10 बिंदुओं में जानें 14 हजार फीट की ऊंचाई पर तैनात भीष्‍म की खासियत, छुड़ा सकता है दुश्‍मन के पसीने

पूर्वी लद्दाख में चीन से लगती एलएसी पर भारत ने टैंकों को तैनात किया है।
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 10:51 AM (IST) Author: Kamal Verma

नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। भारत ने चीन से लगती एलएसी पर अपने शक्तिशाली टी-90 (भीष्‍म) टैंक को लगा दिया है। इन्‍हें दुनिया के बेहतरीन टैंकों में शामिल किया जाता है। इसको भारत का Main Battle Tank भी कहा जाता है। इसकी वजह इनमें इस्‍तेमाल की गई तकनीक और इनका अचूक वार है। चीन एलएसी पर जिस तरह से अपनी आक्रामकता दिखा रहा है और अडि़यल रवैया अपनाए हुए है उसको देखते हुए भारत भी एलएसी पर अपनी तैयारियों को पुख्‍ता कर रहा है। 14 हजार फीट की ऊंचाई पर टैंकों का ये जमावड़ा किसी के भी माथे के पसीने छुड़ा सकता है। इन्‍हें चुमार और डेमचौक में तैनात किया गया है जो टैंकों के हिसाब से दुनिया में सबसे ऊंचाई का युद्ध क्षेत्र है। ये टैंक -40 डिग्री के तापमान में भी गोले बरसा सकते हैं। आने वाले दिनों में इन टैंकों की कठिन परीक्षा शुरू हो जाएगी। बेहद ठंड के दिनों में इनका रखरखाव भी एक बड़ी चुनौती होगी। कुछ बिंदुओं में जानें इनकी खासियत:-  

इसमें लगी एंटी एयरक्राफ्ट गन 2 किमी की रेंज में अचूक निशाना लगाकर हवाई हमले से इसकी रक्षा करती है। भारत ने वर्ष 2001 में इसके 300 से अधिक टैंक खरीदे गए थे जिसमें से 124 टैंक पूरी तरह से रूस में ही निर्मित थे। समझौते के तहत टेक्‍नॉलिजी ट्रांसफर की बदौलत इसके अन्‍य टैंकों को तमिलनाडु में ही तैयार किया जाना मुमकिन हो सका। आमतौर पर किसी टैंक में 4-5 लोग मिकर चलाते हैं, लेकिन इसमें केवल तीन लोग ही सवार होते हैं। इनमें कमांडर, ड्राइवर और गनर शामिल होता है। कमांडर ड्राइवर को टैंक से जुड़ी सभी चीजों का आदेश देता है। इसमें इसकी रफ्तार, गोले या मिसाइल दागने से जुड़ी जानकारी और अन्‍य आदेश शामिल है। इस टैंक में ऑटोमेटिक वैपंस लोडिंग की सुविधा है। यही वजह है कि इसमें बार-बार किसी भी जवान को वैपन लोड करने की जरूरत नहीं होती है। इसे अलग-अलग टाइप के बम और रॉकेट भी दागे जा सकते हैं। इसमें लगे जायरास्‍कोप सिस्‍टम (Gyroscope System) की बदौलत ये टैंक तेज गति से चलते हुए भी फायर कर सकता है। ये सिस्‍टम इसकी और टारगेट की डायरेक्‍शन के बारे में सटीक जानकारी मुहैया करवाता है।

इस टैंक की एक खासियत इसकी रफ्तार भी है। ये 65 किमी प्रति घंटे की स्‍पीड से दौड़ सकता है। इस टैंक को 180 डिग्री पर घुमाते हुए भी इसकी केनन और एंटी एयरक्राफ्ट गन को एक ही डायरेक्‍शन में स्थिर रखा जा सकता है। इसकी ये खासियत दुश्‍मन के ऊपर निगाह बनाए रखने में मदद करती है। 46 टन वजनी इस वजनी इस टैंक को तेज गति से दौड़ाने में सिर्फ इंजन ही नहीं बल्कि इसमें लगे केटापिलर ट्रैक्‍स भी पूरी मदद करते हैं और वजन को बराबर डिस्‍ट्रीब्‍यूट करते हैं। यही वजह है कि टैंक किसी भी तरह की सतह पर आसानी से दौड़ सकते हैं। इसमें लगा थर्मल विजन कैमरा किसी तरह के तापमान को पढ़कर वहां पर किसी मशीन या इंसान का पता लगा सकता है। इस कैमरे से कमांडर छह किमी की दूरी तक आसानी से देख सकता है। एक बार यदि गनर दुश्‍मन या टारगेट को लॉक कर देता है तो फिर वो इसकी मार से बचकर नहीं जा सकता है। एक मिनट में आठ गोले दागने में समर्थ यह टैंक जैविक व रासायनिक हथियारों से निपट सकता है। टी-90 टैंक में 125 एमएम की 2A46 मेन गन लगी है। इसके अलावा इसमें 1A45T फायर कंट्रोल सिस्‍टम लगा है और इसका इंजन दूसरे कई टैंकों के मुकाबले काफी बेहतर है। इसका आ‌र्म्ड प्रोटेक्शन दुनिया में बेहतरीन माना जाता है, जो मिसाइल हमला रोक सकता है। टी-90 टैंकों के प्रकार की बात करें तो इसमें T-90K, T-90A, T-90 AK, T-90 AM, T-90M, T90S, T90-SK, T90S भीष्‍म, T90-MS शामिल है। इन टैंक्‍स को दुनिया की कई सेनाएं इस्‍तेमाल करती हैं जिसमें भारत के अलावा अल्‍जीरिया, अर्मेनिया, अजरबेजान, इराक, रूस, सीरिया, तुर्कमेनिस्‍तान, युगांडा, वियतनाम शामिल हैं।

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