नगालैंड का मोन कांड : रिपोर्ट का दावा, जवानों ने मारने से पहले पहचान की पुष्टि का प्रयास नहीं किया

राज्य सरकार को रविवार को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार चार दिसंबर को शाम करीब चार बजे एक पिकअप ट्रक से आठ कोयला खनिक तिरु से अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में 21 पैरा स्पेशल फोर्स के जवानों ने उन्हें घेर लिया।

Dhyanendra Singh ChauhanTue, 07 Dec 2021 10:17 PM (IST)
प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से नगालैंड के डीजीपी और कमिश्नर का दावा

कोहिमा, प्रेट्र। नगालैंड के मोन जिले में शनिवार को उग्रवादियों के धोखे में नागरिकों को गोली मारने के मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) टी.जान लांगकुमेर और कमिश्नर रोविलातुओ मोर की संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि जवानों ने घटना को अंजाम देने से पहले इन नागरिकों की पहचान की पुष्टि करने का प्रयास नहीं किया।

राज्य के दोनों शीर्ष अधिकारियों ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से दावा किया कि सेना के जवानों ने घटना के बाद मारे गए नागरिकों के शव छुपाने की भी कोशिश की।

राज्य सरकार को रविवार को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार चार दिसंबर को शाम करीब चार बजे एक पिकअप ट्रक से आठ कोयला खनिक तिरु से अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में 21 पैरा स्पेशल फोर्स के जवानों ने उन्हें घेर लिया। बताया जा रहा है कि जवानों ने पहचान की पुष्टि किए बिना उग्रवादी समझ कर उन्हें गोली मार दी। इनमें से छह ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि दो बुरी तरह घायल हो गए।

जब गांव वाले मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि जवान शवों को तिरपाल में लपेट कर ट्रक में लाद रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार जवान शव बेस कैंप ले जाने की तैयारी में थे। यह देख ग्रामीणों और जवानों में संघर्ष शुरू हो गया। जवानों ने फिर फायरिंग की जिसमें सात और की जान चली गई। रिपोर्ट के अनुसार इस घटना में शनिवार को कुल 13 नागरिक मारे गए। ये सभी कोन्याक जाति के थे।

मेजर जनरल रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में होगी जांच

भारतीय सेना ने नागालैंड गोलीबारी की घटना में मेजर जनरल रैंक के एक अधिकारी की अध्यक्षता में कोर्ट आफ इंक्वायरी का आदेश दिया है। सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि मेजर जनरल रैंक का एक अधिकारी 21 पैरा स्पेशल फोर्सेज के आपरेशन की जांच के लिए कोर्ट आफ इंक्वायरी का नेतृत्व करेगा।

हार्नबिल फेस्टिवल रद, कैबिनेट ने अफस्पा हटाने की मांग की

इस बीच नगालैंड मंत्रिमंडल की बैठक हुई और केंद्र को पत्र लिखकर सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (अफस्पा) रद करने की मांग की गई। यह कानून अशांत राज्यों में सुरक्षा बलों को अतिरिक्त अधिकार देता है।

राज्य के मंत्रियों नीबा क्रोनू और तेमजेन इम्ना अलांग ने बताया कि मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के नेतृत्व में मंगलवार को कैबिनेट की आपात बैठक में इस घटना के विरोध में चल रहे हार्नबिल फेस्टिवल को रद कर दिया गया। कोहिमा के पास किसामा गांव में आयोजित 10 दिवसीय हार्नबिल फेस्टिवल 10 दिसंबर को समाप्त होने वाला था।

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