National Nutrition Month 2020: पारंपरिक व्यंजनों से मिलेगा पर्याप्त पोषण और बनें रहेंगे सेहतमंद

जिमीकंद का पारंपरिक स्वाद के साथ पालक की दाल की सब्जी।
Publish Date:Sun, 27 Sep 2020 07:30 AM (IST) Author: Sanjay Pokhriyal

कीर्ति सिंह। स्वस्थ रहने के लिए मंहगे खाद्य पदार्थों की जरूरत नहीं होती, बल्कि मौसम के मुताबिक उपलब्ध अनाजों, सब्जियों और मसालों से तैयार स्वादिष्ट व्यंजनों का सेवन भी बहुत लाभ देता है। हमारे पारंपरिक व्यंजन न सिर्फ स्वाद में लाजवाब हैं, बल्कि इनके लाभ भी हैं चमत्कारी। सितंबर को पोषण माह के रूप में मनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आग्रह के पीछे भी यही विचार है कि हम अपने पारंपरिक व्यंजनों के सेवन से बनें सेहतमंद। अपनी मां और दादी-नानी की रेसिपी साझा करने के साथ ही सरकार के इस पोषण अभियान का हिस्सा बनी हैं लोक गायिका मालिनी अवस्थी, शेफ रणवीर बरार, रेसलर बबिता फोगाट जैसी हस्तियां...

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने खासतौर पर अपने ट्विटर हैंडिल पर नागालैंड राज्य के दीमापुर शहर की 13 वर्षीया अयीम इमचिन और लोक गायिका मालिनी अवस्थी द्वारा साझा रेसिपी के वीडियों को रीट्वीट करते हुए लिखा कि सादगी से तैयार पारंपरिक भारतीय भोजन कितने गुणकारी हैं, इसकी झलक मात्र हैं ये व्यंजन।

अयीम इमचिन

सरसों की पत्तियों और अदरख के साथ जिमीकंद पकाने का यह पारंपरिक तरीका है। मेरी दादी ने यह अपनी मां से सीखा। इस प्रकार यह पीढ़ियों की विरासत है। मैंने अपनी दादी से इसे सीखा।

जिमीकंद का पारंपरिक स्वाद

सामग्री: जिमीकंद, नमक, सरसों की पत्तियां, टमाटर, हरी मिर्च, अदरख।

विधि: एक बर्तन में नमक और पानी के साथ जिमीकंद को नरम होने तक पकाएं। पानी की मात्रा इस बात पर निर्भर करेगी कि आपको वह कितना रसीला पसंद है। जब जिमीकंद पक जाए तो उसमें हरी मिर्च और सरसों की पत्तियां डालकर उबाल आने दें। दो-तीन मिनट कर पकाने के बाद कटे हुए टमाटर, अदरख और अदरख की पत्तियां मिलाएं। बर्तन को ढंककर जिमीकंद और सभी सामग्री को दो मिनट पकाएं। पारंपरिक विधि से तैयार स्वाद और सेहत से भरपूर जिमीकंद का व्यंजन तैयार है। इसे चावल के साथ खा सकते हैं।

मालिनी अवस्थी, लोक गायिका

सगपैथा बनाने में विभिन्न प्रकार के साग और मूंग, चना या उड़द किसी भी दाल का प्रयोग किया जा सकता है। अगर मूंग की दाल के साथ इसे बनाएं तो छिलके वाली दाल ही इस्तेमाल करें, क्योंकि यह छिलका फाइबर का स्रोत है और कोलेस्ट्राल कम करता है। यह हृदय रोग और डायबिटीज में भी फायदेमंद है।

सगपैथा

सामग्री: 250 ग्राम मूंग की दाल, 500 ग्राम पालक, दो टेबलस्पून बेसन, हींग, इमली या अमचूर पाउडर, 6-7 कली लहसुन, लौंग, अदरख, हरी धनिया, हरी मिर्च, नमक स्वादानुसार।

विधि: प्रेशर कुकर में बारीक कटी पालक, दाल, हल्दी और मिर्च डालकर पकाएं। फिर इसमें दो टेबलस्पून बेसन पानी में घोलकर मिलाएं और कुछ देर पकने दें। स्वाद के लिए इमली या अमचूर मिलाएं। फिर हींग, लहसुन, अदरख की छौंक लगाएं। हरी धनिया से सजाकर इसे परोसें। प्रोटीन, आयरन के गुणों के साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले मसाले जैसे लौंग, लहसुन इत्यादि भी सगपैथा को खास बनाते हैं

रणवीर बरार, शेफ

लौकी बेहद पौष्टिक होती है। इसके साथ दूध का कांबिनेशन जबरदस्त स्वाद देता है। यहां एक बात हमेशा याद रखना चाहिए कि जिन व्यंजनों में दूध का इस्तेमाल किया जाता है उनमें नमक सबसे अंत में मिलाना चाहिए

दूध वाली लौकी

सामग्री: लौकी, घी, सौंफ, जीरा, हल्दी, हरी मिर्च, धनिया पाउडर, दूध, नमक और सजावट के लिए हरी धनिया।

विधि: कड़ाही को आंच पर चढ़ाएं। इसमें घी डालें। जब यह गर्म हो जाए तो इसमें सौंफ और जीरा डालकर तड़कने दें। कटा प्याज और हरी मिर्च डालकर सुनहरा होने तक भूनें। अब हल्दी, धनिया डालकर कुछ देर भूनें। जब मसाले पक जाएं तो लौकी के टुकड़े डालकर पकाएं। जब लौकी पक जाए तो इसमें दूध मिलाएं और कुछ देर पकाएं। सबसे अंत में नमक मिलाएं और आंच से उतार लें। दूध वाली लौकी को हरी धनिया से सजाकर परोसें।बबिता फोगाट, रेस्लर

प्रोटीन और आयरन से भरपूर यह पारंपरिक व्यंजन मांसपेशियों को मजबूत बनाने और हीमोग्लोबिन का स्तर बेहतर बनाने के लिहाज से बेहद लाभकारी है।

दाल पालक

सामग्री: मिक्स दाल, पालक, घी, जीरा, प्याज, अदरख, लहसुन, हरी मिर्च, टमाटर, हल्दी, धनिया पाउडर, काला नमक, काली मिर्च पाउडर।

विधि: एक कड़ाही को आंच पर चढ़ाएं। इसमें घी डालें। जब घी गर्म हो जाए तो इसमें जीरा डालकर तड़कने दें। फिर अदरख, लहसुन डालकर भूनें। इसके बाद प्याज मिलाकर सुनहरा होने तक भूनें। इसमें हरी मिर्च, टमाटर, हल्दी, धनिया पाउडर और काला नमक डालें। थोड़ी सा कालीमिर्च पाउडर मिलाएं। फिर पालक डालकर इसे तब तक पकाएं जब तक कि वह घी न छोड़ने लगे। फिर इसमें पहले से उबाली हुई दाल मिलाएं और कुछ देर तक पकाएं। स्वाद और सेहत से भरपूर यह दाल पालक गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।

सुवीर सरन, मिशलेन स्टार शेफ

बिहार में अधिकांश घरों में अक्सर रविवार को या शाम के नाश्ते में बनने वाला चना चूरा सेहत और स्वाद से भरपूर होता है। इसमें फाइबर, विटामिन बी, सी, और प्रोटीन सहित अनेक पोषक तत्व होते हैं।

चना चूरा

सामग्री: 250 ग्राम काला चना रातभर भिगोया हुआ, तेल, हरी मिर्च, जीरा, साबुत लाल मिर्च, देगी मिर्च पाउडर, हल्दी, गरम मसाला, धनिया पाउडर, तेज पत्ता, छोटी इलायची, कालीमिर्च, लौंग, दरदरी लाल मिर्च, लहसुन, अदरख, प्याज, टमाटर।

विधि: प्रेशर कुकर को आंच पर चढ़ाएं। इसमें तीन-चार चम्मच तेल डालें, जब यह गर्म हो जाए तो इसमें तीन साबुत लाल मिर्च, तीन छोटी इलायची, तेज पत्ता, जीरा डालकर भूनें। इसमें प्याज डालकर तब तक भूनें जब तक यह सुनहरा भूरा न हो जाए। फिर इसमें चना, जीरा पाउडर, हल्दी, गरम मसाला, धनिया पाउडर, दरदरी लाल मिर्च, देगी मिर्च पाउडर डालकर अच्छे से भूनें ताकि सारे मसाले चने में लिपट जाएं। फिर इसमें तीन लौंग, चार-छह साबुत कालीमिर्च, दो हरी मिर्च बीच से कटी, तीन टमाटर कटे हुए, पांच कली लहसुन बारीक कटी, कटी अदरख मिलाएं और थोड़ी देर तक भूनें। फिर पानी और स्वादानुसार नमक डालकर थोड़ी देर खुला पकने दें, जब उबाल आने लगे तब प्रेशर कुकर का ढक्कन लगाकर मध्यम आंच पर दो-तीन सीटी आने तक पकाएं। दूसरी ओर एक कड़ाही आंच पर चढ़ाएं और इसमें घी डालकर पोहा या चूरा भून लें। चूरा प्लेट में निकाल लें और दूसरी प्लेट में चना निकालकर नींबू और प्याज से सजाकर गर्मागर्म परोसें।

सहजन है सेहत का राज

स्वस्थ भारत अभियान के एक साल पूरा होने पर एक संवाद कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने स्वास्थ्य का राज साझा किया। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य के लिहाज से सहजन बेहद फायदेमंद है। इसे अंग्रेजी में ड्रमस्टिक और र्मोंरगा भी कहते हैं। वह हफ्ते में एक-दो बार र्मोंरगा के पराठे स्वयं बनाकर खाते हैं। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ मांसपेशियों और हड्डियों की सेहत के लिए सहजन की फलियों और इसकी पत्तियों के सेवन की सलाह देते हैं।

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