हार्ट अटैक और दवाइयों के साइड इफेक्ट से मुक्ति दिलाएगा साधारण दिखने वाला ये पाउडर

संतोष शुक्ल, मेरठ। हार्ट की बीमारी से हर साल लाखों लोग जान गंवा देते हैं, जबकि इससे बचाव की दर्जनों औषधियां रसोई से लेकर बगिया व गमलों में उपलब्ध हैं। आयुर्वेद में अमृत कहलाने वाली शतावरी का एंटी आक्सीडेंट गुणधर्म हार्ट के लिए सुरक्षा कवच बनेगा। उत्तर प्रदेश के मेरठ में लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के शोध में शतावरी अंग्रेजी दवाओं की तुलना में हार्ट अटैक रोकने में ज्यादा कारगर साबित हुआ। इस अध्ययन को इंटरनेशनल मेडिकल जर्नल में भी छापा गया है। कई स्थानों पर क्लीनिकल ट्रायल भी शुरू कर दिया गया।

इस तरह किया शोध

मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. केके सक्सेना ने बताया कि शतावरी के हार्ट पर प्रभाव का पता लगाने के लिए 30 चूहों को छह ग्रुप में बांटकर शोध किया गया। एक ग्रुप में सिर्फ नमक का पानी दिया गया। अन्य ग्रुप में कैंसर की दवा डाक्सोरॉबिसिन दी गई, जिसने चूहों का हार्ट डैमेज कर दिया। इसके बाद 500 मिलीग्राम प्रति किलो व 250 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम वजन के अनुपात में चूहों को 21 दिनों तक शतावरी का चूर्ण दिया गया।

फिर शतावरी से हार्ट को किया ठीक

एक ग्रुप के चूहों को हार्ट की रिकवरी के लिए अंग्रेजी दवा दी गई। दोनों दवाओं की तुलना में शतावरी ने तेजी से हार्ट के ब्लाकेज और अटैक का इलाज किया। जुलाई 2019 में जारी शोध-पत्र को इंटरनेशनल जर्नल ऑफ बेसिक एंड क्लीनिकल फार्माकोलॉजी में छापा गया। शोधकर्ताओं डॉ. पिंकी व डॉ. मनीषा चैटर्जी की टीम ने कई वर्कशापों में शतावरी के हार्ट पर प्रभाव संबंधी अध्ययन को प्रस्तुत किया है।

इन वजहों से बढ़ती है दिल की बीमारियां

खानपान में गड़बड़ी, धूमपान, बीपी व कोलेस्ट्राल बढ़ने और रक्त आपूर्ति बिगड़ने से हार्ट पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इनसे हार्ट डैमेज हो सकता है। ज्यादा नमक सेवन, फास्टफूड, नींद की कमी, शारीरिक श्रम में कमी, एल्कोहल सेवन, प्रदूषित एवं रसायनयुक्त खानपान, सिंथेटिक मिठाइयों के सेवन से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा है।

शतावरी हार्ट अटैक रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण औषधि साबित हुई है। इसमें फैट, कैलोरी व कोलेस्ट्राल बेहद कम, जबकि एंटीआक्सीडेंट ज्यादा है। ये कैंसर की दवाओं से हार्ट पर पड़ने वाले विषाक्त प्रभावों को भी खत्म करती है। अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में शोध छपने के बाद कई कंपनियां क्लीनिकल ट्रायल करने जा रही हैं।

- डॉ. केके सक्सेना, विभागाध्यक्ष, फार्माकोलॉजी

विभाग, मेडिकल कॉलेज

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