कोरोना संकटकाल के दौरान तनाव भागने के लिए छात्रों को फिर मिलेगी मनोदर्पण की घुट्टी

स्कूल बंद होने और बोर्ड परीक्षाएं स्थगित होने से चिंतित छात्रों की मदद की मुहिम होगी तेज।

कोरोना संक्रमण के चलते स्कूली बच्चे फिर से घरों में कैद हो गए हैं। स्कूल बंद हो गए हैं। बोर्ड और जेईई मेंस जैसी परीक्षाएं स्थगित हो गई हैं। ऐसे में छात्रों के भीतर तनाव न पनपे शिक्षा मंत्रालय ने मनोदर्पण की मुहिम शुरू की।

Bhupendra SinghMon, 19 Apr 2021 09:46 PM (IST)

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण की नई लहर के साथ स्कूली बच्चे फिर से घरों में कैद हो गए हैं। स्कूल बंद हो गए हैं। बोर्ड और जेईई मेंस जैसी परीक्षाएं स्थगित हो गई हैं। ऐसे में छात्रों के भीतर इसको लेकर किसी तरह का तनाव न पनपने पाए, इसे लेकर फिलहाल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने मनोदर्पण की मुहिम को और तेज करने का फैसला लिया है। साथ ही छात्रों से जुड़े तनाव को भगाने को लेकर कुछ नई गतिविधियां भी शुरू की हैं।

शिक्षा मंत्रालय के कदम को यूनेस्को ने की सराहना 

वैसे तो यह स्कीम पिछले साल कोरोना संकटकाल के दौरान शुरू की गई थी, जिसके जरिये तनाव ग्रस्त छात्रों को मदद पहुंचाई गई। एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके जरिये पिछले साल 12,500 से ज्यादा छात्रों को काउंसलर और मनोचिकित्सकों की सेवाएं दी गई थीं। हालांकि इसके अलावा अब तक इस पोर्टल को 10 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। शिक्षा मंत्रालय की ओर से उठाए गए इस कदम की पिछले दिनों यूनेस्को भी सराहना कर चुका है।

क्या है मनोदर्पण योजना

शिक्षा मंत्रालय की मनोदर्पण स्कीम के तहत छात्रों और अभिभावकों को तनाव से बचाने के लिए काउंसलर की मदद मुहैया कराई जाती है। वहीं गंभीर रूप से तनाव ग्रस्त छात्रों को टेलीकांफ्रेंसिंग के जरिये मनोचिकित्सक भी मुहैया कराए जाते हैं। इस स्कीम का लाभ देशभर के किसी भी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र ले सकते हैं।

टोल फ्री सेवा भी शुरू

मंत्रालय ने छात्रों की मदद के लिए एक राष्ट्रीय टोल फ्री सेवा भी शुरू की है। इसका नंबर 8448440632 है। छात्र या अभिभावक इस नंबर पर फोन कर बच्चों से जुड़े तनाव को लेकर किसी भी तरह का परामर्श ले सकते हैं। मंत्रालय ने इसके साथ ही इस बार पोर्टल पर ही छात्रों को तनाव से बचने के कुछ तरीके भी बताए हंैं। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पिछले साल के अनुभवों के आधार पर स्कीम को और बेहतर किया गया है। 

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