भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की प्रक्रिया शुरू

भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की प्रक्रिया शुरू
Publish Date:Sun, 20 Sep 2020 07:49 AM (IST) Author: Pooja Singh

नई दिल्ली, एएनआइ। रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के लिए चयन बोर्ड ने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारतीय सेना में स्थायी कमीशन देने के लिए महिला अधिकारियों की स्क्रीनिंग के लिए गठित विशेष संख्या-5 चयन बोर्ड ने 14 सितंबर, 2020 को सेना मुख्यालय में अपनी कार्यवाही शुरू कर दी है।

बोर्ड के प्रमुख सीनियर जनरल ऑफिसर हैं और इसमें ब्रिगेडियर रैंक की एक महिला अधिकारी भी शामिल हैं। महिला अधिकारियों को ऑब्जर्वर के दौर पर मौजूद रहने की अनुमति प्रदान की गई है ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता रहे। स्क्रीनिंग प्रक्रिया में योग्य पाई जाने वाली महिला अधिकारियों को ही स्थायी कमीशन प्रदान किया जाएगा।

सेना के दस विभागों में स्‍थायी कमीशन की मिली मंजूरी

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार शॉर्ट सर्विस कमीशन की महिला सैन्य अधिकारियों को सेना के सभी दस इकाइयों में स्थायी कमीशन की इजाजत दे दी गई है। इसके हिसाब से अब आर्मी एअर डिफेंस, सिग्नल, इंजीनियर, सैन्य एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, आर्मी सर्विस कार्पस, आर्डिनेंस कॉर्पस और इंटेलिजेंस कॉर्पस में स्थाई कमीशन मिल पाएगा। जज एंड एडवोकेट जनरल, आर्मी एजुकेशनल कॉर्पस इकाइयों में महिलाओं के स्थाई कमीशन का विकल्प पहले से ही था।

महिला अफसरों को मिलेगा बड़ी भूमिका निभाने का अधिकार

महिलाओं को उनका हक देने संबंधी अधिसूचना पर सेना ने बयान जारी कर कहा कि भारतीय सेना सभी महिला अधिकारियों को देश सेवा का मौका देने के लिए पूरी तरह तैयार है। रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक मंजूरी के बाद महिला अफसरों को बड़ी भूमिका निभाने का अधिकार मिल गया है।

इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सेना मुख्यालय ने स्थायी चयन बोर्ड बनाने की पहल भी शुरू कर दी है। शार्ट सर्विस कमीशन की सभी महिला अधिकारियों को अपेक्षित दस्तावेज पूरा करने के लिए चयन बोर्ड जल्द से जल्द गठित किया जाएगा। सेना के अनुसार महिला अधिकारियों सहित सभी कर्मियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए वह प्रतिबद्ध है। हालांकि अग्रिम मोर्चे के युद्ध आपरेशन से जुड़ी इकाइयों में महिलाओं को स्थायी कमीशन से अलग रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में भी कांबैट आपरेशन से महिलाओं को अलग रखने की ही राय दी थी।

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