वुहान लैब से कोरोना वायरस के लीक होने की संभावना ज्यादा, भारतीय विज्ञानी दंपती का दावा

कोरोना वायरस वुहान की लैब (Wuhan lab) से ही निकला है किसी मछली से बाजार नहीं जैसा कि चीन दुनिया को बताता है। यह दावा किया है एक भारतीय विज्ञानी दंपती ने जो वैश्विक समूह का हिस्सा हैं...

Krishna Bihari SinghSat, 05 Jun 2021 08:34 PM (IST)
कोरोना वायरस वुहान की लैब से ही निकला है, किसी मछली से बाजार नहीं...

पुणे, एएनआइ। कोरोना वायरस वुहान की लैब से ही निकला है, किसी मछली से बाजार नहीं, जैसा कि चीन दुनिया को बताता है। यह दावा किया है एक भारतीय विज्ञानी दंपती ने जो उस वैश्विक समूह का हिस्सा हैं जो कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर ठोस सुबूत जुटाने की कोशिशों में जुटा है। पुणे के रहने वाले विज्ञानी दंपती डा. राहुल बाहुलिकर और डा. मोनाली राहलकर ने कहा कि चीन की वुहान लैब से ही कोरोना वायरस से निकलने के पक्ष में दमदार सुबूत मिले हैं।

तब दलीलें कर दी गई थीं खारिज

इन दोनों ने पहले भी ऐसा ही दावा किया था लेकिन तब इनकी दलीलों को साजिश बताकर खारिज कर दिया गया था। अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने का आदेश दिया है तो एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है। अपने शोध के बारे में डा. राहलकर ने कहा कि वे यकीन से नहीं कह सकते कि वायरस लैब से लीक हुआ था, लेकिन इस संभावना के पक्ष में मजबूत सुबूत मिले हैं।

वुहान लैब ने यन्नाय की खदान से एकत्र किया वायरस

डा. राहलकर ने कहा कि हमने पिछले साल अप्रैल में अपना अनुसंधान शुरू किया था। हमने पाया कि वुहान इंस्टीट्यूट आफ वायरोलोजी (डब्ल्यूआइवी) ने सार्स-कोव-2 परिवार के कोरोना वायरस आरएटीजी12 को दक्षिण चीन के यन्नान प्रांत के मोजियांग स्थित एक माइनशाफ्ट (खदान तक जाने की सुरंग) से एकत्र किया था।

माइनशाफ्ट की सफाई करने वाले मजदूर हुए बीमार

उन्होंने कहा कि हमने यह भी खोजा कि उस माइनशाफ्ट को साफ करने के लिए छह मजदूरों को भेजा गया था, जहां चमगादड़ों का आतंक था। ये मजदूर न्यूमोनिया जैसी बीमारी से ग्रसित हो गए थे।

लैब में वायरस के जीनोम में बदलाव का संदेह

डा. राहलकर ने कहा कि वुहान में डब्ल्यूआइवी और अन्य लैब वायरस पर प्रयोग कर रही थीं और संदेह है कि उन्होंने कोरोना वायरस के जीनोम में कुछ बदलाव किए थे। यह हो सकता है कि इस प्रक्रिया के दौरान मौजूदा कोरोना वायरस की उत्पत्ति हुई हो।

सीकर नामक ट्विटर यूजर ने साधा संपर्क

डा. बाहुलिकर ने कहा कि प्रिंट से पहले उनका शोध अध्ययन प्रकाशित हुआ तो सीकर नामक ट्विटर यूजर ने उनसे संपर्क साधा, जो ड्रास्टिक नामक समूह का हिस्सा था। यह इंटरनेट पर जुड़े दुनिया भर के लोगों का समूह है जो कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर ठोस सबूत जुटाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

चमगादड़ से वायरस फैलने की संभावना नहीं

डा. बाहुलिकर की बातों को आगे बढ़ाते हुए डा. राहलकर ने कहा कि इसकी संभावना नहीं के बराबर है कि यन्नान प्रांत से कोरोना वायरस फैला, क्योंकि यन्नान में इसके मामले नहीं मिले थे। इस संभावना के पक्ष में भी कोई सुबूत नहीं हैं कि कोरोना वायरस पहले चमगादड़ से किसी इंसान में आया और उसके बाद मछली बाजार से चारों तरफ फैला। इसके अलावा वायरस की संरचना कुछ ऐसी है कि यह इंसानों को तुरंत संक्रमित करता है और यह इंगित करता है कि यह किसी लैब से आया होगा।

डब्ल्यूएचओ की जांच पर उठाए सवाल

इनका यह भी आरोप है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस के लैब से लीक होने की संभावना की जांच के लिए पर्याप्त शोध नहीं किए। उन्होंने कहा कि वह इस संभावना की जांच की मांग कर रहे हैं और इस संबंध में डब्ल्यूएचओ को तीन पत्र भी लिख चुके हैं।

वुहान लैब से वायरस के लीक के सुबूत मिले

वाशिंगटन, एएनआइ : चीन की विषाणु विज्ञानी डा. ली-मेंग यान ने कहा है कि उन्होंने शुरू में ही कहा था कि कोरोना वायरस चीन की वुहान स्थित लैब से निकला है। अब कोरोना महामारी पर अमेरिकी सरकार के सलाहकार एंथनी फासी के ईमेल से उनकी बात सच साबित हुई है। यान ने कहा कि फासी को भी पता था कि वायरस वुहान लैब से ही निकला है, लेकिन उन्होंने चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी और अपने फायदा के लिए चुप्पी साधे रखी।

पहले कहा था कि सुबूत नहीं 

फासी ने पहले कहा था कि कोरोना वायरस के लैब से लीक होने के वैज्ञानिक सुबूत नहीं हैं। मीडिया में फासी के कुछ ईमेल सामने आए हैं, जिसमें उनके और चीनी विज्ञानियों के बीच बातचीत हुई है। वायरस के लैब से लीक होने की संभावना को खारिज करने के लिए चीनी विज्ञानियों ने फासी का आभार जताया है।

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