बूस्टर डोज और बच्चों के टीकाकरण पर जल्दबाजी में नहीं है सरकार, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कही यह बात

कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन सामने आने के बाद वैक्सीन की बूस्टर डोज और बच्चों के टीककरण को लेकर सवाल हो रहे हैं। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को कहा कि वैज्ञानिक सलाह पर सरकार बच्चों के टीकाकरण और बूस्टर डोज पर निर्णय लेगी।

TaniskFri, 03 Dec 2021 06:37 PM (IST)
संसद में कोरोना पर चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री मांडविया। (फोटो- एएनआइ)

नई दिल्ली, जेएनएन। कोरोना के ओमिक्रोन वैरिएंट को लेकर फैलती दहशत के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि बूस्टर डोज और बच्चों के टीकाकरण पर फैसला वैज्ञानिक सलाह के आधार पर किया जाएगा। ओमिक्रोन वैरिएंट को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है और देश में इस वैरिएंट आफ कंसर्न का पता लगाने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग भी कराई जा रही है।कोरोना पर लोकसभा में 11 घंटे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने इस महामारी पर भी राजनीति करने के लिए विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया और उन्हें देश के विज्ञानियों पर भरोसा रखने की सलाह दी।

मांडविया ने कहा कि ओमिक्रोन के प्रसार को रोकने के लिए सरकार पूरा प्रयास कर रही है। इस वैरिएंट के मद्देनजर जोखिम वाले देशों से अब तक आए 16,000 यात्रियों की आरटी-पीसीआर जांच कराई गई है। इनमें से 18 लोग संक्रमित पाए गए हैं। इनमें ओमिक्रोन वैरिएंट के पता लगाने के लिए इनके नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा गया है।

चर्चा के दौरान गुरुवार को कई सदस्यों ने कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज और कोरोना के नए वैरिएंट को लकर जताई गई चिंता जताई थी, जिसके दो मामले कर्नाटक में सामने आए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बूस्टर डोज और बच्चों के टीकाकरण पर कोई भी फैसला विज्ञानियों की सलाह के बाद ही लिया जाएगा।

विपक्ष ने दूसरी लहर के दौरान सरकार की खामियां गिनाईं

सदन में चर्चा के दौरान शुक्रवार को भी विपक्षी सदस्यों ने पहली और दूसरी लहर के दौरान सरकार प्रबंधन की खामियों को फिर से गिनाया। इस दौरान कुछ सदस्यों ने अपने राज्यों ने कोरोना के टीके की कमी का मुद्दा भी उठाया। जबकि कुछ विपक्षी सदस्यों ने केंद्र सरकार पर विपक्ष शासित राज्यों के साथ भेदभाव का आरोप भी लगाया।

स्वास्थ्य मंत्री का विपक्ष पर पलटवार

स्वास्थ्य मंत्री मांडविया ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए आंकड़ों के साथ बताया कि किस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कोरोना काल की चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि हमारे विज्ञानियों ने कम समय में वैक्सीन तैयार कर दिखाया और इसके परिणामस्वरूप हम 125 करोड़ से अधिक डोज देने में सफल रहे हैं। पहले भारत में लोगों को वैक्सीन विकसित होने के 10-15 साल बाद ही मिल पाती थी।

सांसद अपने क्षेत्रों में 100 प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करें

दिसंबर तक सभी वयस्कों के टीकाकरण पर आशंका जताने वाले कांग्रेस के गौरव गोगोई का जवाब देते हुए मांडविया ने कहा कि सरकार ने इसके लिए वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने का वादा किया था और वह पूरा हो रहा है। राज्यों के पास अब भी 22 करोड़ से अधिक डोज उपलब्ध हैं और इस महीने 10 करोड़ और डोज मिलेंगी। मांडविया ने गोगोई से पूछा कि एक सांसद होने के नाते आखिर उन्होंने अपने क्षेत्र में संपूर्ण टीकाकरण के लिए क्या प्रयास किया।

अब तक 85 प्रतिशत लोगों को पहली डोज दी गईं

मांडविया ने बताया कि देश में अब तक 85 प्रतिशत पात्र आबादी को वैक्सीन की पहली डोज लगाई गई हैं, जबकि 50 प्रतिशत का पूर्ण टीकाकरण हो चुका है। उन्होंने टीकाकरण में तेजी लाने के लिए सभी सांसदों से अपने-अपने क्षेत्रों में 100 प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

पीएम-केयर्स फंड पर बंद हो राजनीति

मांडविया ने कहा कि विपक्ष को पीएम-केयर्स फंड पर राजनीति बंद करनी चाहिए। इसके जरिये 58,000 वेंटीलेटर खरीदे गए, जिनमें से ज्यादातर की खरीद सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों सी की गई। केंद्र की तरफ से 50,200 वेंटीलेटर राज्यों को दिए गए और 48,000 विभिन्न अस्पतालों में लगाए गए। सरकार ने राज्यों के लिए कोरोना संबंधी आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की।

सरकार शक्ति से नहीं, इच्छाशक्ति से करती है काम

मांडविया ने कहा कि सरकार नतीजों के लिए काम करती है। कोरोना काल के दौरान मोदी सरकार ने दिखाया दिया है कि वह शक्ति से नहीं इच्छा शक्ति से काम करती है।

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