कहीं अमेरिका में राष्‍ट्रपति ट्रंप की जीत की मंशा पर पानी न फेर दे अश्‍वेतों की मौत का मुद्दा!

नस्‍लीय हिंसा के मामले ट्रंप की जीत में रोड़ा अटका सकते हैं।
Publish Date:Wed, 28 Oct 2020 03:02 PM (IST) Author: Kamal Verma

नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। अमेरिका में जैसे जैसे राष्‍ट्रपति चुनाव के लिए मतदान का दिन नजदीक आता जा रहा है वहीं राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के विरोधियों को नया मुद्दा मिलता जा रहा है। फिलाडेल्फिया में पुलिस के हाथों मारे गए 27 वर्षीय अश्‍वेत नागरिक की हत्‍या ने विरोधियों को ऐसा ही एक मुद्दा दे दिया है। यूं भी विरोधी ट्रंप के कार्यकाल में अश्‍वेतों की मौतों के मामले को ठंडा नहीं होने देना चाहते हैं। आपको यहां पर ये भी बता दें कि ट्रंप के कार्यकाल के अंतिम वर्ष में अश्‍वेत नागरिकों के खिलाफ हुई तीन घटनाओं ने ट्रंप के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दरअसल इसी वर्ष में ऐसी तीन घटनाएं अब तक हो चुकी हैं, जिनमें से दो नागरिकों को मौत हो गई थी, जबकि एक नागरिक अब भी अस्‍पताल में है। अमेरिका की सरकार के आंकड़ों भी बताते हैं कि वर्ष 2000 से 2018 के बीच पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने की वजह से कुल 1,081 लोगों की मौत हुई, जिनमें से 32 फीसद लोग अश्‍वेत नागरिक थे।

ताजा मामलें जिस अश्‍वेत नागरिक की मौत हुई है उसका नाम वॉल्‍टर जूनियर बताया गया है। रॉयटर की खबर के मुताबिक पुलिस को जानकारी मिली थी कि एक व्‍यक्ति हाथ में चाकू लिए सड़क पर मौजूद है। इसके बाद मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने उसको चाकू जमीन पर रखने को कहा। लेकिन ऐसा करने के बाद वो पुलिस कर्मियों की तरफ बढ़ गया। इसे बाद पुलिसकर्मियों ने उस पर गोलियां चला दी। इस घटना के बाद उसको अस्‍पताल ले जाया गया जहां पर डॉक्‍टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पुलिस के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए और नारेबाजी करने लगे। पुलिस को इन प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। इसका नतीजा ये हुआ कि दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़पें हुई जिसमें तीस से अधिक लोग घायल हो गए और कई लोगों को हिरासत में भी ले लिया गया।

प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों में भी लूटपाट की। घटना को देखते हुए यहां पर नेशनल गार्ड कर्मियों की तैनाती कर रही है। पीड़ित परिवार की मानें तो इस घटना में मारा गया व्‍यक्ति दिमागी रूप से परेशान था। इसको देखते हुए ही उसके परिवार ने एंबुलेंस को बुलाया था। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वहीं पुलिस कह रही है कि वॉलेस ने पुलिस के आदेश को नहीं माना, जिसके फलस्‍वरूप मजबूरन उन्‍हें गोली चलानी पड़ी। वॉलेस की मां कैथी ने कहा कि वे वहां खड़े थे और हम पर हंस रहे थे। वॉलेस की पत्नी गर्भवती हैं और उनके नौ बच्चे हैं।

इस घटना ने अमेरिका में हुई पिछली दोनों ही घटनाओं की याद ताजा कर दी हैं। इन दोनों घटनाओं में से पहली जॉर्ज फ्लॉयड की है। जॉर्ज को 25 मई को अमेरिका के मिनिपोलिस में पुलिस ने एक दुकान में नकली बिल का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस फ्लायड को गाड़ी में बैठाने की कोशिश कर रही थी, उसी दौरान वह जमीन पर गिर गया और उसकी मौत हो गई। इसके बाद घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें एक श्वेत पुलिस अधिकारी फ्लायड की गर्दन को घुटने से दबाता दिख रहा था। पुलिस फ्लायड की गर्दन को तब तक दबाता दिखाई दिया जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। इस घटना के बाद अमेरिका के लगभग सभी राज्यों में जबरदस्‍त प्रदर्शन देखने को मिला था। कई जगहों पर ये प्रदर्शन हिंसा में भी तब्‍दील हो गया था। इस घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने सीधेतौर पर इसके लिए मौजूदा सरकार को भी जिम्‍मेदार ठहराया था। वहीं ट्रंप के विरोधी गुटों ने भी ट्रंप के कार्यकाल में नस्‍लीय घटनाओं के बढ़ने का जिक्र कर राष्‍ट्रपति को आड़े हाथों लिया था। इस घटना के खिलाफ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी पुलिस अधिकारी डेरेक चाउविन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। इसके बाद उसको हिरासत में तो लिया गया था लेकिन कोर्ट ने उसको 8 अक्‍टूबर को दस लाख डॉलर के मुचलके पर रिहा कर दिया। आपको बता दें कि इस घटना के खिलाफ पूरे देश में करीब तीन माह से अधिक प्रदर्शन चला था।

जॉर्ज की घटना के ठीक चार माह बाद 24 अगस्‍त को अमेरिका के विस्‍कोंसिन के केनोशा शहर में पुलिस ने एक अश्‍वेत नागरिक जैकब ब्‍लैक को सात गोलियां मारी थीं। इसके बाद उसको गंभीर हालत में अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना का जब वीडियो वायरल हुआ तो उसमें एक अश्‍वेत नागरिक कार में बैठता हुआ दिखाई दे रहा था। तभी एक पुलिसकर्मी ने उसको पीछे से आकर पकड़ लिया और दूसरे ने उस पर गोलिया चला दीं। जैकब के परिवार के वकील ने इस घटना के बाद बताया कि गोली लगने की वजह से वह अब कभी चल नहीं सकेगा। इस घटना के बाद भी पूरे देश में प्रदर्शनों का दौर चला था। राष्‍ट्रपति ट्रंप भी इस घटना के बाद विस्‍कोंसिन गए थे। वहां पर उन्‍होंने इस घटना को स्‍वदेशी आतंकवाद करार दिया था। जहां तक अश्‍वेतों के खिलाफ घटी घटनाओं की बात है तो आपको बता दें कि इस चुनाव में ब्लैक लाइव्स मैटर का मुद्दा काफी अहम बन चुका है। यही वजह है कि इनकी वजह से ट्रंप की मंशा पर कहीं न कहीं सवालिया निशान लगता जरूर दिखाई दे रहा है।

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