India China 1962 War: 58 साल पहले धोखे से चीन ने किया था देश की उत्तरी सीमा पर हमला

India China 1962 War: 58 साल पहले धोखे से चीन ने किया था देश की उत्तरी सीमा पर हमला
Publish Date:Fri, 18 Sep 2020 04:34 PM (IST) Author: JP Yadav

गुरुग्राम [आदित्य राज]।  India China Standoff:  देश की उत्तरी सीमा पर 19 सितंबर 1962 को चीन ने हमला किया था। उस समय कहीं से भी यह नहीं लग रहा था कि चीन हमला कर सकता है। दोनों तरफ से दोस्ती की बात चल रही थी। तभी से चीन भरोसा करने लायक देश नहीं रहा। वह अपने फायदे के लिए कभी भी कुछ भी कर सकता है। ऐसी स्थिति में चीन को लेकर हमेशा सतर्क रहने की आवश्यकता है। हालांकि 1962 एवं 2020 में जमीन-आसमान का अंतर है। यदि अंतर नहीं होता तो चीन युद्ध के लिए इतना सोच विचार नहीं करता।

चीन से 1962 में युद्ध के दौरान भारतीय सेना में नायक के पद पर तैनात रहे कर्नल (रिटा.) भरत सिंह का मानना है कि सही मायने में 1962 में युद्ध हुआ ही नहीं था। युद्ध उसे कहते हैं कि जब दोनों सेना आमने-सामने हो। दोनों तरफ से युद्ध की तैयारी हो। भारतीय सेना युद्ध के लिए तैयार ही नहीं थी। अचानक चीन की सेना सामने आ गई। उसे युद्ध कैसे कह सकते हैं। इसके बाद भी भारतीय सेना ने कई मोर्चों पर मुंहतोड़ जवाब दिया था। अब 1962 का भारत नहीं है। 2020 का भारत है। प्रधानमंत्री के पद पर नरेंद्र मोदी जैसा व्यक्ति बैठा है। चीन की किसी भी चाल का जवाब देने वाला नेतृत्व आज भारत के पास है।

हिमालय के क्षेत्रों पर आधिपत्य चाहता है चीन

कर्नल (रिटा.) भरत सिंह कहते हैं कि चीन की मंशा भारत से सटे हिमालय के क्षेत्रों पर आधिपत्य स्थापित करने की है। इस वजह से ही उसने 1962 में हमला किया था। चीन ने चालाकी यह की थी कि जहां पर भारतीय फौज मोर्चे पर थी, वहां पर हमला नहीं किया था बल्कि उन्हें बाइपास किया था। इस वजह से भारतीय सेना का आपस में ही कई इलाकों में संपर्क टूट गया था। दरअसल, उस समय न ही सीमाओं तक पहुंचने के लिए सड़कें थीं, न ही संचार का बेहतर माध्यम था। आज सभी सीमाओं तक न केवल सड़कें हैं बल्कि संचार की बेहतर व्यवस्था है। सेना अत्याधुनिक हथियारों से लैस है। युद्ध होने पर चीन को मुंह खानी पड़ेगी।

दुनिया की बड़ी ताकत बन चुका है भारत

चीन से युद्ध के दौरान हवलदार रहे बिशन दत्त वशिष्ठ कहते हैं कि अब भारत दुनिया की बड़ी ताकत बन चुका है। आज देश के भीतर हर स्तर पर चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की क्षमता है। इस समय भारतीय सेना हर स्तर पर तैयार है। सेना का मनोबल सातवें आसमान पर है। यही नहीं भारतीय सेना के भीतर पहाड़ों की ऊंचाई पर भी युद्ध करने का जबर्दस्त अनुभव है। कारगिल की लड़ाई इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। यही वजह है कि चीन फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।

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