जम्मू-कश्मीर में किताबों के मुख्य पन्नों पर होगी संविधान की प्रस्तावना

राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने स्कूल में पढ़ाई जाने वाली किताबों में भारतीय संविधान की प्रस्तावना को प्रकाशित करने के स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग को संविधान में दर्ज मौलिक कर्तव्यों को भी किताबों में प्रकाशित करने को कहा है। वह मंगलवार को 26 नवंबर को मनाए जाने वाले संविधान दिवस की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक कर रहे थे। उन्होंने 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम में 26 नवंबर को संविधान की प्रस्तावना पढ़ने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने बैठक में कहा कि 26 नवंबर को सभी सरकारी कार्यालयों, स्वायत्त संस्थानों और स्कूलों में भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़ी जाएगी। इसी दिन मौलिक कर्तव्यों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए भी राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू होगा, जो डॉ. भीड राव आंबेडकर की जयंती यानी 14 अप्रैल तक चलेगा।

संविधान दिवस मनाने के लिए सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय को नोडल मंत्रालय बनाया गया है। कानून, न्याय और संसदीय मामलों के विभाग को जम्मू कश्मीर में नोडल विभाग बनाया गया है।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी विश्वविद्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों, मेडिकल कॉलेजों में इस दिन निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी सेमिनार किए जाएं। शिक्षा विभाग को मौलिक कर्तव्यों पर लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम करने को कहा है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 से 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। 26 नवंबर 1949 को ही भारतीय संविधन अपनाया गया था और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था।

गौरतलब है कि राज्य के पुनर्गठन के बाद प्रशासन ने स्कूलों को खोलने का एलान कर दिया था, लेकिन आतंकियों और अलगाववादियों की धमकियों के कारण परिजन बच्चों को स्कूल भेजने से परहेज कर रहे थे। फोन सेवाओं के साथ गत सप्ताह रेल परिचालन भी शुरू हो गया था और बाजार में भी रौनक लौट आई। राज्य पुलिस एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम हालात पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं। स्थिति को पूरी तरह शांत व सामान्य बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

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