Surgical Strike 2016: जब भारतीय सेना के स्पेशल कमांडो ने POK में घुसकर आतंकी कैंपों को किया था तबाह

भारतीय सेना के स्पेशल कमांडो की फाइल फोटो।
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 05:29 PM (IST) Author: Arun Kumar Singh

 नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्‍क।  Surgical Strike 2016: भारत ने उरी आतंकी हमले के बाद 29 सितंबर, 2016 को पाकिस्तान पर एक सर्जिकल स्ट्राइक की थी। यह कार्रवाई ठीक वैसे ही थी, जिस प्रकार अमेरिका के सील कमांडो ने कुख्‍यात आतंकी संगठन लश्‍करे तैयबा के मुखिया ओसामा बिन लादेन को पाकिस्‍तान के ऐब्‍टाबाद में घुसकर रात के अंधेरे में मार गिराया था। आज देश सर्जिकल स्ट्राइक की चौथी वर्षगांठ मना रहा है।

रविवार को 'मन की बात' के दौरान पीएम मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को हमलों के बारे में याद दिलाया था। पीएम मोदी ने कहा कि ''आज से चार साल पहले इस समय के दौरान, दुनिया ने सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान हमारे सैनिकों के साहस, बहादुरी और पराक्रम को देखा। हमारे बहादुर सैनिकों का बस एक ही मिशन और लक्ष्य था - किसी भी कीमत पर 'भारत माता की जय' और सम्मान की रक्षा करना। उन्हें अपने जीवन की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी। वे कर्तव्य की रेखा पर आगे बढ़ते रहे और हम सभी साक्षी बने कि वे कैसे विजयी होकर लौटे। उन्होंने भारत को गौरवान्वित किया था।'' 

24 सितंबर को सेना ने शुरू कर दी थी तैयारी 

18 सितंबर 2016 को उरी में सेना मुख्यालय पर आतंकी हमले में 18 जवान शहीद होने के बाद देश में रोष व्‍याप्‍त था। उरी हमले के तुरंत बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने कहा था कि सरकार जनता की भावना को समझती है और अब सीमापार आतंकी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, हालांकि समय सीमा को लेकर सरकार ने जानकारी नहीं दी थी। आतंकियों को अंदेशा भी नहीं रहा होगा कि उनके खिलाफ भारतीय फौज की तरफ से कार्रवाई की जाएगी। हमलों के लिए सेना की तैयारी 24 सितंबर को शुरू हो गई थी। विशेष बलों के दस्तों को नाइट-विजन डिवाइस, AK-47 असॉल्ट राइफल और Tavor 21, रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड, शोल्डर-फाइबल मिसाइल, हेकलर और कोच पिस्तौल, उच्च विस्फोटक ग्रेनेड और प्लास्टिक विस्फोटक से लैस किया गया था। सभी टीम में सेना के 30 स्पेशल कमांडो शामिल थे। 

क्या हुआ था 28 सितंबर की रात 

भारतीय सेना के कमांडो ने 28 सितंबर की रात को हेलीकॉप्टर से गुलाम कश्मीर (POK) में दाखिल होकर आतंकी कैंपों में सर्जिकल स्ट्राइक की। यह कार्रवाई गुलाम कश्मीर (POK के चार क्षेत्रों भिंबर सेक्टर, तत्तापानी सेक्टर, लिपी सेक्टर व कैल सेक्टर में एक साथ हुई। पांच घंटे चली इस कार्रवाई में इन सेक्टरों में चल रहे छह आतंकी शिविर तबाह करने के साथ करीब 45 आतंकियों को मार गिराया गया। मिशन को अंजाम देकर सभी कमांडों सुरक्षित भारतीय क्षेत्र में लौट आए। अभियान में शामिल कमांडों की हेलमेट पर लगे विशेष कैमरों व ड्रोन की मदद से पूरे ऑपरेशन को कैद भी किया गया। 

पीओके में हमले में कार्टोसेट ने निभाई खास भूमिका

स्पेशल कमांडो की कार्रवाई में धरती से हजारों किमी दूर कार्टोसेट अहम भूमिका निभा रहा था। उस दौरान कार्टोसेट से सेना को पीओके में आतंकियों के ठिकानों के बारे में सटीक जानकारी मिल रही थी और आतंकियों के घर में घुसकर उनका सफाया करने में मदद मिली थी। सुरक्षा कारणों से जम्मू और कश्मीर और पंजाब में सीमा के करीब रहने वाले नागरिकों को भारतीय सैनिकों के जाने से पहले 27 सितंबर को रात 10 बजे वहां से हटाना शुरू कर दिया गया था।

सेना द्वारा पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक में पहली बार कार्टोसेट सैटेलाइट द्वारा ली गयी तस्वीरों का प्रयोग किया गया। इसरो ने कार्टोसेट के जरिए एलओसी (LOC) के पार हुए सर्जिकल स्ट्राइक के लिए सैन्य बलों को बेहतर गुणवत्‍ता की तस्वीरें प्रदान की थीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि उस दौरान भारत अपनी रक्षा के लिए जमीन के साथ-साथ 'आसमान' से भी नजर रख रहा है। सूत्रों का कहना है कार्टोसेट सैन्य बलों को एरिया ऑप इंट्रेस्ट (AOI) आधारित तस्वीरें भी प्रदान कर रहा है। 

ज्ञात हो कि पहला कार्टोसेट उपग्रह कार्टोसैट-1 जो श्रीहरिकोटा में नवनिर्मित लॉन्च पैड से 5 मई 2005 पर पीएसएलवी-सी6 को लांच किया गया था। इसरो ने इसी साल जून में पीएसएलवी सी34 के जरिए एक साथ जिन 20 उपग्रहों को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित कर नया इतिहास रचा था, उनमें कार्टोसेट 2 सीरीज की सैटेलाइट को भी अंतरिक्ष कक्षा में स्थापित किया गया था, जिससे ये तस्वीरें मिली थीं।

क्या है इस सैटेलाइट की खूबियां

विशेषज्ञों के अनुसार, कार्टोसैट की मदद से आसमान से जमीन की बेहतरीन क्वालिटी की तस्वीरें ली जा सकती है। यदि भारत के प्रधानमंत्री चाहें तो अपने दफ़्तर में बैठे-बैठे दुनिया के किसी भी कोने की तस्वीरें देख सकते हैं। इस सैटेलाइट के माध्यम से सैन्य और असैन्य हवाईअड्डे पर कितने हवाई जहाज खड़े हैं, इसका भी आसानी से पता लगाया जा सकता है। आने वाले समय में यह आगे भी सीमा सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

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