वायु प्रदूषण के मामले में यूपी सरकार ने उठाया चीनी मिलों का मुद्दा तो सुप्रीम कोर्ट ने पूछ दिया यह सवाल

दिल्‍ली एनसीआर में प्रदूषण के मसले पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एनसीआर में स्थित चीनी मिलों का मामला उठाया। सरकार का कहना है कि अगर क्लीन फ्यूल से नहीं चलने वाले उद्योगों को सिर्फ आठ घंटे चलने की इजाजत होगी तो चीनी मिलें कैसे चलेंगी।

Krishna Bihari SinghFri, 03 Dec 2021 09:30 PM (IST)
प्रदूषण के मसले पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एनसीआर में स्थित चीनी मिलों का मामला उठाया।

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। क्लीन फ्यूल से नहीं चलने वाले एनसीआर के उद्योगों को सोमवार से शुक्रवार तक सिर्फ आठ घंटे चलने की इजाजत और शनिवार-रविवार को बंद रखने के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एनसीआर में स्थित चीनी मिलों का मामला उठाया। मालूम हो कि दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता में और गिरावट को रोकने के लिए नए दिशानिर्देशों के तहत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने शुक्रवार को एनसीआर में शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का आदेश जारी किया।

चीनी मिलों का चल रहा सीजन

प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि अभी गन्ना पिराई और चीनी मिलों का सीजन चल रहा है। अगर क्लीन फ्यूल से नहीं चलने वाले उद्योगों को सिर्फ आठ घंटे चलने की इजाजत होगी तो चीनी मिलें कैसे चलेंगी। इन्हें लगातार चलाना पड़ता है। मिलों में बायलर ही 48 घंटे में गर्म होता है। ऐसे तो चीनी मिलें बंद हो जाएंगी। चीनी मिलें बंद होने से गन्ना किसानों को नुकसान होगा।

बताइए कितनी चीनी मिलें हैं..?

रंजीत कुमार की दलीलों पर पीठ ने पूछा कि एनसीआर में कितनी चीनी मिलें हैं। रंजीत कुमार ने कहा कि सही गिनती उन्हें नहीं मालूम, लेकिन गजरौला की चीनी मिल एनसीआर में आती है, इसके अलावा मेरठ, बागपत आदि भी एनसीआर में हैं। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से कहा कि वह इस बात को आयोग के समक्ष रखे और आयोग कानून के मुताबिक उस पर विचार करेगा।

...तो क्या पाकिस्तान में उद्योगों को प्रतिबंधित कर दिया जाए

अपनी दलीलों के दौरान रंजीत कुमार ने कहा कि इन दिनों उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में प्रदूषित हवाएं पाकिस्तान से आ रही हैं क्योंकि राज्य हवा की दिशा में नीचे की तरफ है। इस पर पीठ ने उनसे कहा, 'इसलिए आप चाहते हैं कि पाकिस्तान में उद्योगों को प्रतिबंधित कर दिया जाए।'

दिल्ली सरकार को सात कोरोना अस्पतालों के निर्माण की मिली इजाजत

दिल्ली सरकार ने कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आशंका में पहले से तैयारी करने की बात कही और सुप्रीम कोर्ट से सात अस्पतालों का निर्माण या विस्तार करने की इजाजत मांगी। कोर्ट ने नियमों का पालन करने की शर्त पर सातों कोरोना अस्पतालों के निर्माण की इजाजत दे दी। ये अस्पताल शालीमार बाग, किरारी, सुल्तानपुरी, रघुबीर नगर, सरिता विहार, जीटीबी और चाचा नेहरू अस्पताल हैं। इनके अलावा 19 और अस्पतालों में भी विस्तार और निर्माण का काम चल रहा है। मालूम हो कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की खराब स्थिति को देखते हुए आयोग और सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी तरह की निर्माण गतिविधि पर रोक लगा लगी है, सिर्फ कुछ श्रेणियों के निर्माण की ही इजाजत है। 

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