द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूत करने में जुटे भारत व ब्रिटेन, ग्लासगो जाएंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महीने के अंत तक ब्रिटेन जाने की तैयारी भी हो रही है। मोदी के 31 अक्टूबर 2021 को संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में ग्लासगो में होने वाले जलवायु परिवर्तन कांफ्रेंस (काप-26) में हिस्सा लेने के लिए वहां पहुंचेंगे।

Dhyanendra Singh ChauhanFri, 22 Oct 2021 08:53 PM (IST)
ग्लासगो में पीएम मोदी की ब्रिटिश पीएम बोरिस जानसन के साथ द्विपक्षीय मुलाकात होगी

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एक-दूसरे की वैक्सीन को मंजूरी देने या नहीं देने को लेकर भारत और ब्रिटेन में जो गलतफहमी थी, वह खत्म हो चुकी है। दोनों देशों की सरकारें द्विपक्षीय रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने की कोशिश फिर से तेज कर चुकी हैं। शुक्रवार को भारत की यात्रा पर आई ब्रिटेन की विदेश मंत्री एलिजाबेथ ट्रस की विदेश मंत्री एस जयशंकर से द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से वार्ता हो चुकी है। पहली बार भारत और ब्रिटेन की तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास गुरुवार को शुरू हुआ, जो सात दिनों तक चलेगा।

यही नहीं पीएम नरेंद्र मोदी की इस महीने के अंत तक ब्रिटेन जाने की तैयारी भी हो रही है। मोदी के 31 अक्टूबर, 2021 को संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में ग्लासगो में होने वाले जलवायु परिवर्तन कांफ्रेंस (काप-26) में हिस्सा लेने के लिए वहां पहुंचेंगे। ग्लासगो में उनकी ब्रिटिश पीएम बोरिस जानसन के साथ द्विपक्षीय मुलाकात होगी। जानसन पिछले एक वर्ष में दो बार भारत की यात्रा अंत समय में रद कर चुके हैं। चुनाव के बाद सत्ता संभालने के बाद उनकी पीएम मोदी के साथ यह पहली आमने-सामने मुलाकात होगी। दोनों नेताओं की तरफ से भारत व ब्रिटेन में होने वाले मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर विधिवत वार्ता का एलान होने की संभावना है।

भारत और ब्रिटेन आपसी रिश्तों में सामंजस्य बनाने में जुटे

सूत्रों की मानें तो मई 2021 में पीएम मोदी और पीएम जानसन के बीच वर्चुअल बैठक में समग्र रणनीतिक साझेदारी को लेकर सहमति बनी थी। उसके बाद से कई स्तरों पर द्विपक्षीय आदान-प्रदान होने की शुरुआत होनी थी। कुछ वजहों से इसमें देरी हो गई है, लेकिन अब दोनों देश इसकी भरपाई कर रहे हैं, ताकि शीर्ष नेताओं की तरफ से दिए गए निर्देश के मुताबिक द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत किया जा सके। दोनों देश पहले ब्रेक्जिट और उसके बाद कोविड की वजह से काफी वक्त जाया कर चुके हैं। अब जिस हिसाब से वैश्विक कूटनीतिक व अर्थनीति बदल रही है, उसी हिसाब से दोनों देश आपसी रिश्तों में सामंजस्य बनाने में जुट गए हैं। यही वजह है कि शुक्रवार को ब्रिटेन की विदेश मंत्री की पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ अलग से मुलाकात हुई है। इसमें ग्रीन इनर्जी, इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग, फिनटेक जैसे बेहद नए क्षेत्रों में सहयोग को लेकर काम करने पर चर्चा हुई है। इस बारे में आगे विभिन्न विभागों के बीच भी वार्ता करने का फैसला किया गया है।

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