तलाशी राह: भारतीय वैज्ञानिकों ने किया दावा, 30 सेकेंड में कोरोना संक्रमण की सटीक जांच

तलाशी राह: भारतीय वैज्ञानिकों ने किया दावा, 30 सेकेंड में कोरोना संक्रमण की सटीक जांच

हैदराबाद की शोधकर्ता टीम में शामिल प्रमुख वैज्ञानिक ने दैनिक जागरण से कहा- लार का नमूना रखते ही यह मशीन कोरोना वायरस स्पाइक प्रोटीन एंटीजन की उपस्थिति का सटीक संकेत दे देती है।

Sanjay PokhriyalTue, 05 May 2020 08:59 AM (IST)

विनोद भारती, अलीगढ़। भारतीय वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण की त्वरित जांच करने वाली ई-कोव-सेंस नामक इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसिंग डिवाइस तैयार की है। दावा है कि लार का नमूना रखते ही यह मशीन 10 से 30 सेकेंड में सटीक परिणाम दे देती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी, हैदराबाद की शोधकर्ता टीम में शामिल प्रमुख वैज्ञानिक का दावा है कि लार का नमूना रखते ही यह मशीन कोरोना वायरस स्पाइक प्रोटीन एंटीजन की उपस्थिति का सटीक संकेत दे देती है। मशीन की स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है।

अलीगढ़, उप्र की मूल निवासी इंस्टीट्यूट की डी साइंटिस्‍ट डॉ. सोनू गांधी की मानें तो यह इलेक्ट्रोकेमिकल डिवाइस कोरोना वायरस के रैपिड डिटेक्शन के लिए है, जो जांच के दौरान एंटीजन-एंटीबॉडी के बीच होने वाली प्रतिक्रिया और फलस्वरूप उत्पन्न इलेक्ट्रिक चार्ज के प्रवाह पर आधारित है। हमने इसमें स्क्रीन प्रिंटेड कार्बन इलेक्ट्रोड पर कोविड-19 के एंटीबॉडी को स्थिर किया है।

सीधे शब्दों में कहें तो डिवाइस में एक इलेक्ट्रोड कोविड-19 के एंटीबॉडी के साथ लेपित है और जब संक्रमित व्यक्ति की लार का नमूना इस पर लगाया जाता है तो यह लार में मौजूद कोविड-19 स्पाइक प्रोटीन एंटीजन के साथ इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्शन करता है, जिससे क्षणिक विद्युत प्रवाह होता है। विद्युत चालकता में होने वाले इस परिवर्तन को यह मशीन माप लेती है। यदि लार में कोविड-19 स्पाइक प्रोटीन (एंटीजन) है तो ही यह प्रतिक्रिया होगी। तब तुरंत पता चल जाएगा कि व्यक्ति संक्रमित है।

डॉ. सोनू कहती हैं कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए यह आवश्यक है कि जांच अधिक मात्रा में हो ताकि जल्द से जल्द संक्रमण का पता चल सके। देर होने पर उपचार में कठिनाई आती है। अत: रैपिड टेस्ट डिवाइस इस समय बहुत आवश्यक है, जो वायरस की जल्द जांच कर सके। यह डिवाइस 10-30 सेकेंड में रिपोर्ट दे देती है। लैब टेस्टिंग में यह मानक पर खरी है। यह शोध प्रीप्रिंट पेपर में भी प्रकाशित हुआ है। 

अमेरिका में बनी रैपिड टेस्ट मशीन पांच मिनट का समय लेती है, जिसकी तुलना में यह काफी तेज है। सोनू ने वर्ष 2011 में चंडीगढ़ के सीएसआइआर-इमटेक से बायोसेंसर डेवपलमेंट में पीएचडी करने के बाद 2014 में इटली से पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप किया। फिर विजिटिंग साइंटिस्ट के रूप में अमेरिका चली गईं। जुलाई 2018 से हैदराबाद के एनआइएबी में कार्यरत हैं।

सेंट्रर फॉर रिसर्च इन इंटेग्रेटिव मेडिसन और एसके बायोथेरेप्युटिक्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक डॉ. अशोक कुमार ने कहा, मैंने प्रीप्रिंट पेपर के माध्यम से इस डिवाइस के बारे में पढ़ा। बहुत ही सफल खोज है। यदि सरकार से स्वीकृति मिल जाती है, तेजी से इसका उत्पादन होगा। पूरी दुनिया को इसकी आवश्यकता है।

यह इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसिग डिवाइस लार का नमूना रखते ही कोविड-19 स्पाइक प्रोटीन एंटीजन की उपस्थिति का सटीक संकेत दे देती है। इसमें 10 से 30 सेकेंड का समय लगता है। स्वीकृति पेंडिंग है।

- डॉ. सोनू गांधी, डी साइंटिस्‍ट, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी, हैदराबाद

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