Republic Day 2021: पहली महिला फाइटर जेट पायलट व फ्रांस से आया राफेल जेट होंगे परेड का आकर्षण

परेड में फाइटर महिला पायलट व फाइटर जेट राफेल

72th Republic Day Parade 2021 कोरोना वायरस महामारी के तहत 72वें गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी की गई है। इस बार के परेड में पहली बार फ्रांस से आए राफेल जेट विमानों (Rafale Jet) का प्रदर्शन किया जाएगा।

Publish Date:Mon, 25 Jan 2021 10:54 AM (IST) Author: Monika Minal

नई दिल्ली, एजेंसी। 72वें गणतंत्र दिवस के लिए तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है।  इस बार परेड में पहले लड़ाकू विमान राफेल जेट के साथ पहली लड़ाकू विमान की पायलट भावना कंठ (Bhavna Kanth) भी शामिल होंगी। परेड में राफेल जेट  विमानों का प्रदर्शन किया जाएगा। बता दें कि इस बार गणतंत्र दिवस परेड कोरोनो वायरस महामारी के कारण अलग तरीके से मनाई जा रही है। कोविड -19 प्रोटोकॉल के तहत परेट में हिस्सा लेने वाले सभी सेना के जवान मास्क में होंगे। 

दोहरे इंजन वाला है राफेल जेट 

फ्रांस में बना दोहरे इंजन वाला राफेल जेट लड़ाकू विमान है। फ्रांस की एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन ने इसका निर्माण किया है। इसका निर्माण पहली बार मई 2001 में किया गया था। भारत के साथ ही इसका इस्तेमाल मिस्र, कतर, यूनान समेत अन्य कई देश कर रहे हैं। 

बिहार से हैं भावना

गणतंत्र दिवस परेड में इस बार देश की पहली महिला फाइटर जेट पायलट भावना कंठ (Bhawana Kanth) दिखने वाली हैं। फ्लाइंग ऑफिसर के तौर पर उनका चयन वर्ष 2016 के 18 जून को हुआ था। भावना की प्रारंभिक शिक्षा बरौनी रिफाइनरी स्थित डीएवी स्कूल, सीनियर सेकेंडरी की शिक्षा विद्या मंदिर, कोटा, राजस्थान से हुई है। उन्होंने बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। वर्ष 2015 जनवरी को  वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर भावना की नियुक्ति हुइ। प्रमोशन के बाद वे फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर पहुंची हैं। बीते वर्ष राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावना कंठ को नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया था।

बता दें कि पांच दशक से अधिक समय के बाद इस साल पहला गणतंत्र दिवस समारोह बगैर मुख्य अतिथि के मनाया जा रहा है। वैसे इस बार के लिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को आमंत्रित किया गया था जिसे उन्होंने स्वीकार भी कर लिया लेकिन फिर कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के संक्रमण के मद्देनजर उन्हें अपना कार्यक्रम रद करना पड़ा। इसके पहले 1952, 1953 और 1966 में बगैर मुख्य अतिथि ही गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया था।

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