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जल संरक्षण का ऐसा जुनून कि पत्नी छोड़ गई पर पौधे लगाना नहीं छोड़ा

राजस्थान के हांडी में पालेश्वर महादेव के पास बिल्वपत्र का पौधा रोपते जयराम मीणा ’ सौजन्य

श्योपुर के सामान्य वन मंडल के जिला वन अधिकारी सुधांशु यादव ने बताया कि वृक्षमित्र जयराम मीणा का पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय योगदान है। वृक्षमित्र जयराम ने 25 साल में लगाए करीब 11 लाख पौधे राजस्थान से सटे इलाके में पानी की समस्या देख बनाया मिशन।

Sanjay PokhriyalWed, 12 May 2021 12:55 PM (IST)

मनोज श्रीवास्तव, ग्वालियर। जल संरक्षण के लिए तालाब बनाने या भूजल स्तर बढ़ाने के प्रयास के अलावा भी बहुत कुछ किया जा सकता है, ऐसा ही कुछ कर दिखाया है मध्य प्रदेश में श्योपुर जिले के जयराम मीणा ने। जयराम ने राजस्थान से सटे अपने गांव में सूखा देखा तो जल संरक्षण के लिए पर्यावरण को हरा-भरा करने का बीड़ा उठा लिया। पौधे लगाने की ऐसी लगन लगी कि पत्नी भी छोड़कर मायके चली गई, मगर उन्होंने पौधे लगाना नहीं छोड़ा। मध्य प्रदेश सरकार ने उनके इस बेहतरीन काम के लिए 2006 में जब उन्हें अमृता देवी विश्नोई सम्मान से नवाजा तो पत्नी और स्वजन को महत्व समझ आया। पत्नी न सिर्फ लौट आईं, बल्कि उनके काम में सहयोग भी करने लगीं।

जयराम का दावा है कि वह 25 साल में 11 लाख से अधिक पौधे लगा चुके हैं। हर रोज साइकिल पर पानी की केन बांधकर निकलते हैं और सड़क किनारे लगे पौधों को पानी देते हैं। राजस्थान से सटे श्योपुर के बासौंद गांव के रहने वाले जयराम मीणा को लोग वृक्षमित्र के नाम से जानते हैं। जयराम बताते हैं कि गांव के कई इलाकों में पानी का संकट रहता था। जब वह 12 साल के थे तब दादाजी मथुरालाल मीणा गांव के आसपास पौधे लगाते थे। उन्होंने भी घर के पास पांच पौधे लगाए। इसके बाद जल संरक्षण के लिए हरियाली करने की धुन ऐसी सवार हुई कि गांव के आसपास के अलावा बड़ौदा कस्बे से ललितपुरा तक सड़क के दोनों किनारों पर दर्जनों पौधे लगाए। फिर 11 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया, जो 2016 में पूरा हुआ। इसके बाद गिनती करना ही बंद कर दिया है। जयराम कहते हैं कि पौधे लगाने के जुनून से स्वजन नाराज रहते थे, लेकिन अब सभी साथ देते हैं।

उत्तराखंड और महाराष्ट्र तक पहुंचा सफर: जयराम बताते हैं कि जब वह गुना में बहन जानकी देवी के यहां गए तो रेलवे स्टेशन और पटरी के किनारे 130 पौधे लगाए। महाराष्ट्र के त्रिम्बकेश्वर में बिल्वपत्र के 430 पौधे और उत्तराखंड में हरिद्वार के कनखल में गंगा नदी के किनारे 1500 से अधिक पौधे लगाए हैं। इन दिनों वह राजस्थान में कोटा जिले के हांडी में पालेश्वर महादेव मंदिर के यहां करीब 25 बीघा बीहड़ को समतल कर पौधे लगा रहे हैं। पांच बीघा जमीन पर्यावरण संरक्षण के नाम: जयराम के परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा और तीन बेटियां हैं। 15 बीघा जमीन है। वह पांच बीघा में बोई फसल से मिलने वाली राशि पौधे, ट्री-गार्ड, खाद-बीज और पानी की व्यवस्था में खर्च करते हैं। यही नहीं, वह घर पर ही नर्सरी में पौधे तैयार करते हैं।

मुख्य वन संरक्षक ने भेंट की थी बाइक:जयराम बताते हैं कि पुरस्कार मिलने के बाद भोपाल से मुख्य वनसंरक्षक आरपी सिंह उनके गांव बासौंद आए थे। उन्होंने गांव में उनका काम देखा तो बेहद खुश हुए। जब उन्हें पता चला कि पौधे लगाने साइकिल या पैदल जाते हैं तो उन्हें बाइक भेंट की। दो सामाजिक संस्थाओं ने साइकिलें भेंट की। जयराम महज पांचवीं कक्षा पास हैं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के संबंध में अच्छी जानकारी की वजह से वन विभाग व अन्य संस्थाएं व्याख्यान देने के लिए उन्हें बुलाती हैं।

फलदार और छायादार पौधों पर अधिक जोर: जयराम के मुताबिक पिछले 25 सालों में उन्होंने फलदार आम, जामुन, अमरूद, पपीता के अलावा पीपल, नीम, शीशम, बरगद, सागौन के पौधे लगाए हैं। राजस्थान के हांडीपाली, महाराष्ट्र के त्रिम्बकेश्वर, उत्तराखंड के हरिद्वार में बिल्वपत्र के पौधे रोपे हैं। मीणा के मुताबिक हांडीपाली में छायादार पौधों के अलावा जड़ी-बूटी के पौधे भी रोप रहे हैं।

जल सहेजने में ऐसे सहायक होते हैं पेड़: पर्यावरणविद कैलाश पाराशर के मुताबिक जहां पर पौधे लगाए जाते हैं, वहां की मिट्टी नम होती है। पौधों को सींचने पर उनकी जरूरत के बाद जो पानी बचता है, वह फिर भूमि में चला जाता है। दूसरा, बारिश में पेड़ों की जड़ें पानी को रोकती हैं। उसे जमीन में संरक्षित करती हंै। इससे भूजल में वृद्धि होती है। यह भी स्थापित तथ्य है कि पेड़ बादलों को रोकते हैं और बादल वहां पर वर्षा करवाते हैं। इससे पानी के जमीन में जाने का क्रम बना रहता है।

जल है तो कल है: जल संरक्षण दैनिक जागरण के सात सरोकारों में शुमार है। इसी क्रम में हम जल प्रहरियों के प्रेरक कार्यों को पाठकों तक पहुंचा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि इन प्रहरियों से प्रेरणा ले ज्यादा से ज्यादा लोग जल संरक्षण के काम में सहभागी बने।

श्योपुर के सामान्य वन मंडल के जिला वन अधिकारी सुधांशु यादव ने बताया कि वृक्षमित्र जयराम मीणा का पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय योगदान है। उन्होंने जिले में काफी पौधे लगाए हैं। अगर इसी तरह अन्य लोग भी प्रयास करें तो निश्चित ही जिले की तस्वीर बदल जाएगी।

 

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