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भारत की मांग के सामने कम पड़ा वैक्सीन और कोरोना दवाइयों के लिए कच्चा माल, अमेरिका ने वादा करके चुप्पी साधी

सरकार विदेशी सरकारों के संपर्क में, जून तक हालात सुधरने के आसार।

भारत में कोरोना महामारी के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली तकरीबन अधिकांश वैक्सीन और जरूरी दवाइयों के कच्चे माल की कमी पैदा कर दी है। कुछ दिन पहले भारत को वैक्सीन के लिए कच्चा माल देने का वादा करके अमेरिका ने भी अब चुप्पी साध ली है।

Bhupendra SinghWed, 12 May 2021 08:21 PM (IST)

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने इस महामारी के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली तकरीबन अधिकांश वैक्सीन और जरूरी दवाइयों के कच्चे माल की कमी पैदा कर दी है। कुछ दिन पहले भारत को वैक्सीन के लिए कच्चा माल देने का वादा करके अमेरिका ने भी अब चुप्पी साध ली है। दूसरी तरफ भारत में रेमडेसिविर जैसी दवाइयों की मांग में कई गुना वृद्धि होने से इसे बनाने वाली कंपनी के लिए भी कच्चे माल की समस्या पैदा हो गई है।

भारत की स्थिति देख तमाम देश ऐसे हालात के लिए एकत्रित कर रहे चिकित्सा सामग्री

जिन देशों में कोरोना में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों का निर्माण होता है वहां की सरकारें भी भारत में कोरोना की भयावह स्थिति को देखते हुए अब ज्यादा सतर्क हो गई हैं। तमाम देश इस तरह के हालात के लिए चिकित्सा सामग्रियों को एकत्रित कर रहे हैं। वैसे तो भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी कंपनियों को कच्चे माल की आपूर्ति में मदद के लिए रात-दिन लगे हैं, लेकिन इसकी किल्लत फिलहाल दूर होती नजर नहीं आ रही।

भारत की मांग बढ़ी, रेमडेसिविर की भी किल्लत

सूत्रों का कहना है कि भारत की मांग अप्रत्याशित तौर पर बढ़ी है, जिससे समूचे फार्मा उद्योग के लिए आपूर्ति करना मुश्किल पड़ रहा है। रेमडेसिविर जैसी दवा का घरेलू उत्पादन एक महीने में 10 हजार से बढ़कर तकरीबन 3.50 लाख डोज रोजाना हो चुका है फिर भी घरेलू मांग पूरी नहीं हो पा रही है। इसकी निर्माता कंपनी गिलीड साइंसेस ने पहले कहा था कि वह 4.50 लाख डोज भारत को देगी। उसकी तरफ से अभी तक 1.75 लाख डोज आ पाई हैं।

रेमडेसिविर व टुस्लीजुमाब के कच्चे माल की किल्लत जून के मध्य तक रहेगी

भारत अभी गिलीड साइंसेस के मिस्त्र, यूएई, बांग्लादेश स्थित प्लांट से ज्यादा मात्रा में रेमडेसिविर खरीदने की बात कर रहा है, लेकिन कच्चे माल की कमी यहां भी है। सूत्रों के मुताबिक, रेमडेसिविर और टुस्लीजुमाब जैसी दवाइयां बहुत कम बनती हैं। इसलिए अचानक मांग बढ़ने के बावजूद उनका उत्पादन नहीं बढ़ाया जा सकता। जून के मध्य तक इन दवाइयों की निर्माता कंपनियों के पास कच्चे माल की आपूर्ति संभव दिख रही है।

भारत को कच्चे माल की आपूर्ति को लेकर अमेरिका फैसला नहीं कर पा रहा

उधर, भारत को कच्चे माल की आपूर्ति करने को लेकर अमेरिकी सरकार भी तेजी से फैसला नहीं कर पा रही है। भारत को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जिन चीजों की जरूरत है उसकी लिस्ट अमेरिका को सौंपी है। इसमें वैक्सीन के लिए जरूरी कच्चे माल से जुड़े सारे सामान हैं। 25 अप्रैल को बाइडन प्रशासन ने कहा था कि वह भारत को कच्चा माल देगा। इसके बाद दो करोड़ वैक्सीन (कोविशील्ड) के लिए कच्चा माल भेजा गया, लेकिन यह भारत की जरूरत को देखते हुए बहुत कम है। नई दिल्ली में अमेरिका के उपराजदूत डैन स्मिथ ने कहा, भारत की सूची पर विचार किया जा रहा है कि अमेरिका कैसे और कितनी जल्द मदद कर सकता है।

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