दुष्कर्म के आरोपी वकील को हाईकोर्ट के जमानत देने पर सुप्रीम कोर्ट अचंभित, इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश किया रद

सुप्रीम कोर्ट, जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद किया गया (फाइल फोटो)।
Publish Date:Thu, 24 Sep 2020 10:12 PM (IST) Author: Arun Kumar Singh

 नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। सुप्रीम कोर्ट ने जूनियर वकील से दुष्कर्म के आरोपी उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता को हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत दिये जाने पर आश्चर्य जताते हुए हाईकोर्ट का आदेश रद कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब वह इसी मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश पर पहले रोक लगा चुका है तो फिर एकलपीठ आरोपी को कैसे अग्रिम जमानत दे सकती है। हाईकोर्ट की एकलपीठ को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का ध्यान रखना चाहिए था। न्यायमूर्ति आरएफ नारिमन, नवीन सिन्हा और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश पर आश्चर्य और नाराजगी जताते हुए आरोपी वकील शैलेन्द्र सिंह चौहान को अग्रिम जमानत देने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का 3 सितंबर का आदेश रद कर दिया। 

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी वकील को जमानत देने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद किया

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पीड़िता की सहेली की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किये। याचिका में आरोपी वकील को अग्रिम जमानत देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकलपीठ के 3 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई थी। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि उसने इसी मामले में विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ के 31 जुलाई के आदेश पर पांच अगस्त को रोक लगा दी थी। इसके बाद आरोपी ने निचली अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की जो कि 19 अगस्त को खारिज हो गई। 

फिर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 3 सितंबर को आरोपी को अगली तारीख तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए जो कारण बताया, उसमें कहा है कि आरोपी प्रतिष्ठित वकील है जो कि 29 वर्ष से वकालत कर रहा है और उसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस तरह हाईकोर्ट ने किया है, उस पर वे अचंभित हैं। हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के मुताबिक चलना चाहिए था। 

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को जमानत देने का हाईकोर्ट का आदेश रद करते हुए कहा कि यह एक गंभीर मामला है इसकी ठीक से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। इस मामले में 24 जुलाई को पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई थी। उस वक्त आरोपी उत्तर प्रदेश सरकार का हाईकोर्ट में अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता था। आरोपी ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर प्राथमिकी रद करने की मांग की। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आरोपी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। 

गिरफ्तारी पर रोक के खिलाफ पीड़िता की सहेली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गत 5 अगस्त को गिरफ्तारी पर रोक लगाने का हाईकोर्ट का आदेश स्थगित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 7 अगस्त को प्रदेश सरकार ने आरोपी को सरकारी वकील से हटा दिया था। इसके बाद आरोपी वकील ने निचली अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की लेकिन निचली अदालत ने अर्जी खारिज कर दी। जिसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की और हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में 3 सितंबर को आरोपी को अंतरिम जमानत दे दी थी जिसके खिलाफ पीड़िता की सहेली ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दाखिल की थी जिस पर यह आदेश आया।

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