वकीलों की हड़ताल की समस्या से सुप्रीम कोर्ट नाराज, इससे निपटने के लिए देगा विस्तृत आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ) के कड़े रुख के बावजूद अदालतों में हड़ताल की समस्या मौजूद है। शीर्ष अदालत ने साथ ही कहा कि वह इस समस्या से निपटने के लिए एक विस्तृत आदेश पारित करेगी।

Arun Kumar SinghMon, 20 Sep 2021 10:41 PM (IST)
वकीलों की हड़ताल की समस्या से सुप्रीम कोर्ट नाराज

 नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ) के कड़े रुख के बावजूद अदालतों में हड़ताल की समस्या मौजूद है। शीर्ष अदालत ने साथ ही कहा कि वह इस समस्या से निपटने के लिए एक विस्तृत आदेश पारित करेगी क्योंकि हड़ताल और अदालती कार्य ठप होने से दूर से आने वाले वादियों को बहुत परेशान होना पड़ता है।

बीसीआइ की सख्ती के बावजूद हड़तालें होने से सुप्रीम कोर्ट खिन्न

शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि वादियों को समय पर न्याय नहीं मिलता है तो यह कानून के शासन और न्याय वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करेगा। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस ए एस बोपन्ना की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि चार अक्टूबर तय करते हुए कहा कि अदालतों में कार्य बहिष्कार को प्रोत्साहित नहीं करने को लेकर बीसीआइ द्वारा दृढ़ रुख अपनाए जाने के बावजूद, हड़तालें हो रही हैं और अदालत में कार्य बहिष्कार किया जा रहा है।

शीर्ष अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह वकीलों की समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर शिकायत निवारण समितियों के गठन पर विचार कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी बीसीआइ के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा की दलीलों पर गौर करने के बाद आई। उन्होंने कहा कि सभी बार काउंसिल के पदाधिकारियों की बैठक हुई और हड़ताल के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया।

उन्होंने कहा कि स्टेट बार काउंसिल के सभी प्रतिनिधियों द्वारा एकमत से यह विचार सामने आया कि अनावश्यक और अनुचित हड़ताल और कार्य बहिष्कार ठीक नहीं है। बार निकायों को वकीलों को ऐसा करने से हतोत्साहित करना चाहिए। बीसीआइ ने पहले शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि उसने स्टेट बार काउंसिल की एक बैठक बुलाई है और वकीलों द्वारा हड़ताल को कम करने के लिए नियम बनाने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही उन वकीलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का प्रस्ताव रखा है जो काम से दूर रहने के लिए इंटरनेट मीडिया पर दूसरों को उकसाते हैं।

शीर्ष अदालत ने 26 जुलाई को कहा था कि उसने पिछले साल 28 फरवरी को अपना फैसला सुनाया था और बीसीआइ और स्टेट बार काउंसिल को वकीलों की हड़ताल की समस्या से निपटने के लिए ठोस सुझाव मांगा था।

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