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गेमिंग एप अल्जटेक बताएगा अल्जाइमर का खतरा, IIT भिलाई के छात्रों ने किया डेवलप, ऐसे करेगा काम

गेमिंग एप अल्जटेक बताएगा अल्जाइमर का खतरा, IIT भिलाई के छात्रों ने किया डेवलप, ऐसे करेगा काम
Publish Date:Mon, 10 Aug 2020 06:02 AM (IST) Author: Krishna Bihari Singh

अंशुल तिवारी, भिलाई। आइआइटी भिलाई के विद्यार्थियों ने एक ऐसा गेमिंग एप बनाया है जो खेलने वाले द्वारा बार-बार दोहराई जा रहीं गलतियों की गणना और विश्लेषण कर अल्जाइमर (भूलने की बीमारी) का पता लगाएगा। इससे व्यक्ति को वक्त रहते इलाज कराने में मदद मिलेगी। यह एप बनाकर विद्यार्थियों ने हैकथॉन में एक लाख रुपये का पहला पुरस्कार भी जीता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) भिलाई की इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल (आइआइसी) द्वारा स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (एसआइएच) में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया।

ऐसे लगाता है बीमारी का पता

आइआइसी के सदस्य डॉ. धीमान साहा ने बताया कि संस्थान के बीटेक विद्यार्थियों ने न केवल हैकाथॉन में भाग लिया बल्कि टीम ने खिताब भी अपने नाम किया है। छात्रों ने अल्जटेक नाम का एक मोबाइल गोमिंग एप्लीकेशन तैयार किया। यह एप व्यक्ति की मेमोरी, हाथ और आंख के समन्वय, अमूर्त सोच आदि का परीक्षण करता है। यह गेम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करता है। गेम के जरिए खेलने वाले की याद रखने की क्षमता, गलतियों के दोहराब का विश्लेषण करता है। टीम के मुखिया अशिताभ मिश्रा के अनुसार यह गेम एप भारत में अल्जाइमर के अनुसंधान की क्षमता रखता है।

चिकित्‍सकों के बारे में भी देता है जानकारी

इसके अलावा यदि कोई रोगी जोखिम में है तो एप्लीकेशन बीमारी को पहचान कर निकटतम प्रमाणित न्यूरो चिकित्सकों और डॉक्टरों के बारे में भी जानकारी देता है। अलग करने के विचार ने बनाया अव्वल छप्पन घंटे की चुनौतीपूर्ण हैकाथॉन से जूझने के बाद टीम ने यह खिताब और एक लाख रुपये नकद पुरस्कार भी जीता। टीम लीडर अशिताभ ने बताया कि जब हैकाथॉन में हिस्सा लेने के लिए कहा गया तो टीम ने तय किया कि कुछ अलग करेंगें और यूजर बेस्ड काम किया जाए।

अल्‍जाइमर से लड़ने में मिलेगी मदद

सभी ने अल्जाइमर पर काम करना तय किया। इसके बाद टीम के सदस्यों ने अल्जाइमर से संबंधित अध्ययन किया। आइआइटी भिलाई के निदेशक प्रो. रजत मूना ने कहा कि विद्यार्थियों के तकनीकी इनोवेशन से भविष्य में दुनियाभर के लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली पुरानी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी से लड़ने में मदद मिलेगी। एप बनाने वाली आइआइटी भिलाई की डेवलपर टीम में रोहित कर, स्मर्णा पंक्‍ती, हेमंत मीणा, शुभम अग्रवाल, पवन कुमार और अशिताभ मिश्रा शामिल रहे।

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