नौसेना प्रमुख का चीन पर निशाना, एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा- कुछ देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चाहते हैं वर्चस्व

नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना मित्र देशों को एक सुरक्षा भागीदार के रूप में उभरने में मदद कर रही है और क्षेत्र में चुनौतियों का सामना करने में मदद के लिए ठोस समाधानों पर भी काम कर रही है।

Krishna Bihari SinghWed, 27 Oct 2021 11:02 PM (IST)
करमबीर सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना मित्र देशों को भागीदार के रूप में उभरने में मदद कर रही है।

नई दिल्ली, पीटीआइ। नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना मित्र देशों को एक सुरक्षा भागीदार के रूप में उभरने में मदद कर रही है। साथ ही समुद्री क्षेत्र में चुनौतियों का सामना करने में मदद के लिए ठोस समाधानों पर भी काम कर रही है। चीन का नाम लिए बिना कहा कि कुछ देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना वर्चस्व और नियंत्रण चाहते हैं। एक तरह से वे वैश्विक नियमों के लिए चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।

नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा कि इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव जमाने के लिए दिन-प्रतिदिन प्रतिस्पर्धा देखने को मिली रही है। बुधवार को वह एक संगोष्ठी में बोल रहे थे। करमबीर सिंह ने कहा कि हमारी नौसेना का प्रयास आम चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक रूप से दक्षताओं का इस्तेमाल करने में मदद करना है। इसमें एक सहभागी, समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हमारी प्राथमिकता रही है।

उन्‍होंने कहा कि दूसरा तत्व बाहर की ओर देखना और अपने जुड़ाव में महत्वाकांक्षी होना है, जबकि तीसरा तत्व विश्वास विकसित करने के लिए भागीदार देशों के साथ जुड़ना है। हिंद महासागर क्षेत्र में द्वीप राष्ट्र हैं, उनकी अर्थव्यवस्था पर्यटन पर आधारित है। उनकी समस्याएं नशीले पदार्थो और मानव तस्करी को लेकर हैं। इसलिए, हम इन समस्याओं के समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं।

नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने चेताया कि इस क्षेत्र में कोई भी प्रतिस्पर्धा अन्य सभी देशों को प्रभावित करेगी, न कि केवल दावेदारों को। इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्होंने समान विचारधारा वाले देशों द्वारा व्यापक दृष्टिकोण अपनाए जाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि कुछ देश वैश्विक वाणिज्य के मूल विचार में भूमि केंद्रित क्षेत्रीय मानसिकता को लागू कर रहे हैं। वे अपना वर्चस्व और नियंत्रण प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। एक तरह से वे अंतरराष्ट्रीय नियमों के समक्ष चुनौतियां पेश कर रहे हैं। गौरतलब है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते विस्तारवादी रवैये पर वैश्विक चिंता बढ़ रही है। कई देश इस चुनौती से निपटने के लिए रणनीति बनाने पर मजबूर हो गए हैं। 

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