नई शिक्षा नीति का एक वर्ष: ऑनलाइन शिक्षा है आज की जरूरत, फ्लिप्ड क्लासरूम तकनीक का हो प्रयोग

आज ही के दिन एक साल पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश की नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एक दस्तावेज मात्र नहीं है अपितु शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र के पुननिर्माण के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक भी है।

TilakrajThu, 29 Jul 2021 10:18 AM (IST)
आज ही के दिन एक साल पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश की नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी थी

आचार्य राघवेंद्र प्रसाद तिवारी। शिक्षा ऐसा विषय है, जिसमें रातोंरात परिवर्तन होना मुश्किल है, पर यह भी सच है कि अगर लागू करने वाले प्राधिकारियों में इच्छाशक्ति हो तो बदलाव की राह पर चल पड़ना बहुत कठिन भी नहीं होता। कहा जा सकता है कि बीते बारह महीनों में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के हिसाब से देश की शिक्षा में कई परिवर्तनों की आधारशिला रखी गई है। उम्मीद की जानी चाहिए कि बदलाव की यह बयार आने वाले दिनों में भारत में उस सोच को रूपायित करेगी, जिसकी कल्पना नई शिक्षा नीति में की गई है

आज ही के दिन एक साल पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश की नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एक दस्तावेज मात्र नहीं है, अपितु शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र के पुननिर्माण के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक भी है। नि:संदेह यह एक विद्यार्थी केंद्रित नीति है, जो इस बात की पुष्टि करती है कि विद्यार्थी वर्ग ही शिक्षा व्यवस्था के प्रमुख हितधारक हैं तथा शिक्षकों का नैतिक दायित्व है कि वे विद्यार्थियों के सपनों और आकांक्षाओं के अनुरूप उन्हें शिक्षित एवं प्रशिक्षित करें। इसीलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सीखने के बहु-आयामी दृष्टिकोणों को बढ़ावा दिया गया है, इसमें औपचारिक, आनलाइन तथा दूरस्थ अथवा वर्चुअल माध्यम द्वारा बहु-विषयक, व्यावसायिक एवं कौशल-विकास को पोषित करने वाले पाठ्यक्रमों के निर्माण की बात कही गई है।

इसके क्रियान्वयन के उपरांत शिक्षा जगत में विद्यार्थियों की पहुंच में वृद्धि, गुणवत्ता और रुचियां सुनिश्चित हो सकेंगी। विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम रुचिकर होगा एवं शिक्षण प्रणाली लोकतांत्रिक बन सकेगी। शिक्षा में तकनीक के उपयोग एवं एकीकरण द्वारा विविध शिक्षण मार्गों को अपनाने से ही इसका सफल क्रियान्वयन संभव है। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षण में व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों द्वारा विद्यार्थियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करती है। औपचारिक शिक्षण पद्धति में यदि शिक्षक शिक्षा को व्यक्तिगत एवं सामूहिक दृष्टि से अधिक सक्रिय बनाना चाहे तब भी उसके पास पर्याप्त समय नहीं होता है।

परिणामस्वरूप विद्यार्थियों में वांछित स्तर, चिंतन क्षमता, वैश्विक दक्षता और रचनात्मकता को प्रोत्साहन नहीं मिलता, जिससे कौशलहीनता तथा बेरोजगारी को बढ़ावा मिलता है। अत: हमें औपचारिक शिक्षा के पूरक एवं सहयोगी विकल्पों पर विचार करना होगा। इस संदर्भ में मिश्रित शिक्षा प्रणाली एक अनुकूल एवं सहयोगी विकल्प हो सकती है। मिश्रित शिक्षा प्रणाली में आनलाइन और क्लासरूम शिक्षा के सर्वोत्‍तम पक्षों को संयोजित किया जाता है, जिससे छात्रों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सुगमता होती है।

मिश्रित शिक्षा प्रणाली एक निर्देशात्मक पद्धति है, जिसमें शिक्षा को आनंदप्रद बनाने वाली गतिविधियां सम्मिलित होती हैं। यह औपचारिक तथा आनलाइन माध्यम का मात्र भौतिक मिश्रण नहीं, अपितु दोनों का सुनियोजित संयोजन है। हालांकि इसके लिए आवश्यक है कि शिक्षक और छात्र दोनों भौतिक रूप से एक ही मंच पर हों। फ्लिप्ड क्लासरूम इसी प्रकार की तकनीक है, जिसमें क्लासरूम में प्रौद्योगिकी द्वारा पारंपरिक औपचारिक शिक्षा की प्रभावशीलता को सुदृढ़ता मिलती है। इसमें विडियो व्याख्यान, पाडकास्ट, रिकार्डिंग तथा आलेख आदि शैक्षिक सामग्री विद्यार्थियों को पूर्व में ही उपलब्ध कराई जाती हैं, जिसके फलस्वरूप कक्षाओं में छात्रों को गतिविधि आधारित शिक्षण एवं विमर्श के अवसर तथा सक्रिय भागीदारी के लिए पर्याप्त समय मिलता है।

मिश्रित शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत शिक्षकों की वर्तमान भूमिका के साथ-साथ उन्हें परामर्श और प्रशिक्षण रूपी अतिरिक्त भूमिकाएं भी निभानी होती हैं। इसके लिए अधिक शिक्षकों की आवश्यकता होगी। इस प्रणाली के अंतर्गत शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों को अधिक प्रशिक्षित होने की भी आवश्यकता होगी। परंपरागत क्लासरूम शिक्षण एकालाप प्रणाली है, जो विद्याíथयों को केवल सूचना संग्रही बनाती है। मिश्रित शिक्षा प्रणाली छात्र केंद्रित है, जिसमें चिंतनशील, विचार-मंथन, अभ्यास, अवधारणा, रचनात्मक प्रस्तुति, वास्तविक जगत से संपर्क, केस स्टडी एवं व्यक्तिगत तथा समूह में प्राप्त ज्ञान को आत्मसात करने से छात्रों में तार्किक क्षमता का विकास होता है। यह प्रणाली विद्यार्थियों को वाद-विवाद तथा विवादों के सहज समाधान के लिए व्यापक अवसर प्रदान करती है। इस प्रक्रिया में शिक्षक अप्रासंगिक नहीं होंगे, अपितु यह शिक्षकों और विद्याíथयों को समान रूप से अधिक संतुष्टि प्रदान करने वाली होगी। इसे अपनाकर शिक्षक अतिरिक्त दायित्व बोध के साथ कक्षा में अधिक प्रभावशाली होंगे।

मिश्रित शिक्षा में प्रयोग संभव हैं, क्योंकि आभासी प्रयोगशालाओं के द्वारा दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रयोग कराए जा सकते हैं। शिक्षा मंत्रलय की फोसी परियोजना का उद्देश्य सूचना और प्रौद्योगिकी के माध्यम से अकादमिक और शोध के क्षेत्रों में शैक्षणिक उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देना है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक विद्यार्थियों के ध्यान स्तर, सीखने के पसंदीदा ढंग, गति तथा सीखने के स्तर आदि को जानने में सहयोगी सिद्ध होगी। मुक्त शिक्षण संसाधन, ई-पीजी पाठशाला, स्वयंप्रभा, स्नातक विषयों में ई-सामग्री, यूजीसी यूट्यूब चैनल, एक राष्ट्र एक डिजिटल मंच परियोजना आदि से ई-शिक्षा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

वस्तुत: मिश्रित शिक्षा प्रणाली 21वीं सदी के विद्यार्थियों के लिए वरदान साबित हो सकती है, परंतु डिजिटल डिवाइड एवं इंटरनेट कनेक्टिविटी की वजह से इसको एकाएक लागू नहीं किया जा सकता। अत: विश्वविद्यालयों को इस प्रणाली को लागू करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, विश्वविद्यालयों/शिक्षकों को परंपरागत तथा आनलाइन शिक्षा के मिश्रण के अनुपात निर्धारित करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। विश्वविद्यालयों द्वारा इस प्रणाली को आत्मसात करने से पूर्व आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके कार्यान्वयन में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि इससे औपचारिक शिक्षण उपेक्षित न हो। कुल मिलाकर देश के युवाओं में वैश्विक क्षमता विकसित कर उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रासंगिक बनाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के लिए हमें स्वयं को तैयार करना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रथम वर्षगांठ पर हमारा यही संकल्प हो।

(लेखक पंजाब केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, बठिंडा के कुलपति हैं)

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