प्लास्टिक बोरियों को हटाकर जूट बोरियों को अमल में लाना सरकार के सामने हैं कई चुनौतियां

सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली। देश में खाद्यान्न और चीनी की होने वाली पैकिंग से प्लास्टिक बोरियों को हटाने की चुनौतियां कम नहीं हैं। प्लास्टिक हटाकर शत प्रतिशत जूट बोरियों का उपयोग करना आसान नहीं होगा। खाद्य मंत्रालय ने इस मसले पर गंभीरता से विचार करना शुरु कर दिया है।

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और चीनी उद्योग को इसके विकल्प के बारे में सोच विचार करने को कह दिया गया है। इसके लिए अगले सप्ताह खाद्य मंत्रालय भंडारण एजेंसियों के साथ टेक्सटाइल मंत्रालय और जूट उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगा।

मांग के मुकाबले जूट बोरियों का उत्पादन नहीं हो पाता

घरेलू जूट उद्योग की हालत बहुत अच्छी न होने की वजह से मांग के मुकाबले जूट बोरियों का उत्पादन नहीं हो पाता है। प्लास्टिक के बढ़ते हुए उपयोग के चलते भी जूट बोरी बनाने वाले उद्योग संकट के दौर में हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने जूट उद्योग को समर्थन देने के उद्देश्य से खाद्यान्न की पैकिंग में 85 से 90 फीसद तक जूट के बोरों के प्रयोग को अनिवार्य बना दिया है। जबकि चीनी की पैकिंग में 20 फीसद जूट बोरियों का उपयोग को वैधानिक किया गया है।

जूट बोरियों की उपलब्धता न होना

लेकिन जूट उद्योग इस मांग को भी पूरा करने में हर साल नाकाम साबित होता है। यही वजह है कि रबी और खरीफ मार्केटिंग सीजन में विभिन्न राज्यों की खरीद एजेंसियां केंद्र सरकार के पास बोरियों की उपलब्धता न होने का रोना रोती है। अनिवार्यता के प्रावधान में हर बार छूट प्राप्त करती हैं।

प्लास्टिक बोरियों को हटाना होगा

केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने बताया कि खाद्यान्न और चीनी जैसी जिंस की पैकिंग में उपयोग होने वाली प्लास्टिक बोरियों को हटाना होगा, लेकिन इसके पहले संबंधित पक्षकारों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। यह बैठक अगले सप्ताह बुलाई जा सकती है। इसमें जल्दबाजी नहीं की जाएगी। लेकिन प्लास्टिक बोरियों का विकल्प तलाशना ही होगा।

चीनी उद्योग के लिए जूट की बोरियां उपयुक्त नहीं

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अविनाश वर्मा का कहना है कि चीनी उद्योग के लिए जूट की बोरियां उपयुक्त नहीं हैं। जूट बोरियां नमी सोख लेती हैं, जिससे उसमें रखी चीनी का क्वालिटी प्रभावित होती है। जूट बोरियां वैकल्पिक बोरियों के मुकाबले महंगी होती हैं। इन सबके बावजूद मांग के अनुरूप घरेलू जूट बोरियां उपलब्ध नहीं हो पाती हैं।

जूट बोरियों का उपयोग

इस्मा का कहना है कि 20 फीसद जूट बोरियों के उपयोग की अनिवार्यता के बावजूद जूट उद्योग उसे पूरा नहीं कर पाता है। इसके लिए सरकार से हर बार अनुमति लेनी पड़ती है। जूट बोरियां बनाने में पेट्रोलियम का छिड़काव किया जाता है, जिससे उसमें रखी चीनी में उसकी महक समा जाती है। चीनी के दाना छोटा होने की वजह से इसमें से लीक होते हैं। जूट पैकेजिंग मैटीरियल एक्ट 1987 के प्रावधान के तहत खाद्यान्न व चीनी की पैकिंग में जूट बोरियों का उपयोग अनिवार्यता है।

 

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