कोरोना हो गया और आक्सीजन, बेड नहीं मिले तो क्या करेंगे, 62 हजार लोगों को मिल रहे ऐसे सवालों के जवाब

संकट के समय मानसिक रूप से मजबूत रखने के लिए 62 हजार लोगों की हुई काउंसिलिंग

हेल्पलाइन की खास बात यह है कि डाक्टर मनोविज्ञानी और मनोचिकित्सकों वाली 40 लोगों की टीम खुद लोगों को फोन कर उनका हौसला बढ़ा रही है। अप्रैल 2020 से अब तक लगभग 62 हजार लोगों की काउंसिलिंग कर उन्हें मानसिक संबल दे चुकी है।

Neel RajputThu, 22 Apr 2021 10:14 PM (IST)

भोपाल [अंजली राय]। कोरोना हो गया और अस्पताल में बेड नहीं मिला तो क्या करेंगे? रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिला तो कैसे बचेंगे? कोरोना का नया स्ट्रेन कितना घातक है? ये ऐसे सवाल हैं जो मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा चलाई जा रही प्रो-एक्टिव कालिंग हेल्पलाइन में ज्यादातर लोग पूछ रहे हैं। इनके आधार पर डाक्टरों ने अनुमान लगाया है कि इस बार लोग कोरोना संक्रमण से इतना नहीं घबरा रहे हैं, जितना इसके मरीजों के इलाज में हो रही अव्यवस्थाओं से परेशान हैं। कोरोना से डरें नहीं बल्कि मजबूती के साथ सामना करें, इसी उद्देश्य के साथ एनएचएम ने बेंगलुरु नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस के साथ मिलकर यह हेल्पलाइन शुरू की है।

हेल्पलाइन की खास बात यह है कि डाक्टर, मनोविज्ञानी और मनोचिकित्सकों वाली 40 लोगों की टीम खुद लोगों को फोन कर उनका हौसला बढ़ा रही है। अप्रैल 2020 से अब तक लगभग 62 हजार लोगों की काउंसिलिंग कर उन्हें मानसिक संबल दे चुकी है। इस हेल्पलाइन के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर हेल्पलाइन नंबर 08046110007 भी शुरू किया गया है। इस पर मानसिक व भावनात्मक परामर्श प्रदान किया जा रहा है।

पूछे जा रहे सवालों के जवाब

अस्पताल में बेड नहीं मिला तो क्या करेंगे?

- आप बीमारी को अपने ऊपर हावी न होने दें। घबराएं नहीं, धैर्य से काम लें। अगर हल्के लक्षण हों तो उसे अधिक भयभीत होकर बढ़ाएं नहीं। जैसा डाक्टर कहें, करते जाएं।

आक्सीजन नहीं मिली तो हमारा क्या होगा?

-डाक्टर की सलाह के अनुसार आक्सीजन लेवल जांच करते रहें। आक्सीजन लेवल कम हो तो बिना घबराए तत्काल डाक्टर को सूचित करें। घबराने से आक्सीजन की जरूरत और बढ़ जाएगी।

रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिला तो कैसे बचेंगे?

- हर मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत नहीं होती है। केवल डाक्टर की सलाह मानें।

कोरोना का नया स्ट्रेन कितना खतरनाक है?

-कोरोना का नया स्ट्रेन ज्यादा संक्रामक है। इससे संक्रमण ज्यादा जल्दी फैलता है, इसलिए सतर्क रहना ही एकमात्र उपाय है।

 मनोचिकित्सक डॉ. राहुल शर्मा ने कहा, इस बार लोगों को यह डर ज्यादा है कि अगर कोरोना हो गया तो आक्सीजन, इंजेक्शन या अस्पताल में बेड मिलेगा या नहीं। ऐसे लोगों की तीन से चार बार काउंसिलिंग की जा रही है। 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उप संचालक डा. शरद तिवारी ने कहा, कम लोगों को आक्सीजन, अस्पताल और रेमडेसिविर की आवश्यकता है लेकिन घबराहट और तनाव के कारण लोग इन आवश्यकताओं को कई गुना बढ़ा रहे हैं। इसका परिणाम यह होता है कि जिनके लिए यह जरूरी है, उन्हें यह उपलब्ध नहीं हो पाती, इसीलिए लोगों की काउंसिलिंग कर उन्हें जागरूक किया जा रहा है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.