New IT Rules 2021 : क्‍या हैं नए आईटी कानून, क्‍यों है इनकी जरूरत और क्‍या है इन पर विवाद, जानें सब कुछ

बीते 26 मई से नए आईटी नियम लागू हो गए हैं। इन नियमों ने केंद्र और कुछ सोशल मीडिया कंपनियों के बीच गतिरोध को भी जन्म दिया है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि नए आईटी नियम क्या हैं... केंद्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आमने-सामने क्यों हैं...

Krishna Bihari SinghMon, 02 Aug 2021 06:57 PM (IST)
नए आईटी नियमों पर केंद्र सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आमने-सामने क्यों हैं...

नई दिल्‍ली [जागरण ऑनलाइन डेस्‍क]। बीते 26 मई से नए आईटी नियम (New Information and Technology Rules 2021) लागू हो गए हैं। इन्‍हें 25 फरवरी 2021 को अधिसूचित किया था। इन नियमों ने भारत में ओटीटी प्लेटफार्मों और डिजिटल पोर्टलों के लिए शिकायत निवारण प्रणालियों का गठन करना अनिवार्य कर दिया है। इन नियमों के तहत बड़े डिजिटल प्‍लेटफार्मों (जिनके पास 50 लाख से ज्‍यादा यूजर्स हैं) को प्राप्त शिकायतों और उस पर की गई कार्रवाई के विवरण का उल्लेख करते हुए हर महीने अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करने की बाध्‍यता है। हालांकि इन नए आईटी नियमों ने केंद्र और कुछ सोशल मीडिया कंपनियों के बीच गतिरोध को भी जन्म दिया है। कंपनियों का कहना था कि सरकार की ओर से बनाए गए ये कानून असांविधानिक और प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ हैं। वहीं सरकार का कहना है कि देश में कानून सर्वोच्‍च है और सभी को उसका पालन करना चाहिए। कमोबेश गतिरोध अब भी जारी है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि नए आईटी नियम क्या हैं... साथ ही केंद्र सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आमने-सामने क्यों हैं...

नए आईटी नियम क्या हैं और क्यों हैं जरूरी

नए आईटी नियम 2021 के दिशानिर्देश कहते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत में एक मुख्य अनुपालन अधिकारी और एक नोडल संपर्क अधिकारी नियुक्त करने की आवश्यकता होगी। नोडल संपर्क अधिकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूरे हफ्ते (24X7) समन्वय के लिए भारत में रहेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक शिकायत अधिकारी नियुक्त करने की भी आवश्यकता होगी जो शिकायत निवारण तंत्र का कामकाज देखेगा। उसे प्राप्त शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई के विवरण के साथ सक्रिय रूप से हटाई गई सामग्रियों यानी कंटेंट के विवरण के साथ एक मासिक अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी।

नए आईटी नियम 2021 पर ताजा डेवलपमेंट

1. आईटी नियमों के खिलाफ वैधानिक प्रस्ताव

राज्यसभा में नए आईटी नियमों के खिलाफ एक वैधानिक प्रस्ताव पर चर्चा की उम्मीद है। एलजेडी सांसद एमवी श्रेयम्स कुमार की ओर से इस बारे में एक प्रस्ताव लाया गया है जिसमें केंद्र सरकार से इन नियमों को निरस्त करने की मांग की गई है। सांसद का दावा किया है कि ये नियम प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ हैं। ये कानून पारंपरिक मीडिया को भी प्रभावित करेंगे। उन्‍होंने कहा कि केंद्र का दावा है कि नियम सोशल मीडिया के लिए लाए गए हैं लेकिन इन कानूनों के तहत केंद्र का संयुक्त सचिव किसी वेबसाइट को ब्लॉक कर सकता है। यही वजह है कि देश के मीडिया हाउस इन नियमों को लेकर चिंतित हैं।

2. क्‍या केंद्र आईटी नियम का पालन न करने पर नए नोटिस भेज सकता है?

कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार नए आईटी नियमों का पालन नहीं करने पर कंपनियों को नए नोटिस भेजने की योजना बना रही है। केंद्र सरकार कंपनियों से जवाब मांगेगी कि उन्होंने इन आईटी नियमों का पालन क्यों नहीं किया। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी संसद के मानसून सत्र के समापन के बाद फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अधिकारियों और प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर सकते हैं।

3. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने नए आईटी नियमों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाले विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष लंबित मामलों की कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने केंद्र सरकार की उस याचिका को टैग कर कर दिया था जिसमें नए आईटी नियमों को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को विभिन्न उच्च न्यायालयों से शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।

विभिन्न उच्च न्यायालयों में दायर याचिकाओं की स्थिति

कर्नाटक हाईकोर्ट

एडवोकेट चारिता वी ने नए आईटी नियमों को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस याचिका में केंद्र सरकार को नए आईटी कानूनों के नियम 3 (1) (डी) और नियम-7 को असंवैधानिक घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इस याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

मद्रास हाईकोर्ट

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (Digital News Publishers Association, DNPA) ने नए आईटी कानूनों को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

दिल्‍ली हाईकोर्ट

यही नहीं देश की समाचार एजेंसी पीटीआई ने भी नए आईटी कानूनों को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। पीटीआई ने कहा है कि केंद्र अपनी गाइडलाइंस के माध्यम से डिजिटल समाचार मीडिया को विनियमित यानी रेगुलेट करने का प्रयास कर रहा है। पीटीआई के अलावा वकील उदय बेदी ने भी दिल्ली हाई कोर्ट में नए आईटी कानूनों को चुनौती दी है। उनका कहना है कि नए आईटी कानून सोशल मीडिया इंटरमीजियरी को प्राप्त शिकायतों के आधार पर सामग्री को हटाने के लिए व्यापक शक्तियां प्रदान करते हैं।

केरल हाईकोर्ट

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (News Broadcasters Association, NBA) ने केरल हाईकोर्ट में इन नए आईटी कानूनों को चुनौती दी है। इतना ही नहीं केरल उच्च न्यायालय ने इस मामले में न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन यानी एनबीए को अंतरिम राहत भी दी है। अदालत ने केंद्र सरकार को नए केबल टीवी नियमों के तहत उनके खिलाफ कोई प्रतिरोधी कार्रवाई (coercive action) नहीं करने का निर्देश दिया है।

संविधान के अधिकारों के उल्‍लंघन का आरोप

एनबीए की तरह ही 'लाइव लॉ' ने भी केरल उच्च न्यायालय में इन आईटी कानूनों को चुनौती दी है। लाइव लॉ ने दावा किया है कि नए आईटी कानून अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (ए) (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और 19 (1) (जी) (किसी भी पेशे की प्रैक्‍ट‍िस करने या कोरोबार, व्यवसाय या व्‍यापार करने की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करते हैं।

बॉम्‍बे हाईकोर्ट

वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने बॉम्बे हाईकोर्ट में नए आईटी नियमों के तहत जारी दिशानिर्देशों को चुनौती दी है। उन्‍होंने अपनी याचिका में इन गाइडलाइंस को मनमाना, अवैध और नेट तटस्थता के सिद्धांत के खिलाफ बताया है।

विवादों पर सरकार का यह रहा है जवाब

सरकार का कहना है कि ये आईटी कानून सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल करने वाले आम यूजर्स को मजबूती प्रदान करेगा। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की बढ़ती घटनाओं से संबंधित मुद्दों के कारण यह कानून जरूरी हो गया था। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन कानूनों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होती है। भारतीय संविधान के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी है। स्वतंत्र न्यायपालिका और एक मजबूत मीडिया भारत के लोकतांत्रिक ढांचे का हिस्सा हैं। नए आईटी नियम सोशल मीडिया के आम यूजर्स को मजबूत बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दुर्व्यवहार के शिकार लोगों के पास उनकी शिकायतों के निवारण के लिए एक मंच होगा। सरकार का यह भी कहना है कि विभिन्न हितधारकों के साथ उचित चर्चा के बाद इन आईटी नियमों को अंतिम रूप दिया गया है। 

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