केंद्र सरकार ने रूस की कोविड-19 वैक्सीन Sputnik V को दी मंजूरी, भारत को मिलेगा तीसरा टीका

भारत में रूसी कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक V के इस्तेमाल पर विचार

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को देखते हुए भारत में तीसरे कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक V को मंजूूरी दे दी गई है। इसके इमरजेंसी इस्तेमाल को अनुमति देने पर आज एक्सपर्ट कमिटी की बैठक की गई जिसमें इस वैक्सीन के लिए हरी झंडी दिखा दी गई।

Monika MinalMon, 12 Apr 2021 10:49 AM (IST)

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश के हाथ और मजबूत हुए हैं। कोविशील्ड और कोवैक्सीन के बाद अब रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को भी हरी झंडी मिल गई है। सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (एसईसी) ने तीसरे फेज के ट्रायल में स्पुतनिक-वी के पूरी तरह सुरक्षित और संक्रमण रोकने में कारगर पाए जाने के बाद इसे मंजूरी दी है। अब केवल दवा नियामक ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआइ) की हामी का इंतजार है। स्पुतनिक-वी को मंजूरी मिलने से देश में कोरोना वैक्सीन की कमी को काफी हद तक दूर करने में मदद मिलेगी।

रूस के गेमालिया इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित स्पुतनिक-वी का भारत में 1,600 लोगों पर तीसरे फेज का ट्रायल किया गया। इसके पहले रूस में 19,866 लोगों पर इसका तीसरे फेज का ट्रायल हुआ है। भारत में भी ट्रायल के नतीजे रूस जैसे ही मिले हैं। वैक्सीन को कोरोना संक्रमण को रोकने में 91.6 फीसद तक कारगर पाया गया। इस नतीजे के साथ इसे दुनिया में कोरोना के खिलाफ सबसे प्रभावी वैक्सीन माना जा रहा है। अभी तक दुनिया के कुल 59 देश इस वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत दे चुके हैं। रूस में पिछले साल अगस्त से ही इसका प्रयोग किया जा रहा है।

द रशियन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट फंड (आरडीईएफ) ने भारत में इस वैक्सीन के उत्पादन और उपयोग के लिए पिछले साल सितंबर में डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज से समझौता किया था। इसके अलावा आरडीईएफ ने यहां वीरशॉ बायोटेक, स्टेलिस बायोफार्मा और पानासिया बायोटेक के साथ भी वैक्सीन उत्पादन के लिए समझौता किया है। वीरशॉ बायोटेक 20 करोड़ डोज, स्टेलिस बायोफार्मा 20 करोड़ और पानासिया बायोटेक 25 करोड़ डोज सालाना का उत्पादन करेंगे। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इजाजत मिलने के कितने दिन बाद स्पुतनिक-वी की सप्लाई शुरू हो जाएगी।

दूर होगी वैक्सीन की कमी

स्पुतनिक-वी के इमरजेंसी इस्तेमाल से देश में वैक्सीन की कमी दूर करने में काफी हद तक मदद मिलेगी। फिलहाल देश में भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट से हर दिन 23 लाख डोज की आपूर्ति हो रही है, जबकि यहां हर दिन औसतन 35 लाख लोगों को टीका लग रहा है। इस हिसाब से हर दिन 12 लाख डोज की कमी है, जिसे पहले से तैयार स्टॉक से पूरा किया जा रहा है। देश के कुछ हिस्सों से वैक्सीन की कमी के कारण टीकाकरण रुकने की खबरें भी आ रही हैं। फिलहाल भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट उत्पादन बढ़ाने के प्रयास में जुटे हैं। जून-जुलाई तक उत्पादन दोगुना से ज्यादा हो जाने की उम्मीद है।

राह में चार और वैक्सीन

कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पुतनिक-वी के अलावा अक्टूबर तक भारत में चार और वैक्सीन को इमरजेंसी इजाजत मिलने की उम्मीद है। इनमें जॉनसन एंड जॉनसन (बायोलॉजिकल ई), नोवावैक्सीन (सीरम इंस्टीट्यूट) और जायडस कैडिला की वैक्सीन शामिल हैं। इनके अलावा भारत बायोटेक ने नाक से दी जाने वाली वैक्सीन भी विकसित की है, जिसका ट्रायल चल रहा है।

 

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से जुड़ी प्रमुख जानकारियों और आंकड़ों के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.