इंटरनेट बंद करने के निर्णय के लिए उचित व्यवस्था की जरूरत, संसदीय समिति का केंद्र पर निशाना

दूरसंचार सेवाओं/इंटरनेट निलंबन और उसका प्रभाव शीर्षक से संसद में पेश में रिपोर्ट में दूरसंचार और इंटरनेट बंद किए जाने की उपयुक्तता पर निर्णय लेने के लिए जल्द- से -जल्द एक उचित तंत्र स्थापित करने की जरूरत बताई गई है।

Monika MinalPublish:Thu, 02 Dec 2021 02:44 AM (IST) Updated:Thu, 02 Dec 2021 07:25 AM (IST)
इंटरनेट बंद करने के निर्णय के लिए उचित व्यवस्था की जरूरत, संसदीय समिति का केंद्र पर निशाना
इंटरनेट बंद करने के निर्णय के लिए उचित व्यवस्था की जरूरत, संसदीय समिति का केंद्र पर निशाना

नई दिल्ली, प्रेट्र। इंटरनेट को किसी भी हालात या परिस्थिति में बंद करने के सरकार के फैसले पर संसदीय समिति ने आज सवाल उठाया और कहा कि ऐसा करने से पहले उचित इंतजाम होना जरूरी है। संसद की एक समिति ने किसी खास समय के दौरान इंटरनेट बंद करने के औचित्य के बारे में निर्णय करने को लेकर मानदंडों के अभाव के लिए सरकार की खिंचाई की है। उसने कहा कि सार्वजनिक आपात स्थिति और जन सुरक्षा की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है। समिति ने इसके लिए एक उचित व्यवस्था की जरूरत बताई है।

संचार और सूचना प्राद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की है कि सरकार को दूरसंचार और इंटरनेट सेवा बंद होने से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने को लेकर अध्ययन कराना चाहिए। साथ ही सार्वजनिक आपात स्थिति और जन सुरक्षा से निपटने में इसका प्रभाव का पता लगाया जाना चाहिए।

'दूरसंचार सेवाओं/इंटरनेट निलंबन और उसका प्रभाव' शीर्षक से संसद में पेश में रिपोर्ट में दूरसंचार और इंटरनेट बंद किए जाने की उपयुक्तता पर निर्णय लेने के लिए जल्द- से -जल्द एक उचित तंत्र स्थापित करने की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 'सार्वजनिक आपात स्थिति और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर परिभाषित मापदंडों को भी अपनाया और संहिताबद्ध किया जा सकता है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जमीनी स्तर पर निलंबन नियमों को लागू करते समय विभिन्न राज्यों में कोई अस्पष्टता न हो।'

समिति ने कहा कि मौजूदा स्थिति में ऐसा कोई मानदंड नहीं है, जिससे दूरसंचार/इंटरनेट बंद करने के औचित्य या उपयुक्तता के बारे में निर्णय किया जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे मानदंडों के नहीं होने से इंटरनेट बंद करने का आदेश जिला स्तर के अधिकारी के मूल्यांकन और जमीनी स्थितियों के आधार पर दिया जाता है और यह काफी हद तक कार्यकारी निर्णयों पर आधारित है।