Migrants Workers: घर लौटना है, भले ही ऑटो से सैकड़ों किमी का सफर करना पड़े

लंबे लॉकडाउन की सुगबुगाहट के बीच प्रवासी श्रमिकों का मध्य प्रदेश के रास्ते उत्तर प्रदेश और बिहार लौटना जारी है।

ऑटो से जा रहे चार लोगों में से एक रिजवान भाई ने बताया कि हमारे साथ और चार ऑटो हैं। इनमें महिलाएं व छोटे बच्चे भी हैं। सफर महंगा और परेशानी भरा है। न तो बसों में ठीक से जगह मिल पा रही है न ट्रेनों में।

Arun Kumar SinghTue, 13 Apr 2021 07:28 PM (IST)

इंदौर, राज्य ब्यूरो। महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण बेकाबू है। लंबे लॉकडाउन की सुगबुगाहट के बीच प्रवासी श्रमिकों का मध्य प्रदेश के रास्ते उत्तर प्रदेश और बिहार लौटना जारी है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच बसों की आवाजाही पर रोक है। ट्रेनों में पैर रखने की भी जगह नहीं है इसलिए प्रवासी श्रमिकों द्वारा महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश या फिर गुजरात होते हुए मध्य प्रदेश और फिर आगे का सफर द्वारा किया जा रहा है। महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश में छोटे वाहनों से प्रवासी श्रमिकों का आना जारी है। सबके चेहरे पर एक ही जिद दिखती है कि घर जाना ही है तो ऑटो से भी परेशानी नहीं। मध्य प्रदेश से लगती महाराष्ट्र और गुजरात सीमा पर ऐसे ही नजारे दिख रहे हैं। इनमें परेशानी भी है, दर्द भी और घर लौटने के लिए अनूठी जिजीविषा भी।

बड़े शहरों में काम-धंधा ठप होने के बाद कैसे भी घर जाने की जद्दोजहद

महाराष्ट्र से लगती मध्य प्रदेश की सीमा पर है बड़वानी जिले का सेंधवा। मंगलवार सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच मुंबई-आगरा राजमार्ग पर लोडिंग वाहनों में भरे दिखाई दिए प्रवासी श्रमिक। भूखे-प्यासे, तकलीफ से बदहाल प्रवासी श्रमिकों की यात्रा के ये दृश्य पांच दिनों से दिखाई दे रहे हैं। मजबूरी का फायदा उठाकर जीप वाले श्रमिकों को जानवरों की तरह भरकर ला रहे हैं। मध्य प्रदेश में बस वाले भी दोगुना किराया वसूल रहे हैं। श्रमिकों ने कहा कि जब जानवरों की तरह भरे श्रमिकों से भरी जीप और लोडिंग वाहनों को छूट है तो यात्री बसों को क्यों छूट नहीं दे रहे? ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

भीड़ के बीच बैठे उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी नागेंद्र पुत्र राजकुमार ने बताया कि पुणे में हम्माली का काम करते थे। काम बंद हो गया इसलिए घर जा रहे हैं। मिर्जापुर निवासी सिद्धनाथ पुणे से काम बंद होने के बाद लौट रहे हैं। ऑटो से उप्र के उन्नाव जाते राजेश वर्मा और धर्मेद्र कुमार वर्मा ने बताया कि 15 दिन के प्रयास के बाद भी ट्रेन का टिकट नहीं मिला तो ऑटो से ही मुंबई से उन्नाव स्थित घर के लिए निकल पड़े।

गुजरात से लगे मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले की पिटोल सीमा पर भी यही हाल है। सोमवार को ऑटो से सफर कर रहे मोहम्मद अनीश खान ने बताया कि कम ट्रेनों के चलने से आरक्षण नहीं हो पा रहा है, इसलिए वे ऑटो से मुंबई से सूरत आए, वहां से 1400 किमी दूर स्थित घर उत्तर प्रदेश के इनायतपुर (कन्नौज) जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 50 घंटे ही सही, पर घर तो पहुंच जाएंगे।

महंगा व तकलीफदेह सफर, पर क्या करें?

ऑटो से जा रहे चार लोगों में से एक रिजवान भाई ने बताया कि हमारे साथ और चार ऑटो हैं। इनमें महिलाएं व छोटे बच्चे भी हैं। सफर महंगा और परेशानी भरा है। न तो बसों में ठीक से जगह मिल पा रही है न ट्रेनों में।

ट्रेनों से भीड़, पैदल भी सीमा पार कर रहे

मुंबई, पुणे व महाराष्ट्र के अन्य शहरों से श्रमिक ट्रेनों से वापसी कर रहे हैं। मंगलवार को भी बुरहानपुर, खंडवा पहुंचीं ट्रेनों में श्रमिकों की भीड़ रही। वहीं महाराष्ट्र सीमा से पैदल बुरहानपुर पहुंचने का सिलसिला भी जारी है।

गजब की हिम्मत : पैदल चलकर खरगोन लौटा आदिवासी परिवार

खरगोन जिले के चैनपुर की 60 वर्षीय संतुबाई और परिवार के पांच सदस्य करीब चार दिन में शिऊर बंगला (औरंगाबाद) से 380 किमी पैदल चलकर गांव पहुंचे। उनके बेटे अखिलेश बारेला ने बताया कि लॉकडाउन की खबर सुनते ही हम सामान की पोटलियां सिर पर रखकर पैदल ही रवाना हो गए। सीमा पर रोका गया तो पहाड़ी रास्तों से होते हुए घर पहुंच गए।

 

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