एक्‍सपर्ट की जुबानी जानें आखिर क्‍या है भारत का सागर विजन और क्‍यों चर्चा में हैं विदेश मंत्री

भारत के सागर विजन के कई अहम मायने हैं

भारत के विदेश मंत्री की मालदीव यात्रा जहां सुर्खियों में है वहीं इसके बड़े खास मायने भी हैं। भारत एक बार फिर से अपनी सागर विजन योजना को नए आयाम दे रहा है। भारत ने सबसे पहले मालदीव को ही कोरोना वैक्‍सीन भेजी थी।

Kamal VermaFri, 26 Feb 2021 09:57 AM (IST)

विवेक ओझा। हिंद महासागर क्षेत्र में ब्लूवाटर नेवी फोर्स के रूप में दम-खम रखने की इच्छा रखने वाले और इसके लिए मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस को संस्थागत रूप देने का प्रयास करने वाले देश भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की मॉरीशस और मालदीव की हालिया यात्रा भारत के सागर विजन के पुन: दृढ़ अनुमोदन के चलते चर्चा में है। भारतीय विदेश मंत्री की इन दोनों देशों की यात्रा एक बार फिर भारत की हिंद महासागर में द्वीपीय कूटनीति और विस्तारित पड़ोसी (एक्सटेंडेड नेबरहुड) की नीति के औचित्य को स्पष्ट करती है। भारत चाहता है कि ऐसे देश उसे विशुद्ध रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा प्रदाता के रूप में देखें और ऐसा हो भी रहा है।  

भारत ने कोविड महामारी के दौरान हिंद महासागर के देशों के मन में उस विश्वास का बीजारोपण करने में प्रभावी बढ़त हासिल कर ली है जिसे चीन जैसे देश नैतिक रूप से हासिल कर पाने में कभी सक्षम नहीं होंगे। यह भारत की एक बड़ी उपलब्धि है। विदेश मंत्री की मालदीव और मॉरीशस यात्रा के दौरान भारत ने उन आवश्यकताओं को पूरा करने की कोशिश पर ध्यान दिया है जो इन दोनों को कुछ जरूरी आíथक, सामरिक और प्रतिरक्षा मामलों में सशक्त व समर्थ बनाए। भारत और मॉरीशस के बीच व्यापक आíथक सहयोग का समझौता किया गया जो इस बात का प्रतीक है कि भारत हिंद महासागर के इस देश के साथ अपने द्विपक्षीय आíथक संबंधों को नई ऊंचाई देने की इच्छा रखता है। ऐसे समझौते ही आगे कभी मुक्त व्यापार समझौते में तब्दील हो जाते हैं। भारत ने मॉरीशस के साथ 10 करोड़ डॉलर का एक -डिफेंस लाइन ऑफ क्रेडिट- समझौता भी किया है।

इस समझौते के तहत दोनों देश एक दूसरे को सíजकल उपकरणों, मेडिसिन और टेक्सटाइल उत्पादों आदि पर अपने अपने बाजारों तक पहुंच देंगे। इसके तहत मॉरीशस भारतीय बाजार तक 40 हजार टन चीनी के निर्यात के लिए पहुंच की सुविधा प्राप्त करेगा। इससे मॉरीशस को भारत से प्रतिरक्षा परिसंपत्तियों और उपकरणों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। हिंद प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समुद्री इकाई के रूप में उभर रहे मॉरीशस को ऐसी सुविधा प्राप्त करना औचित्यपूर्ण भी है। मॉरीशस की सुरक्षा भारत की सुरक्षा और मॉरीशस की संपन्नता भारत की संपन्नता है। भारत मॉरीशस को एक डोíनयर एयरक्राफ्ट और एक एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव प्राप्त करेगा जिससे उसकी सामुद्रिक सुरक्षा क्षमता में वृद्धि हो सकेगी।

हिंद महासागर में आत्मनिर्धारण के अधिकार पर बल : भारत और मॉरीशस ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चागोस द्वीप विवाद पर भी चर्चा की। इस विवाद को संयुक्त राष्ट्र एक द्विपीय संप्रभुता और सतत विकास के मुद्दे के रूप में देखता है। वर्ष 2019 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में चागोस द्वीप पर ब्रिटेन की बजाय मॉरीशस के स्वामित्व को मान्यता देने वाले प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था। भारत उन 116 देशों में शामिल था जिन्होंने यह मांग की थी कि ब्रिटेन मॉरीशस के इस द्वीप पर अपना उपनिवेशीय प्रशासन खत्म करे।

चूंकि भारत अपनी विदेश नीति के तहत तृतीय विश्व के देशों सहित हिंद महासागर के देशों के आत्मनिर्धारण के अधिकार को मान्यता देता है, अत: हाल के समय में उसने अपनी आइलैंड डिप्लोमेसी के तहत हिंद महासागर के द्विपीय देशों की सुरक्षा, संप्रभुता और विकास के मुद्दे को सर्वाधिक प्राथमिकता देते हुए काम किया है। भारत ने साफ किया है कि चागोस द्वीप के मामले पर वह मॉरीशस को समर्थन देना जारी रखेगा। मॉरीशस का कहना है कि चागोस द्वीप 18वीं सदी से ही उसका भाग रहा है और यह तब तक रहा जब तक ब्रिटेन ने अपने इस उपनिवेश से 1965 में चागोस को अपने नियंत्रण में नहीं ले लिया।

मालदीव यात्रा के मायने : भारत के विदेश मंत्री की मालदीव यात्रा के दौरान मालदीव में खेल अवसंरचना को मजबूती देने के लिए उसे भारत की तरफ से चार करोड़ डॉलर के लाइन ऑफ क्रेडिट देने की बात की गई है। इसके साथ ही भारत ने मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद की संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के लिए अध्यक्ष बनने की संभावना जाहिर करते हुए भारत के मजबूत समर्थन की बात की। गौरतलब है कि भारत के प्रस्ताव और प्रयासों से मालदीव इंडियन ओसियन रिम एसोसिएशन का नया सदस्य बन चुका है और कॉमनवेल्थ संगठन में पुन: सदस्यता ले चुका है।

भारत ने अपने -पड़ोसी प्रथम- की नीति के तहत क्षेत्रीय और वैश्विक फोरम में एक मजबूत मालदीव की उपस्थिति की नीति अपनाई है और बदले में मालदीव के वर्तमान नेतृत्व ने -इंडिया फ‌र्स्ट पॉलिसी- के तहत काम करना शुरू किया है। मालदीव और भारत के मध्य मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स कोस्ट गार्ड हार्बर को संयुक्त रूप से विकसित करने का समझौता हुआ है और यह एक ऐसे समय में होने के चलते महत्वपूर्ण है, जब हाल ही में श्रीलंका ने भारत और जापान से अपने हंबनटोटा बंदरगाह पर ईस्ट कंटेनर टíमनल को विकसित करने का अवसर वापस ले लिया है।

मालदीव पहला देश था जिसे जनवरी में भारत से कोविड वैक्सीन के एक लाख डोज उपहार में मिले। विदेश मंत्री की वर्तमान यात्रा में पुन: एक लाख अतिरिक्त डोज उपहार में दिया गया है। भारत के एक्जिम बैंक ने मालदीव को पांच करोड़ डॉलर का -लाइन ऑफ क्रेडिट- देने का समझौता किया है जिससे मालदीव की प्रतिरक्षा प्रणाली और परियोजनाओं को मजबूती दी जा सके। पूर्व में मालदीव को जो चार करोड़ का लाइन ऑफ क्रेडिट दिया गया था उसमें इस बार एक्जिम बैंक ने सड़क परियोजनाओं को भी शामिल किया है। इस प्रकार अब एक्जिम बैंक द्वारा भारत सरकार की तरफ से मालदीव को कुल चार लाइन ऑफ क्रेडिट के जरिये 129 करोड़ डॉलर ऋण की सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।

तटीय क्षेत्रों के लिए आवश्यक : हिंद महासागर में मालदीव के क्षेत्र में स्थित अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाज मार्ग मध्य पूर्व के तेल की आपूíत भारत, जापान और चीन को करते हैं। मात्रात्मक दृष्टि से भारत का 97 प्रतिशत से अधिक और मूल्यात्मक दृष्टि से 75 प्रतिशत से अधिक अंतरराष्ट्रीय व्यापार हिंद महासागर में बैठे मालदीव के अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शिपिंग लेंस के जरिये होता है। मालदीव भारत के लिए ब्लू इकोनॉमी अथवा सागरीय अर्थव्यवस्था के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अंडमान निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप के तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए भी यह जरूरी है।

हिंद महासागर में सागर विजन और सागर मिशन : मई, 2020 में भारत ने मिशन सागर लॉन्च किया था जिसका उद्देश्य हिंद महासागर के क्षेत्रों में अपनी मेडिकल डिप्लोमेसी की धार तेज करते हुए क्षेत्र के देशों को कोविड से जुड़ी सहायता प्रदान करना था। इस मिशन के भाग के रूप में आइएनएस केशरी ने मालदीव, मॉरीशस, मेडागास्कर, कोमोरॉस और सेशेल्स की यात्रा की थी और अपने एक्सटेंडेड नेबरहुड की धारणा के तहत इन समुद्री पड़ोसियों को कोविड महामारी से बचाने के लिए मदद दी गई।

आइएनएस केशरी ने 55 दिनों तक 7,500 नॉटिकल मील की यात्रा करते हुए भारत के सागर विजन को साकार करने के लिए -मिशन सागर- को आकार दिया।मॉरीशस और कोमोरोस द्वीप को तो भारत ने मानवतावादी सहायता के नाम पर आवश्यक खाद्य वस्तुओं, दवाइयों और आयुर्वेदिक औषधियों की आपूíत की थी और इन दोनों देशों में मेडिकल सहायता टीम भी भेजी थी। मिशन सागर भारत के प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 2014 में अपनाए गए सागर विजन का ही मूर्तमान स्वरूप है। सागर विजन का आशय है, हिंद महासागर क्षेत्र में सभी की सुरक्षा और संवृद्धि।

क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने का भारत का प्रयासवर्ष 2018 में सिंगापुर में शांगरी-ला संवाद में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडो पैसिफिक यानी हिंद प्रशांत की धारणा को स्पष्ट करते हुए बताया था कि इसमें हिंद महासागर से लेकर पश्चिमी प्रशांत महासागर तक का क्षेत्र शामिल है। इसमें भारतीय दृष्टिकोण से अफ्रीका, अमेरिका और जापान के क्षेत्र शामिल हैं। भारत की हिंद प्रशांत रणनीति इन सब भौगोलिक आयामों को शामिल करते हुए आसियान केंद्रीयता को भारतीय हिंद प्रशांत रणनीति का आधार स्तंभ मानती है। समावेशिता और खुलापन भारत की इस नीति के अनिवार्य अंग हैं।

हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारतीय हितों की रक्षा के लिए अब एक्ट ईस्ट पॉलिसी, एक्ट इंडो पैसिफिक पॉलिसी में बदलती नजर आ रही है। दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्वी एशिया और पूर्वी एशिया के देशों के साथ हुए इंडो पैसिफिक क्षेत्र में भारत अपने हितों के क्रम में चीन को प्रतिसंतुलित करने का प्रयास करता रहा है और इसके साथ ही अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को इंडो पैसिफिक की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बनाने में भारत काफी हद तक सफल भी रहा है। लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि फ्री एंड ओपेन इंडो पैसिफिक रणनीति को आज यूरोपीय देशों द्वारा मान्यता मिलने लगी है।

वर्ष 2018 में फ्रांस ने अपनी हिंद प्रशांत रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की थी, जबकि अमेरिका की इंडो पैसिफिक स्ट्रेटजी और क्वाड सुरक्षा समूह से अपने गठजोड़ के चलते भारत आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महासागरीय संप्रभुता की सुरक्षा को एक वैश्विक महत्व का मुद्दा बनाने में लगा है और इसका परिणाम यह मिला है कि जर्मनी ने हिंद प्रशांत क्षेत्र के लोकतांत्रिक देशों के साथ भागीदारी मजबूत करने के लिए नई हिंद प्रशांत नीति बनाई है जिसका समर्थन भारत, जापान और आसियान देशों ने कर दिया है। भारत ने सागरों और महासागरों की सुरक्षा को विश्व और क्षेत्रीय राजनीति में एक नया आयाम दिया है।

भारत ने हिंद महासागर और प्रशांत महासागर में नौ गमन की स्वतंत्रता, महत्वपूर्ण वाणिज्यिक समुद्री मार्गो से अबाधित आवाजाही को एक नया वैश्विक आंदोलन बना दिया है जिसमें उसे अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत आसियान, पूर्वी एशियाई और अफ्रीकी देशों का सहयोग मिला है। यही कारण है कि भारत ने वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक्ट ईस्ट पॉलिसी की शुरुआत की गई जिसका उद्देश्य एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना था। इस पॉलिसी में दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ सहयोग के अलावा एशिया प्रशांत के अन्य देशों के साथ सहयोग और समन्वय पर बल दिया गया।

इस नीति के एक अपरिहार्य हिस्से के रूप में भारत ने जापान की पहचान की और यही कारण है कि वर्ष 2015 में दोनों देशों ने -जापान भारत विजन 2025 विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी- की घोषणा की जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद प्रशांत क्षेत्र और विश्व में शांति और समृद्धि के लिए काम करना है। हाल ही में कनाडा ने भी जापान के साथ मिलकर मुक्त और स्वतंत्र हिंद प्रशांत क्षेत्र की आवश्यकता पर बल देते हुए अपनी हिंद प्रशांत नीति बनाने का संकेत दिया है। ब्रिटेन ने भी हिंद प्रशांत रणनीति में रुचि लेनी शुरू कर दी है। इस प्रकार चीन द्वारा वैश्विक विधियों के अतिक्रमण को रोकने के लिए यूरोप के कई देश लगातार हिंद प्रशांत के मुद्दे पर लामबंद हो रहे हैं।

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