जम्मू- कश्मीर : दिल्ली के प्रकाशक के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश, संवेदनशील कंटेंट छापने का है मामला

श्रीनगर जिला प्रशासन ने रविवार को सातवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान के किताब में कथित तौर पर संवेदनशील कंटेंट को लेकर पुलिस को दिल्ली के एक प्रकाशक और एक स्थानीय वितरक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

TaniskMon, 06 Dec 2021 04:39 AM (IST)
दिल्ली के प्रकाशक के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश।

श्रीनगर,एएनआइ। श्रीनगर जिला प्रशासन ने रविवार को सातवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान के किताब में कथित तौर पर संवेदनशील कंटेंट को लेकर पुलिस को दिल्ली के एक प्रकाशक और एक स्थानीय वितरक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। जिला प्रशासन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को 5 दिसंबर के पत्र में कहा गया है कि मुख्य शिक्षा कार्यालय, श्रीनगर ने इस कार्यालय को सूचित किया है कि दिल्ली स्थित एक पब्लिशिंग हाउस, जेई सीईई प्रकाशन (पी) लिमिटेड ने कक्षा 7 वीं के लिए एक सामाजिक अध्ययन पुस्तक प्रकाशित की है। इसमें कथित रूप से संवेदनशील कटेंट प्रकाशित है।

श्रीनगर स्थित पैराडाइज बुक शाप द्वारा वितरित किया जा रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए बुक शाप के साथ-साथ पब्लिशिंग हाउस के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया जाता है। जम्मू और कश्मीर बोर्ड आफ स्कूल एजुकेशन (JKBOSE) ने रविवार को कहा कि दिल्ली स्थित प्रकाशन द्वारा प्रकाशित सातवीं कक्षा के लिए 'इतिहास और नागरिक शास्त्र' के किताब (2020 संस्करण) ने लोगों की भावनाओं को आहत किया है। बोर्ड ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) या जेकेबीओएसई से संबद्ध सभी स्कूलों को तुरंत किताब वापस लेने का निर्देश दिया है।

जम्मू और कश्मीर बोर्ड आफ स्कूल एजुकेशन (जेकेबीओएसई) की अधिसूचना में कहा गया है कि  सीबीएसई, जेकेबीओएसई या देश के किसी अन्य बोर्ड से संबद्ध जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी स्कूलों को निर्देश दिया जाता है कि वे जेई सीईई पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड लिमिटेड, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित कक्षा 7वीं के लिए 'इतिहास और नागरिक शास्त्र' की 2020 संस्करण की पाठ्यपुस्तक का उपयोग न करें। यदि किसी स्कूल में पाठ्यपुस्तक का उपयोग किया जा रहा है, तो इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए, अन्यथा सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी। 

अधिसूचना में आगे कहा गया है कि लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कुछ कंटेंट के प्रकाशन की निंदा करते हुए प्रकाशक को निर्देश दिया जाता है कि वह इस पाठ्यपुस्तक को उन सभी स्कूलों से तुरंत वापस ले लें, जहां भी इसे वितरित किया गया है। पब्लिशिंग हाउस को अपनी गलती पर खेद है।

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