानियां सुनी थीं। ऐलेन की नानी का जन्म मैसूर में हुआ था और शादी मुंबई में। मां का जन्म बेलगाम में हुआ और शादी शिमला के वॉयसराय चैपल में। बड़े ही उत्साहित होकर ऐलेन बताते हैं, मुझे घूमने, एडवेंचर ट्रिप्स पर जाने का जुनून-सा रहा है। हाल की भारत यात्रा में हमने मां का जन्म स्थान और चैपल, दोनों जगह देखे। बहुत ही भावुक क्षण था। अपने परिवार से संबंधित एक और दिलचस्प बात उन्होंने बतायी कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय उनके दादा जी, सर रेजिनेल्ड मैक्सवेल दिल्ली के मुख्यमंत्री थे और यहां का 24 अकबर रोड उनका सरकारी निवास स्थान था, जहां वे 1938 और 1943 के बीच रहे।

पैट ने बताया, ऐलेन के भाई डेविड का एक वीडियो भी है, जिसमें वह इस परिसर के गार्डन में खेल रहे हैं। इस बार की यात्रा में हम वहां भी गए। दरअसल, ऐलेन की मां और नानी डायरियां लिखा करती थीं, जिनमें उन्होंने भारत प्रवास का पूरा वर्णन किया है कि वे कहां-कहां रहीं, क्या-क्या किया, कैसे अपने स्टाफ को पढ़ाया आदि। पैट बताती हैं, हमने डायरियों को फॉलो किया। उसमें छिपे किस्सों को पढ़कर महसूस हुआ कि हमने भारत को कितना मिस किया है। ऐलेन थोड़े भावुक होकर बताते हैं कि उनके दादा जी पेंटिंग करते थे। आज भी लंदन का हमारा घर उनकी भारत में बनाई गई लैंडस्केप पेंटिंग से सजा हुआ है। इस तरह के कई जादुई लम्हें इन्होंने यहां बिताए हैं। पुराने किस्सों को प्रत्यक्ष होकर जीया है।

यात्रा के बहाने समाजसेवा: ऐलेन एक सैलानी के तौर पर दो बार पहले भी भारत आ चुके हैं। उन्हीं यात्राओं के दौरान मन में इस देश को और करीब से जानने, उसके लिए कुछ करने की इच्छा जाग्रत हुई। दरअसल, अपने देश में वे विविध प्रकार के परोपकारी कार्यों में पहले से संलिप्त रहे हैं। विशेषकर सर्कुलर इकोनॉमी (वेस्ट को रीसाइकिल कर उसका इस्तेमाल करना) के समर्थन में मुखरता से अपना पक्ष रखते आए हैं। अपना बिजनेस देखने के साथ वहां के स्थानीय चैरिटी ट्रस्ट के डायरेक्टर (ट्रस्टी) भी हैं। ऐसे में 2018 में जब वे भारत आए, तो उन्होंने यहां संस्थानों को खंगालना शुरू किया, जो इस तरह के विकासोन्मुखी कार्य में लगे हुए हैं और उन्हें गूंज की जानकारी मिली और नींव पड़ी ट्रांस इंडिया चैलेंज की।

इस यात्रा (चैलेंज) का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण भारत के विकास के लिए धन इकट्ठा करना था, जिसे गूंज संस्था को दिया गया। यात्रा के अलावा वीडियो प्रोग्रामिंग, फिल्म और टीवी प्रोग्राम्स की बिक्री आदि से भी फंड इकट्ठा किए जाएंगे। संस्था को चुनने के सवाल पर वे बताते हैं, इसका कारण गूंज द्वारा ग्रामीणों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए किया जाने वाला इनोवेटिव काम है, जो हमारे दिल को छू गया। मैं काफी प्रभावित हूं इनके कार्यों से और मेरी कोशिश रहेगी की दुनिया के दूसरे देशों में भी इनका उदाहरण पेश कर सकूं। समाजसेवा के अलावा ऐलेन को भारत की आध्यात्मिकता भी खींचती व प्रेरित करती है। वाराणसी हो या ऋषिकेश, वहां गंगा किनारे बैठना अच्छा लगता है। साथ ही यहां का विविधता भरा सामाजिक ताना-बाना भी उन्हें एक अलग एहसास कराता है। इसलिए वे बार-बार आना चाहते हैं।

लोगों की मुस्कुराहट ने जीता दिल: वैसे तो ऐलेन पूरी तैयारी के साथ आए थे, बावजूद इसके गांव के धूल भरे रास्तों और खुली कार में गर्मी को झेलना आसान नहीं था। मॉरगन पश्चिमी देशों में चलने वाली कार है, जिसका ऑक्टेन लेवल कम होता है। लिहाजा, क्वालिटी ईंधन की समस्या भी रही। बताते हैं, जब हम बंगाल की खाड़ी के निकट पहुंचे, तो गाड़ी का ब्रेक डाउन हो गया। उसे ठीक करने के लिए 600 किलोमीटर दूर, कोलकाता भेजना पड़ा। इन सब के बावजूद, जो बात मेरे दिल को छू गई, वह थी लोगों की निस्वार्थ सेवा भाव। वे बिना पैसे लिए कार ठीक करने को तैयार थे। ऐलेन हावड़ा की एक अन्य घटना को याद करते हुए बताते हैं कि कैसे वे कार के साथ एक साप्ताहिक बाजार में प्रवेश कर गए, जहां उन्हें सड़क ही दिखाई नहीं दे रही थी। इतनी भीड़ थी कि क्या कहें। हमारे काफिले में चल रहे सहयोगियों औऱ गूंज के साथियों को मदद के लिए आगे आना पड़ा। फिर भी अद्भुत रही यह पूरी यात्रा। वैसे कहना गलत नहीं होगा कि इन दोनों के लिए ये पूरी यात्रा किसी चुनौती से कम नहीं रही। फिर भी चेहरे की मुस्कुराहट गुम नहीं होने दी।

पैटे बताती हैं कि कैसे 34 दिनों में उन्होंने मुंबई, पुणे, हैदराबाद, विशाखापत्तनम, पुरी, कोलकाता, पटना, लखनऊ, आगरा, दिल्ली, जयपुर, उदयपुर, अहमदाबाद जैसे शहरों, गांवों का दौरा किया। स्थानीय लोगों की संस्कृति, व्यवसाय आदि के बारे में जाना। ग्रामीणों ने भी उनका दिल खोलकर स्वागत किया। किसी ने फूलों का हार पहनाया, तो किसी ने हैट भेंट की। एक खास बात और। ब्रिटेन में ट्रांसपोर्ट पॉलिसी के विशेषज्ञ के तौर पर जाने जाने वाले ऐलेन ने अब से पहले कभी भारत की सड़कों पर ड्राइव नहीं किया था और वह भी मॉरगन में। लेकिन यहां के ट्रैफिक में गाड़ी चलाना काफी रोमांचक रहा। पैट ने झट बोला, ऐलेन ने बहुत अच्छी ड्राइव की। मैं कई बार उनकी साथ वाली सीट पर ही होती थी, इसलिए कह सकती हूं...(हंसते हुए)। इतना ही नहीं, रास्ते में जो लोग मिलते, वह मुस्कुराकर या हाथ हिलाकर अभिवादन करते। कई बार हमें घेर भी लेते।

मॉरगन का आकर्षण: 1909 में ब्रिटेन के मैलवर्न निवासी हेनरी मॉर्गन नामक इंजीनियर ने मॉरगन को डिजाइन किया था, जो आगे चलकर दुनिया भर के क्लासिक कारों में शुमार हो गया। इसे प्यार से मौगीज भी कहते हैं। इस तीन पहिये कार की लंबाई 3225 मिमी, चौड़ाई 1720 मिली एवं ऊंचाई 1000 मिमी है। कार का वजन 525 किलो है और इसके फ्यूल टैंक में 42 लीटर ईंधन आ सकता है। इस कार में सामान रखने की कोई जगह नहीं होती। इसकी स्पीड 115 माइल्स प्रति घंटा है। ऐलेन के पिता की याद में इसे खास दो रंगों में रंगा गया है। ऐलेन के पिता ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध के बीच पहली बार मॉरगन थ्री व्हीलर ड्राइव किया था।

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