बंदियों का लाखों का पारिश्रमिक हजम कर गए नौ जेलर, लाखों की रकम के हेराफेरी का आरोप

पूर्व कैदी ने सांठगांठ कर रायगढ़ से जनार्दन वेलफेयर सोसायटी का संचालन शुरू कर अपना खेल प्रारंभ किया। शिकायत के बाद जब जांच शुरू हुई तब पता चला कि बंदियों के पारिश्रमिक की अधिकांश राशि जनार्दन वेलफेयर सोसायटी के घनश्याम को दी जा रहीं थीं।

Monika MinalThu, 09 Dec 2021 02:01 AM (IST)
बंदियों का लाखों का पारिश्रमिक हजम कर गए नौ जेलर

रायपुर [राज्य ब्यूरो]। छत्तीसगढ़ के जेलों में विभिन्न अपराधों की सजा काट रहे बंदियों का लाखों का पारिश्रमिक हजम करने का मामला सामने आया है। इसमें नौ जेलों के जेलर जांच के घेरे में आ गए हैं। इनके खिलाफ लाखों की रकम हेराफेरी का आरोप लगने पर मुख्यालय के आदेश पर अलग-अलग जेल अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। इनमें जशपुर, रायगढ़, कटघोरा, महासमुंद, कोरबा, बेमेतरा समेत अन्य जेलों में पदस्थ रहे जेलर हैं। जांच के दायरे में आए दो जेलर सेवानिवृत भी हो चुके हैं, जबकि एक की मौत हो चुकी है।

जेल विभाग के मुताबिक इस घपले में बिलासपुर जेल में सजा काट चुके घनश्याम जांगड़े नामक बंदी की खास भूमिका रही है। इस पूर्व कैदी ने सांठगांठ कर रायगढ़ से जनार्दन वेलफेयर सोसायटी का संचालन शुरू कर अपना खेल प्रारंभ किया। शिकायत के बाद जब जांच शुरू हुई तब पता चला कि बंदियों के पारिश्रमिक की अधिकांश राशि जनार्दन वेलफेयर सोसायटी के घनश्याम को दी जा रहीं थीं। 

प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला कि जशपुर  जेल के रमाशंकर सिंह पर 23 लाख 84 हजार दो रुपये, उत्तम पटेल पर सात लाख 75 हजार  815 रुपये, जीएस शोरी पर 18 लाख 20 हजार 328 रुपये, एसके मिश्रा पर चार लाख 37 हजार 78 रुपये, एसएल जांग़़ड़े पर 38 लाख 77 हजार 113 रुपये, डीडी टोंडर पर 10 लाख 65 हजार 235 रुपये, एसके साहू पर चार लाख 65 हजार 313 रुपये, केएल देशमुख पर छह लाख 22 हजार 750 रूपये और सहायक जेल अधीक्षक एसपी कुर्रे पर 16 लाख 90 हजार 781 रपये की हेराफेरी करने के आरोप है। जेल मुख्यालय ने सभी नौ जेलरों को नोटिस जारी कर रकम जमा नहीं करने पर एफआइआर दर्ज कराने की बात कही तो उत्तम पटेल, रमाशंकर सिंह और संतोष मिश्रा ने पूरी राशि जेल विभाग के पास जमा कर दी।

से होता है बंदियों के पारिश्रमिक का भुगतान

सजायाफ्ता बंदियों को शासन के नियम के अनुसार कुशल बंदी को 70 रपये और अकुशल बंदी को 60 रपये का प्रतिदिन का भुगतान होता है। यह राशि बंदियों को एक साथ दी जाती है, लेकिन इस राशि का पचास फीसद हिस्सा पीड़ि‍त पक्ष को दिया जाता है। अर्थात बंदी अगर हत्या के जुर्म में सजा काट रहा है तो उसके पारिश्रमिक का आधा हिस्सा पीड़ि‍त परिवार को प्रदान किया जाता है। पीड़ि‍तों को दी जाने वाली राशि का भुगतान चेक के जरिए ही किया जाता है। इसके लिए जेल विभाग थाने को पत्र लिखकर सूचना भी देता है।

कांकेर के जेल अधीक्षक मंडावी ने कहा, 'सहायक जेल अधीक्षक एसएल जांगड़े, एसके साहू और उत्तम पटेल द्वारा की गई अनियमितता की जांच कर रहा हूं। अभी जांच पूरी नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जायेगी।'

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