दुश्‍मनों को मिलेगा करारा जवाब, आईएनएस कवरात्ती आज नौसेना के बेड़े में होगा शामिल, जानें इसकी खूबियां

सेना प्रमुख स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस कवराती को गुरुवार को नौसेना के बेड़े में शामिल करेंगे।
Publish Date:Wed, 21 Oct 2020 08:10 PM (IST) Author: Krishna Bihari Singh

नई दिल्‍ली, एजेंसियां। सेना प्रमुख (Indian Army Chief) जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ( General MM Naravane) बारूदी सुरंग रोधी प्रणाली से लैस स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस कवरात्ती (INS Kavaratti) को गुरुवार को नौसेना के बेड़े में शामिल करेंगे। यह बेहद खतरनाक युद्धपोत प्रोजेक्ट 28 के तहत निर्मित हुआ है। इसका निर्माण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम है... साथ ही देश की बढती नौसैन्‍य क्षमता का भी प्रतीक है। 

समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक, पोत को भारतीय नौसेना के संगठन डायरेक्टॉरेट ऑफ नेवल डीजाइन ने डिजाइन किया है। यही नहीं इसे कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने बनाया है। नौसेना अधिकारियों ने बताया कि आईएनएस कवरात्ती में अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है। इस युद्धपोत में ऐसे सेंसर लगे हैं जो पनडुब्बियों का पता लगाने और उनका पीछा करने में सक्षम हैं। 

प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक, इस युद्धपोत में इस्तेमाल की गई 90 फीसद चीजें स्वदेशी हैं। यह अत्‍याधुनिक सेंसर और हथियारों से लैस है। यह समुद्री सुरंगों का पता लगाने और उन्‍हें विफल करने में सक्षम है। आईएनएस कवराती के शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत को बढ़ावा मिलेगा। साल 2017 में तत्कालीन केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में चार स्वदेशी निर्मित एंटी-सबमरीन वारफेयर में से तीसरे आईएनएस किल्तान को कमीशन किया था।  

कोलकाता स्थित जीआरएसई ने प्रोजेक्ट 28 के तहत चार पनडुब्बी रोधी टोही युद्धपोत (एएसडब्ल्यूसी) की श्रृंखला में अंतिम युद्धपोत कवराती का निर्माण किया है। इससे पहले श्रृंखला के तीन युद्धपोतों की आपूर्ति की जा चुकी है जो भारतीय नौसेना के ईस्टर्न फ्लीट का हिस्सा हैं। प्रोजेक्ट 28 को 2003 में मंजूरी दी गयी थी। युद्धपोत कवरत्ती प्रोजेक्ट 28 के तहत निर्मित भारतीय नौसेना का एक पनडुब्बी रोधी जहाज है।

इस युद्धपोत का नाम केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप की राजधानी कवराती के नाम पर रखा गया है। इसके INS कवारत्ती का उत्तराधिकारी कहा जा रहा है। INS कवराती ने ऑपरेशन ट्राइडेंट में भी हिस्सा लिया था। इसको 1986 में डिकमीशन कर दिया गया था। यह परमाणु, जैविक और रासायनिक वातावरण में लड़ने में सक्षम है। यह देश का पहला युद्धपोत है जिसको कार्बन फाइबर कंपोजिट सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया है। इस पर 3300 टन की सामग्री ले जाई जा सकती है।  

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