ओबीसी आरक्षण के उप-वर्गीकरण में लगेगा वक्त, राज्यों के साथ फार्मूले पर नहीं हो सकी अंतिम चर्चा

आयोग की राज्यों के साथ प्रस्तावित चर्चा इसलिए अहम है क्योंकि आयोग पिछले वर्षो में ओबीसी आरक्षण का लाभ उच्च शिक्षा और नौकरियों में उसकी किन-किन जातियों को मिला और किसे नहीं मिला है इसका पूरा ब्योरा जुटा चुका है।

Dhyanendra Singh ChauhanMon, 14 Jun 2021 10:38 PM (IST)
जस्टिस रोहिणी आयोग ने उप-वर्गीकरण कर चुके 11 राज्यों से बातचीत की बनाई थी योजना

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को मिलने वाले आरक्षण के उप-वर्गीकरण को लेकर गठित जस्टिस रोहिणी आयोग को फिलहाल अपना काम पूरा करने के लिए और वक्त चाहिए। आयोग ने हालांकि आधिकारिक रूप से अभी इसकी कोई मांग नहीं की है, लेकिन इस सिलसिले में फार्मूले को अंतिम रूप देने के लिए ओबीसी आरक्षण का उप-वर्गीकरण कर चुके राज्यों के साथ उसकी चर्चा अभी अधूरी ही है। ऐसे में कोरोना संक्रमण की स्थिति के सामान्य होते देख आयोग फिर से उनके साथ चर्चा की तैयारी में है।

आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक ओबीसी आरक्षण का अपने यहां उप-वर्गीकरण कर चुके राज्यों के साथ यह चर्चा जुलाई में शुरू हो सकती है। फिलहाल इस चर्चा में करीब 11 राज्य शामिल हैं। उनमें आंध्र प्रदेश, बंगाल, झारखंड, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी शामिल हैं। ऐसे में इस काम में दो से तीन महीने का समय लग सकता है। वहीं आयोग का कार्यकाल भी 31 जुलाई को खत्म हो रहा है। ऐसे में आयोग यदि इस योजना को अंजाम देता है और सरकार उन्हें इसकी अनुमति देती है तो आयोग का कार्यकाल दो से तीन महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है। वैसे भी अक्टूबर 2017 में आयोग के गठन के बाद से अब तक उसका कार्यकाल करीब दर्जनभर बार बढ़ाया जा चुका है।

आयोग की राज्यों के साथ प्रस्तावित चर्चा इसलिए अहम है, क्योंकि आयोग पिछले वर्षो में ओबीसी आरक्षण का लाभ उच्च शिक्षा और नौकरियों में उसकी किन-किन जातियों को मिला और किसे नहीं मिला है, इसका पूरा ब्योरा जुटा चुका है। अब वह इन्हीं आंकड़ों के आधार पर राज्यों से उप-वर्गीकरण पर अंतिम चर्चा करना चाहता है। इन राज्यों में ओबीसी आरक्षण का यह उप-वर्गीकरण दो से पांच श्रेणियों में हुआ है। आयोग की मानें तो ओबीसी की करीब एक हजार जातियां ऐसी हैं, जिन्हें अब तक आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिला है। ओबीसी का पूरा आरक्षण इनकी करीब छह सौ जातियों में ही बंट जाता है। इनमें करीब सौ जातियां ऐसी हंै, जो इसका आधे से ज्यादा लाभ ले जाती हैं। इनमें दर्जन भर जातियां इससे सबसे ज्यादा लाभान्वित हो रही हैं।

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