बारिश से मंडियों में भीगा धान, हवा से खेतों में बिछी फसल, किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें

इन दिनों मंडियां धान से अटी पड़ी हैं। रविवार को हुई बारिश के कारण उत्तर प्रदेश व हरियाणा समेत कई राज्यों में मंडियों में रखा धान भीग गया। तेज हवाएं चलने के कारण खेतों में खड़ी फसल गिर गई जिससे किसानों का ज्यादा नुकसान हुआ है।

Arun Kumar SinghSun, 17 Oct 2021 10:20 PM (IST)
रविवार को हुई बारिश के कारण मंडियों में रखा धान भीग गया।

नई दिल्ली, जागरण टीम। इन दिनों मंडियां धान से अटी पड़ी हैं। रविवार को हुई बारिश के कारण उत्तर प्रदेश व हरियाणा समेत कई राज्यों में मंडियों में रखा धान भीग गया। तेज हवाएं चलने के कारण खेतों में खड़ी फसल गिर गई, जिससे किसानों का ज्यादा नुकसान हुआ है। बारिश से तापमान में गिरावट आई है और ठंड का भी अहसास होने लगा है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इससे रात के तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है।

बेमौसम बारिश ने फसलों को पहुंचाया नुकसान

स्काई मेट के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान दिल्ली, बंगाल, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब व छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में रुक-रुककर बारिश का क्रम दिनभर जारी रहा। हवा के साथ हुई बारिश के कारण धान की पकी और कटी फसल को नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों में जलभराव भी हुआ। बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। हरियाणा के कैथल और यमुनानगर में सबसे ज्यादा बारिश हुई है। अकेले कैथल की मंडियों में डेढ़ लाख से अधिक धान की बोरियां भीग गई। मंडियों में अधूरे इंतजाम के कारण किसानों को भारी नुकसान होगा। कई मंडियों में तिरपाल तक की व्यवस्था नहीं थी। जिन किसानों का धान भीग चुका है उन्हें बेचने के लिए सूखने का इंतजार करना पड़ेगा या औने-पौने दामों में बेचना पड़ेगा।

कृषि विज्ञानियों के मुताबिक फसलों पर बारिश का प्रभाव

धान : अगेती बिजाई करने वाले किसानों को धान में नुकसान होता दिख रहा है।

कपास : इस बारिश में टिंडे गल रहे हैं और फूल भी काफी प्रभावित हुआ है। ऐसे में कपास में भारी नुकसान है।

बाजरा : अभी तक तो अधिक नुकसान नहीं है, मगर आगे लगातार बारिश हुई तो इस फसल में भी नुकसान हो सकता है।

मूंग : इस फसल में अधिक नुकसान हुआ है। फलियों पर पानी पड़ने से यह काली हो जाती है।

ग्वार : इस फसल में अंगमारी बीमारी नमी के कारण आ रही है। इस सफल में भी बारिश का नुकसान है।

बढ़ जाएगी नमी, नहीं खरीदेंगी एजेंसियां

बारिश अधिक होने पर धान में नमी की मात्रा बढ़ जाएगी। अगर यह मात्रा 17 फीसद से अधिक हो गई तो खरीद एजेंसियां खरीदने से इन्कार कर सकती हैं। किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर धान बेचना पड़ेगा, क्योंकि सरकार की ओर से नमी की मात्रा अधिकतम 17 फीसद निर्धारित है। ऐसी स्थिति में किसानों को धान सुखाना पड़ेगा जिसमें अतिरिक्त समय तो लगेगा ही, उनको अतिरिक्त पूंजी भी खर्च करना पड़ेगा।फसलों को नुकसान, वायु प्रदूषण से मिलेगी राहत हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्र्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. मदन खिचड़ ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने एक कम दबाव के क्षेत्र से हरियाणा में 18 और 19 अक्टूबर को भी बारिश के आसार हैं। बारिश आई तो वायु प्रदूषण से राहत मिल सकती है। फसलों के लिए बारिश हानिकारक हो सकती है।

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