कोरोना मामले पर SC में 27 अप्रैल को होगी सुनवाई, हरीश साल्वे ने खुद को किया मामले से अलग

आक्सीजन व जरूरी दवाओं की आपूर्ति पर जवाब देने के लिए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से मांगा समय, सुनवाई टली

हरीश साल्वे ने कहा कि यह मामला बहुत संवेदनशील है वह नहीं चाहते कि मामला इस पृष्ठभूमि में तय हो कि मैं प्रधान न्यायाधीश को स्कूल और कालेज के दिनों से जानता हूं और मेरे न्यायमित्र नियुक्त होने से हितों का टकराव हुआ है।

Neel RajputFri, 23 Apr 2021 09:27 PM (IST)

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कोरोना मरीजों को आक्सीजन और जरूरी दवाओं की आपूर्ति के मामले में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय योजना पेश करने और कोर्ट द्वारा गुरुवार को पूछे गए सवालों का जवाब दाखिल करने के लिए समय मांग लिया है। अब इस मामले में मंगलवार को सुनवाई होगी। अदालत ने गुरुवार को वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया था। लेकिन कुछ वरिष्ठ वकीलों के आक्षेप लगाने से आहत साल्वे ने शुक्रवार को कोर्ट से उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त करने का आग्रह किया जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हरीश साल्वे ने कहा कि यह मामला बहुत संवेदनशील है, वह नहीं चाहते कि मामला इस पृष्ठभूमि में तय हो कि मैं प्रधान न्यायाधीश को स्कूल और कालेज के दिनों से जानता हूं और मेरे न्यायमित्र नियुक्त होने से हितों का टकराव हुआ है। साल्वे की दलीलों पर जस्टिस बोबडे ने कहा कि उन्हें न्यायमित्र नियुक्त करने का फैसला पूरी पीठ का एकमत से लिया गया फैसला था। केंद्र सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने भी साल्वे को न्यायमित्र नियुक्त करने पर कुछ लोगों की ओर से अंगुली उठाए जाने को गलत बताया और साल्वे से नहीं हटने का आग्रह किया। लेकिन कोर्ट ने साल्वे का अनुरोध स्वीकार करते हुए उन्हें जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया। पीठ ने यह भी कहा कि अगली बार किसी को न्यायमित्र नियुक्त करते वक्त देखना होगा कि वह हमें न जानता हो।

इंटरनेट मीडिया पर बेहद अशोभनीय बातों का भी लिया जाए संज्ञान

तुषार मेहता ने कहा कि आज हम एक दूसरे की छवि बिगाड़ने की स्थिति में नहीं हैं। मैंने कुछ इंटरनेट मीडिया पर देखा है जिसमें वास्तव में बहुत अशोभनीय कहा गया। इस पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

आदेश पढ़े बगैर वरिष्ठ वकीलों के आक्षेप लगाने से कोर्ट हुआ नाराज

जस्टिस बोबडे ने साल्वे से कहा कि वह उनकी भावनाओं को समझ रहे हैं। उन्हें भी कुछ वरिष्ठ वकीलों की राय पढ़कर कष्ट हुआ था, लेकिन सभी की अपनी राय है। तभी सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि एसोसिएशन ने एक याचिका दाखिल की है, लेकिन अब उन्होंने कोर्ट का आदेश देखा है उसमें हाई कोर्ट के केस ट्रांसफर की बात नहीं है। इस पर पीठ के न्यायाधीश एलएन राव ने कहा आपने आदेश देखे बगैर याचिका दाखिल कर दी। आदेश पढ़े बिना ही उस चीज की आलोचना की गई जो आदेश में थी ही नहीं। ऐसे संस्था नष्ट हो जाएगी।

जस्टिस राव ने सुनवाई में मौजूद वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे से कहा कि आपने कोर्ट का आदेश पढ़े बगैर हम पर आक्षेप लगा दिए। दवे ने कहा हमने आक्षेप नहीं लगाए। हम आपको बहुत प्यार करते हैं, लेकिन पूरे देश की यही अवधारणा थी कि सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के मामले अपने यहां स्थानांतरित करेगा। जस्टिस रविंद्र भट ने कहा कि हमने ऐसा कुछ नहीं कहा और न ही हाई कोर्ट को सुनवाई से रोका। हमने तो केंद्र से कहा था कि हाई कोर्ट जाओ और वहां रिपोर्ट दो। आप किस तरह की अवधारणा की बात कर रहे हैं। तभी जस्टिस राव ने कहा, आपको संस्था की रक्षा करनी चाहिए।

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