एक दूसरे के सैन्य अड्डे इस्तेमाल करेंगे भारत-ऑस्ट्रेलिया, दोनों देशों के बीच हुए नौ समझौते

एक दूसरे के सैन्य अड्डे इस्तेमाल करेंगे भारत-ऑस्ट्रेलिया, दोनों देशों के बीच हुए नौ समझौते
Publish Date:Fri, 05 Jun 2020 03:02 AM (IST) Author: Krishna Bihari Singh

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रियों की अगुआई में गुरुवार को दोनों देशों के बीच पहली वर्चुअल शिखर बैठक कई मायने में ऐतिहासिक रही। ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरीसन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच के रिश्ते को आगे बढ़ाते हुए इसे व्यापक रणनीतिक साझेदारी में तब्दील कर दिया है। दोनों देशों ने बेहद महत्वपूर्ण म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट (एमएलएसएम) पर हस्ताक्षर किया है, जिससे अब इनकी सेनाएं एक दूसरे के सैन्य अड्डों व अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगी।

चीन पर नहीं हुई बात लेकिन संदेश भी साफ

यही नहीं भारत और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सभी देशों के लिए समान अवसर वाला बनाने के उद्देश्य से घोषणा पत्र भी जारी किया है। बैठक के बाद विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्वी) विजय ठाकुर सिंह ने बताया कि चीन पर कोई बात नहीं हुई लेकिन दोनों देशों के बीच हुए समझौते और बैठक के बीच में मोदी और मॉरीसन की तरफ से की गई टिप्पणियों से साफ है कि दोनों देशों की साझा चिंता किस देश से है।

दोनों देशों में नौ समझौते

दोनों देशों के बीच नौ समझौते हुए जिसमें सबसे अहम डील एमएलएसएम है, जिसके तहत दोनों देश एक दूसरे के सैन्य अड्डे का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस तरह का समझौता भारत ने अभी तक अमेरिका, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर के साथ किया है। इस समझौते के मुताबिक अब भारतीय नौसैनिक जहाजों को ऑस्ट्रेलिया के तेल टैंकर से कहीं भी ईंधन मिल सकता है। ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के जहाजों को यही सुविधा भारत भी देगा।

एक दूसरे की धरती पर उतरने देंगे विमान

एक दूसरे की वायु सेना के विमानों को उतरने, उड़ान भरने, रख-रखाव की सुविधा भी दोनों देश देंगे। जाहिर है कि भारतीय जहाजों को अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहूलियत होगी। सैन्य सहयोग बढ़ाने के दूसरे आयामों का एलान किया गया है। भारत-जापान-अमेरिका के बीच होने वाले सैन्य अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को शामिल करने के मुद्दे पर गुरुवार को कोई चर्चा नहीं हुई लेकिन जानकार बताते हैं कि इस बारे में कभी भी फैसला हो सकता है।

रणनीतिक साझेदारी का मसौदा भी अहम

दोनों देशों की तरफ से जारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का मसौदा बेहद अहम है। इसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र को आसपास के सभी देशों के लिए समान अवसर वाला बनाने के लिए सामुद्रिक सहयोग बढ़ाने का एलान किया गया है। इसमें रक्षा क्षेत्र में विज्ञान व तकनीकी सहयोग को बढ़ाने की भी बात कही गई है। दोनों देशों के तकनीकी संगठन मिलकर शोध व अनुसंधान करेंगे। साथ ही रक्षा क्षेत्र में साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करने का एलान किया गया है।

ऑस्‍ट्रेलिया ने एनएसजी में समर्थन का भरोसा दिया

ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को अपनी ओर से मजबूत समर्थन देने का भरोसा भी दिया है। मोदी और मॉरीसन ने आíथक सहयोग से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी बात की और आतंकवाद पर भी चर्चा हुई। निश्चित तौर पर यह पहली वर्चुअल शिखर बैठक दोनों देशों को मजबूत रक्षा व रणनीतिक साझेदार बनाने की दिशा देने वाली बैठक के तौर पर जानी जाएगी।

कहां तक पहुंची दोनों देशों के बीच साझेदारी

- पहली वर्चुअल शिखर बैठक में दोनों देशों के पीएम ने रक्षा सहयोग को दी नई ऊंचाई

- विभिन्न क्षेत्रों में सात समझौतों और दो घोषणा पत्र के साथ संपन्न हुई शिखर बैठक

- ताजा समझौते के बाद ऑस्ट्रेलिया पांचवां देश जिसके सैन्य अड्डे इस्तेमाल करेगा भारत

- दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामुद्रिक सहयोग को लेकर जारी किया साझा दृष्टि पत्र

- भारत को एनएसजी की सदस्यता दिलाने के लिए अपना मजबूत समर्थन देगा ऑस्ट्रेलिया

- सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए भी समर्थन का भरोसा

- इंडोनेशिया, वियतनाम, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, अमेरिका के साथ बढ़ाएंगे सहयोग

पीएम मोदी ने साझेदारी का नया मॉडल बताया

वर्चुअल बैठक के बाद पीएम मोदी ने इसे साझेदारी का नया मॉडल कहा। उन्होंने ट्वीट किया, 'भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी का नया मॉडल, रिश्ते आगे बढ़ाने का नया मॉडल। भारत-ऑस्ट्रेलिया वर्चुअल शिखर बैठक में अपने मित्र पीएम स्कॉट मॉरीसन से बात की। दोनों देशों के संबंधों पर व्यापक चर्चा हुई।'

चीन से परेशान हैं दोनों देश

चीन के आक्रामक व्यवहार से अभी भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों परेशान हैं। ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच अभी कारोबारी तनाव चरम पर है। वहीं भारत और चीन के बीच सीमा विवाद की स्थिति तनावपूर्ण है। बैठक में पीएम मोदी का यह कहना कि भारत व ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत संबंध इस क्षेत्र में ज्यादा स्थायित्व लाएंगे और दोनों देशों की तरफ से हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए विशेष घोषणा पत्र लाना बताता है कि इशारा किस तरफ है। 

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