आम्रपाली मामलाः सुप्रीम कोर्ट में आज पेश होंगे CMD अनिल शर्मा समेत दो निदेशक

नई दिल्ली, जेएनएन। हजारों निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट आम्रपाली ग्रुप पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है। आम्रपाली मामले में सोमवार को भी अहम सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अनिल शर्मा और दो निदेशकों शिव प्रिया और अजय कुमार को 19 नवंबर (सोमवार) को पेश होने का निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि कोर्ट अहम और बिल्डर को झटका देने वाला फैसला सुना सकता है।  

इससे पहले पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना के लिए सुप्रीम कोर्ट ने रियल इस्टेट कंपनी आम्रपाली समूह के खिलाफ कठोर रुख अख्तियार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के मल्टी स्पेशियालिटी अस्पताल, बैंक खातों, गोवा की बेनामी विला और उस इमारत को जब्त करने का आदेश दिया था, जिसमें इस कंपनी और कुछ अन्य फर्मों के कार्यालय हैं।

आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करने पर अपनाया कठोर रुख

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने कहा था कि आम्रपाली समूह ने जानबूझकर उसके पूर्व के आदेशों का पालन नहीं किया और घर खरीददारों के पैसों को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में स्थानांतरित करके 'बड़ी धोखाधड़ी' की है।

पीठ ने कंपनी के ग्रेटर नोएडा स्थित 100 बिस्तरों वाले मल्टी स्पेशियालिटी अस्पताल को जब्त करने का आदेश दिया था। इसमें अल्ट्रा होम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के पैसों का उपयोग किया गया। इसके अलावा गौरीसुता इंफ्रास्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड व इसके निदेशक सुनील कुमार के बैंक खातों और उनकी संपत्तियों को भी जब्त करने का आदेश दिया था।

कोर्ट के आदेशों के तहत उन टावरों को भी जब्त किया जाएगा, जिनमें कंपनी के कार्यालय स्थित हैं। साथ ही गोवा स्थित एक्वा फोर्टिस विला भी जब्त की जाएगी। किसी ने भी इस विला के स्वामित्व का दावा नहीं किया है। आम्रपाली समूह पर कंपनी के कोष से खरीदी गईं 86 लक्जरी कारों और एसयूवी को किसी तीसरे पक्ष को बेचने पर भी रोक लगा दी गई है।

कंपनियों से अलग होने पर रोक

शीर्ष अदालत ने कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी चंदर वाधवा को तीन हफ्ते के भीतर 11.69 करोड़ रुपये कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराने का आदेश दिया है। साथ ही ऑडिटर अनिल मित्तल को 47 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है। अदालत ने आम्रपाली पर उन कंपनियों से अलग होने पर भी रोक लगा दी है जिनके साथ उसने लेनदेन किया था। साथ ही इन कंपनियों को अटैच करने का भी आदेश दिया है।

सहायक कंपनियों में स्थानांतरित किए 2000 करोड़

शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त फोरेंसिक ऑडिटर्स पवन कुमार अग्रवाल और रवि भाटिया ने बताया कि आम्रपाली सफायर प्रोजेक्ट से घर खरीददारों के 442 करोड़ रुपये 15 कंपनियों और नौ व्यक्तियों को एडवांस के नाम पर दिए गए। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि आम्रपाली इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड मुख्य कंपनी है और उसने करीब 2,000 करोड़ रुपये अपनी सहायक कंपनियों में स्थानांतरित किए।

आइटी रिटर्न दाखिल करने के लिए मिले 500 करोड़

रवि भाटिया ने पीठ को बताया कि स्टनिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने तो बेहद अद्भुत काम किया। इस कंपनी ने कंपनियों, उसके निदेशकों और कुछ अन्य व्यक्तियों के आयकर (आइटी) रिटर्न दाखिल किए और इसके एवज में उसे 500 करोड़ प्राप्त हुए। इस पर अदालत ने फोरेंसिक ऑडिटर्स से कहा कि वे परियोजनाओं में आम्रपाली के निवेश और फर्जी घर खरीददारों का पता लगाएं। संभव है कि संपत्तियां बेनामी लोगों को बेची गई हों ताकि कंपनी का मूल्य बढ़ाया जा सके।

खातों से रकम निकाल रहे थे प्रमोटर

फोरेंसिक ऑडिटर्स ने बताया कि आम्रपाली ने 2010 से कई कंपनियां बनाई ताकि कंपनी अधिनियम के प्रावधानों को धता-बताकर कर एक परियोजना से दूसरी परियोजना में धन स्थानांतरित किया जा सके। पवन कुमार अग्रवाल ने बताया कि आम्रपाली समूह ने 27 अन्य डमी कंपनियों के साथ लेनदेन किया और पिछले साल से आम्रपाली के प्रमोटरों ने इन कंपनियों के बैंक खातों से धनराशि निकालनी शुरू कर दी थी। 

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