बेलगाम विदेशी चंदा प्राप्त करना कोई मौलिक अधिकार नहीं, केंद्र ने हलफनामे में कही ये बात

एफसीआरए में किए गए संशोधनों को लेकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिला किया है जिसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन भारत में सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक धारा पर हावी न हो।

Monika MinalFri, 22 Oct 2021 02:42 AM (IST)
बेलगाम विदेशी चंदा प्राप्त करना कोई मौलिक अधिकार नहीं : केंद्र

नई दिल्ली, प्रेट्र।  केंद्र सरकार ने विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम, 2010 (एफसीआरए) में किए गए संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की सुप्रीम कोर्ट से मांग करते हुए गुरुवार को कहा कि बिना किसी विनियमन के 'बेलगाम विदेशी चंदा' प्राप्त करना मौलिक अधिकार नहीं है।

केंद्र ने शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में कहा है कि यह अधिनियम एक ऐसा संप्रभु और समग्र कानून है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन भारत में सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक धारा पर हावी न हो।

हलफनामे में कहा गया है कि कुछ विदेशी ताकतें कुत्सित इरादों के साथ भारत की आंतरिक राजनीतिक में हस्तक्षेप करते हैं और ऐसी ताकतों को इससे रोकने के लिए यह संशोधन बहुत ही जरूरी था। ऐसे चंदे के लेन-देन पर प्रतिबंध का उद्देश्य ऐसे कुत्सित इरादों को रोकना और इसके खिलाफ कदम उठाना है। हलफनामे में यह भी हा गया कि अधिनियम का उद्देश्य कुछ व्यक्तियों या संघों या कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले विदेशी चंदे या विदेशी आतिथ्य को विनियमित करना है और ऐसी किसी भी गतिविधियों को प्रतिबंधित करना या रोकना है, जो राष्ट्रीय हित के विरुद्ध हैं। इसमें आगे कहा गया कि बिना किसी विनियमन के बेलगाम विदेशी चंदा प्राप्त करने का कोई मौलिक अधिकार निहित नहीं है। 

सरकार ने दलील दी है कि वास्तव में, ऐसा कोई मौलिक अधिकार मौजूद नहीं है जिसके तहत कोई भी कानूनी या इसके इतर अधिकार विदेशी चंदा प्राप्त करने के कथित अधिकार को शामिल करने के लिए कहा जा सकता है। शीर्ष अदालत तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें विदेशी चंदा विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 से संबंधित मुद्दे उठाये गये हैं। इनमें से दो याचिकाओं में अधिनियम में किए गए संशोधनों को चुनौती दी गई है, जबकि एक ने संशोधित और कानून के अन्य प्रविधानों को सख्ती से लागू करने की मांग की है। जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ 28 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करेगी।

केंद्र ने कहा कि वह राष्ट्रीय विकास में गैर-लाभकारी और स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका को पहचानता है और वास्तविक गैर-सरकारी संगठनों को विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत अनिवार्य किसी भी नियामक अनुपालन से दूर होने की जरूरत नहीं है। सरकार ने कहा है कि विनियमन के बिना विदेशी चंदा प्राप्त करने का कोई अधिकार नहीं है।

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