Pulwama Terror Attack: बसुमतारी बोले कि मेरी एक फोटो खींच लो पता नहीं कब बम धमाके में मर जाऊं

असम,एजेंसी। Pulwama Terror Attack, असम के बाक्सा जिले के तामूलपुर थाना के कालीबारी गांव के मानेश्वर बसुमतारी भी उन 40 जवानों में शामिल हैं जो गुरुवार को पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हो गए। बसुमतारी एक महीने की अपनी छुट्टी अपने घरवालों के साथ बिताने के बाद 4 फरवरी को कश्मीर लौटे थे। इसके बाद अचानक गुरुवार को दोपहर में मोबाइल के जरिए परिजनों को सूचना मिली कि वे आत्मघाती हमले में शहीद हो गए हैं। इस सूचना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया। परिजन इस खबर के बाद गमगीन हैं।

19 साल से सेना को दे रहे थे सेवा 
मानेश्वर पिछले 19 साल से सेना को अपनी सेवा दे रहे थे। वे साल 1990 में सीआरपीएफ से जुड़े थे। इसके बाद से वे देश के अलग अलग हिस्सों में सेवा देते हुए गुरुवार को इस आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त हो गए। वे सीआरपीएफ की 98वीं बटालियन में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे।

श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों का तांता लगा
वीर शहीद जवान को श्रद्धांजलि देने के लिए गांव में शुक्रवार सुबह से लोगों का तांता लगा हुआ है। उनकी पत्नी सन्मति बसुमतारी ने रोते हुए बताया कि घटना की जानकारी उन्हें दोपहर 3.30 बजे के आसपास फोन से हुई। उनका एक बेटा और एक बेटी है। 

ड्यूटी पर जाते हुए दर्दनाक वाकये का जिक्र 
सन्मति ने बताया है कि मानेश्वर ने गुरुवार की तड़के सुबह फोन कर बताया था कि रास्ता खुल गया है। उनका काफिला बहुत जल्द निकलने वाला है। रोते हुए उन्होंने एक बेहद दर्दनाक वाकये का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस बार छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर जाते हुए हम लोगों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मेरी फोटो खींच कर रख लो पता नहीं कब बम विस्फोट हो और मैं चला जाऊं। उनकी यह बात भुलाए नहीं भूलती है। 

सरकार को इसका मुंहतोड़ जवाब देना होगा 
शहीद के भांजे ने रोते हुए कहा कि भारत सरकार इस आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए नहीं तो देश के वीर जवान इसी तरह से शहीद होते रहेंगे। सरकार को इसका मुंहतोड़ जवाब देना ही होगा। रोते हुए भांजे ने कहा कि मेरे मामा की एक बेटी और एक बेटा है। दोनों अब किसके सहारे अपना जीवन बिताएंगे। सरकार से सभी आवश्यक मदद मुहैया कराने की गुहार लगाई।

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